*बचेली रेलवे स्टेशन: सुरभि इंटरप्राइज के ठेका मजदूरों का शोषण, 12 घंटे काम और वेतन में देरी की मार*
विशाखापटनम बचेली रेलवे स्टेशन पर सुरभि इंटरप्राइज मे कार्यरत ठेका मजदूरों की व्यथा किसी से छिपी नहीं है। लगभग 27 कुशल मजदूर, जो कैंटीन, लॉबी, और रनिंग रूम जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को संभाल रहे हैं, पिछले कई वर्षों से शोषण का शिकार हो रहे हैं। इन मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार रंजन भौमिक, जो बचेली का निवासी बताया जाता है, उन्हें 12 घंटे की लंबी शिफ्ट में काम करने के लिए मजबूर कर रहा है। इतना ही नहीं, पिछले दो महीनों से इन मजदूरों को वेतन भी नहीं मिला है, और वेतन मांगने पर ठेकेदार द्वारा टालमटोल किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल केंद्रीय श्रम कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि मजदूरों के मानवाधिकारों पर भी गंभीर सवाल उठाती है।
*चार साल से चली आ रही निविदा, मजदूरों का दर्द अनसुना*
सुरभि इंटरप्राइजेज को पिछले चार वर्षों से बचेली रेलवे स्टेशन पर कैंटीन, लॉबी, और रनिंग रूम के संचालन की निविदा मिली हुई है। इस निविदा के तहत 27 मजदूर कार्यरत हैं, जो सभी कुशल श्रेणी में आते हैं। केंद्रीय श्रम विभाग के अनुसार, कुशल ठेका कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 589 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है। लेकिन मजदूरों का कहना है कि ठेकेदार रंजन भौमिक उन्हें मात्र 300 से 350 रुपये प्रतिदिन देने को कहता है, वो भी 12 घंटे की कठिन शिफ्ट के लिए। यह राशि न केवल श्रम विभाग के निर्धारित न्यूनतम वेतन से बहुत कम है, बल्कि रेलवे के किसी भी कर्मचारी के लिए 12 घंटे की शिफ्ट का कोई प्रावधान भी नहीं है।
*12 घंटे काम की मजबूरी और धमकियों का साया*
मजदूरों ने बताया कि रंजन भौमिक पिछले एक साल से उन्हें 12 घंटे काम करने के लिए दबाव डाल रहा है। जो मजदूर इस शर्त को मानने से इनकार करते हैं, उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। एक मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमें दिन-रात काम करना पड़ता है, लेकिन दो महीने से तनख्वाह नहीं मिली। जब हम पैसे मांगते हैं, तो ठेकेदार हमें घुमाता है और कहता है कि ‘पैसा नहीं है, काम करना है तो करो, नहीं तो निकल जाओ।'” यह धमकियां मजदूरों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रही हैं, और वे डर के साये में काम करने को मजबूर हैं।
*केंद्रीय श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन*
केंद्रीय श्रम विभाग ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन में हाल ही में संशोधन किया है, जो 1 अक्टूबर 2024 से लागू है। इसके तहत कुशल मजदूरों को 954 रुपये प्रतिदिन या 24,804 रुपये प्रति माह वेतन मिलना चाहिए। इसके बावजूद, बचेली के मजदूरों को न केवल कम वेतन दिया जा रहा है, बल्कि वेतन भुगतान में भी देरी की जा रही है। यह केंद्रीय श्रम कानूनों, विशेष रूप से न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 और वेतन भुगतान अधिनियम 1936 का खुला उल्लंघन है। मजदूरों का कहना है कि वे पिछले 3-4 साल से कार्यरत हैं और कुशल श्रेणी में होने के बावजूद उन्हें उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
*उच्च अधिकारियों की उदासीन*
तामजदूरों ने अपनी शिकायत कई बार रेलवे के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। एक मजदूर ने कहा, “हमने कई बार अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमें लगता है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत है।” यह स्थिति रेलवे प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है। मजदूरों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है, और उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
*श्रम विभाग और कानूनी उपाय*
केंद्रीय श्रम विभाग ने मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए कई प्रावधान बनाए हैं। नियोजित व्यक्ति अधिनियम की धारा 15 के तहत मजदूर अपनी शिकायत नजदीकी श्रम कार्यालय में दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, श्रम विभाग ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18001800999 भी जारी किया है, जहां मजदूर अपनी समस्याएं दर्ज कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मजदूरों को संगठित होकर अपनी शिकायत ई-श्रम पोर्टल पर भी दर्ज करानी चाहिए, जो असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित करता है।
*मजदूरों की मांग और अपील*
*बचेली के मजदूरों की मांग साफ है:*
*1:–केंद्रीय श्रम विभाग के अनुसार न्यूनतम वेतन (589 रुपये प्रतिदिन) का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।*
*2:–12 घंटे की जबरन शिफ्ट को समाप्त कर 8 घंटे की शिफ्ट लागू की जाए।*
*3:–पिछले दो महीनों का बकाया वेतन तत्काल दिया जाए।*
*4:–ठेकेदार द्वारा दी जा रही धमकियों पर रोक लगाई जाए और उचित जांच हो।*
*मजदूरों ने केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन से अपील की है कि उनकी स्थिति पर ध्यान दिया जाए और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
*निष्कर्ष:* मजदूरों के हक की लड़ाई*
बचेली रेलवे स्टेशन पर सुरभि इंटरप्राइजेज के तहत कार्यरत मजदूरों की स्थिति देश में ठेका मजदूरों के शोषण की एक बानगी है। केंद्रीय श्रम कानूनों का उल्लंघन, वेतन में देरी, और जबरन लंबी शिफ्ट जैसी समस्याएं मजदूरों के जीवन को और कठिन बना रही हैं। यह समय है कि रेलवे प्रशासन और श्रम विभाग इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे। मजदूरों की मेहनत का उचित सम्मान और उनके हक का भुगतान सुनिश्चित करना न केवल कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि सामाजिक न्याय की भी मांग है।
*संपर्क और शिकायत के लिए:*
*श्रम विभाग टोल-फ्री नंबर: 18001800999*
*ई-श्रम पोर्टल: www.eshram.gov.in*
*नजदीकी श्रम कार्यालय में शिकायत दर्ज करें*


