*एनएमडीसी बचेली कॉम्प्लेक्स में जल शुद्धिकरण की घोर लापरवाही: 4-5 साल से नहीं हुई आरओ की सफाई, जनता को परोसा जा रहा अशुद्ध पानी*
बचेली, दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़): राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के बचेली कॉम्प्लेक्स में जल शुद्धिकरण व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। स्थानीय निवासियों और सूत्रों के अनुसार, बचेली में लगे आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) जल शुद्धिकरण संयंत्रों की पिछले 4 से 5 वर्षों से कोई सफाई या रखरखाव नहीं किया गया है। यह लापरवाही न केवल एनएमडीसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी कर रही है।
*तीन प्रमुख स्थानों पर आरओ की दुर्दशा*
बचेली में तीन प्रमुख स्थानों—कॉफी हाउस, एसकेएमएस भवन, और सुभाष नगर कोऑपरेटिव स्टोर के पास लगे आरओ संयंत्रों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। ये संयंत्र, जो स्थानीय निवासियों और एनएमडीसी कर्मचारियों के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किए गए थे, अब केवल नाम के लिए चल रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इन संयंत्रों के फिल्टर, जो समय-समय पर सफाई और बदलाव की मांग करते हैं, वर्षों से उपेक्षित पड़े हैं। नतीजतन, जनता को “शुद्ध” पानी के नाम पर अशुद्ध और संभावित रूप से हानिकारक पानी पिलाया जा रहा है।
*स्थानीय निवासियों में आक्रोश*
स्थानीय निवासियों ने इस लापरवाही के खिलाफ गहरी नाराजगी व्यक्त की है। सुभाष नगर के निवासी रमेश कुमार ने बताया, “हम हर दिन कोऑपरेटिव स्टोर के पास लगे आरओ से पानी लेते हैं, लेकिन कई बार पानी में अजीब सी गंध आती है। हमें नहीं पता कि यह पानी कितना सुरक्षित है। एनएमडीसी को इतने बड़े स्तर पर काम करने वाली कंपनी होने के बावजूद इतनी लापरवाही क्यों बरत रही है?”
इसी तरह, कॉफी हाउस के पास पानी लेने वाले एक अन्य निवासी, शांति देवी ने कहा, “हमारे बच्चों और परिवार की सेहत का सवाल है। अगर आरओ की सफाई नहीं हो रही है, तो हमें क्या गंदा पानी पिलाया जा रहा है? एनएमडीसी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”
*स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर*
विशेषज्ञों के अनुसार, आरओ संयंत्रों की नियमित सफाई और रखरखाव न होने से पानी में बैक्टीरिया, फंगस, और अन्य हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ सकती है। लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से पेट संबंधी बीमारियां, डायरिया, और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। बचेली में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को देखते हुए, यह लापरवाही और भी खतरनाक साबित हो सकती है।
*एनएमडीसी की पुरस्कृत छवि पर सवाल*
एनएमडीसी, जो अपनी कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) और पर्यावरण संरक्षण के लिए कई पुरस्कार जीत चुकी है, इस मामले में पूरी तरह विफल नजर आ रही है। 2023-24 में एनएमडीसी के बीआईओएम, बचेली कॉम्प्लेक्स को “मजबूत एचआर उत्कृष्टता पुरस्कार” और “खनन उत्कृष्टता – ईएसजी और स्थिरता” जैसे सम्मान प्राप्त हुए थे। लेकिन पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही बरतने से कंपनी की प्रतिष्ठा पर गहरा धब्बा लग रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विजय ठाकुर ने कहा, “एनएमडीसी को पुरस्कारों की चमक से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत पर ध्यान देना चाहिए। अगर कंपनी अपने कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य की परवाह नहीं कर सकती, तो ये पुरस्कार बेमानी हैं।”
*क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?*
जब इस मामले में एनएमडीसी के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरओ संयंत्रों का रखरखाव तीसरे पक्ष की एजेंसी के जिम्मे है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि आखिरी बार इनकी सफाई कब की गई थी। यह जवाबदेही की कमी और प्रशासनिक लापरवाही को और उजागर करता है।
*जनता की मांग: तत्काल कार्रवाई*
स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि एनएमडीसी तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित कदम उठाए:
*1:-आरओ संयंत्रों की गहन सफाई और जांच:*
*2:-सभी तीन स्थानों पर लगे आरओ संयंत्रों की तत्काल सफाई और फिल्टर बदलाव सुनिश्चित किया जाए।*
*3:-नियमित रखरखाव का शेड्यूल: भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए एक निश्चित समयावधि में रखरखाव की व्यवस्था की जाए।*
*4:-पानी की गुणवत्ता की जांच: स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।*
*जवाबदेही तय करना: इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए।*
*क्या हैएनएमडीसी की जिम्मेदारी?*
एनएमडीसी, जो भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक और निर्यातक कंपनी है, बचेली में अपनी स्थापना के बाद से स्थानीय समुदाय के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही है। लेकिन पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता को नजरअंदाज करना न केवल कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कंपनी की प्राथमिकताएं केवल उत्पादन और मुनाफे तक सीमित हैं।


