*किरंदुल की जल आपूर्ति योजना: मलागीर नाले से सपनों का पानी, 12 करोड़ से 44 करोड़ तक का सफर, फिर भी अधूरी कहानी*
छत्तीसगढ़ की सबसे धनी नगरपालिका परिषद, किरंदुल, एक बार फिर सुर्खियों में है। मलागीर नाले से जल आपूर्ति की महत्वाकांक्षी योजना, जिसने कभी जनता के दिलों में स्वच्छ पेयजल की उम्मीद जगाई थी, आज सवालों के घेरे में है। 2016 में शुरू हुई इस परियोजना की लागत तब लगभग 12 करोड़ रुपये थी, लेकिन 9-10 साल बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। अब 2024-25 में उसी मलागीर नाले से पानी लाने के लिए 44.53 करोड़ रुपये की नई मांग और स्वीकृति के बावजूद, परियोजना फिर ठंडे बस्ते में चली गई है। आखिर इन करोड़ों रुपये का क्या हुआ? क्या मलागीर नाला इन पैसों को बहा ले गया, या यह जनता के सपनों का मजाक बनकर रह गया?
*2016 की कहानी: 12 करोड़ का सपना*
2016 में किरंदुल नगरपालिका और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग, दंतेवाड़ा ने मलागीर नाले से किरंदुल तक पाइपलाइन बिछाकर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। इस परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हुई, राज्य शासन से 12 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई, और काम शुरू होने की उम्मीद थी। लेकिन अज्ञात कारणों से यह योजना ठप हो गई। इसके बाद मदाढ़ी नाले से पानी लाने का वैकल्पिक प्लान बनाया गया। मदाढ़ी नाले में एनीकट, कड़मपाल ग्राम पंचायत में पंप हाउस, और किरंदुल के वार्ड नंबर 2 में फिल्टर हाउस तक बनाया गया। सब कुछ तैयार होने के बावजूद, यह परियोजना रहस्यमयी ढंग से गायब हो गई। जनता के लिए यह “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” जैसा बनकर रह गया। सवाल उठता है—12 करोड़ रुपये कहां गए? क्या यह राशि आसमान खा गया, जमीन निगल गई, या मलागीर नाले में बह गई?
*2024-25: नया दांव, 44.53 करोड़ की मांग*
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, 2024 में किरंदुल नगरपालिका परिषद ने मलागीर नाले से जल आपूर्ति के लिए राज्य शासन से 44.53 करोड़ रुपये की मांग की। यह राशि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी “नल जल योजना” के तहत शहर और आसपास के गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए थी। राज्य शासन ने इस मांग को गंभीरता से लिया और 17 दिसंबर 2024 को स्वीकृति पत्र (क्रमांक 24013155651) जारी किया। 12 मार्च 2025 को किरंदुल नगरपालिका को औपचारिक स्वीकृति मिली। जनता में एक बार फिर उम्मीद जगी कि अब शायद स्वच्छ पानी का सपना पूरा होगा।
*नया मोड़: 306 करोड़ की दूसरी परियोजना और निरस्ती*
लेकिन कहानी में नया ट्विस्ट तब आया, जब दंतेवाड़ा जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास निधि (DMF) से 306 करोड़ रुपये की लागत से चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस बड़े वित्तीय भार के कारण मलागीर नाले की जल आपूर्ति परियोजना की निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप, 17 मार्च 2025 के आदेश के तहत 44.53 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि और इस परियोजना को निरस्त कर दिया गया।
*जनता में मायूसी, PHE विभाग पर सवाल*
इस निरस्ती ने किरंदुल की जनता को फिर मायूसी में डुबो दिया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक ही परियोजना के लिए दो बार अलग-अलग निविदाएं और अलग-अलग बजट कैसे स्वीकृत हुए? 2016 में 12 करोड़ रुपये की परियोजना का क्या हुआ? और अब 44.53 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद भी काम क्यों शुरू नहीं हुआ? क्या यह धन भी पहले की तरह “गधे के सिर से सींग” की तरह गायब हो जाएगा? PHE विभाग, दंतेवाड़ा और किरंदुल नगरपालिका पर जवाबदेही का दबाव बढ़ रहा है।
*सवाल जो जवाब मांगते हैं*
*1:-12 करोड़ रुपये का हिसाब: 2016 की परियोजना के लिए स्वीकृत 12 करोड़ रुपये का क्या हुआ? इस राशि का उपयोग कहां हुआ, और परियोजना क्यों पूरी नहीं हुई?
*2:-दोहरी निविदा का रहस्य:*
एक ही मलागीर नाले से पानी लाने के लिए दो बार अलग-अलग निविदाएं और बजट क्यों?
*3:-क्या यह योजनाबद्ध तरीके से धन के दुरुपयोग का मामला तो नहीं?*
*4:–44.53 करोड़ की निरस्ती:*
चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 306 करोड़ रुपये की परियोजना को प्राथमिकता देना समझ में आता है, लेकिन स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता को बार-बार अनदेखा क्यों किया जा रहा?
*5:-PHE विभाग की चुप्पी:* मदाढ़ी नाले की परियोजना के गायब होने और मलागीर परियोजना के ठप होने पर PHE विभाग की क्या सफाई है?
*किरंदुल की जनता का दर्द*
किरंदुल, जो छत्तीसगढ़ की सबसे धनी नगरपालिका मानी जाती है, वहां की जनता आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रही है। नल जल योजना का सपना अधूरा है, और बार-बार की निरस्ती ने लोगों का भरोसा तोड़ दिया है। स्थानीय निवासी कहते हैं, “हर बार नई स्वीकृति, नई उम्मीद, और फिर वही मायूसी। क्या हमारा हक सिर्फ कागजों पर ही रह जाएगा?”
*आगे क्या?*
यह मामला न केवल किरंदुल नगरपालिका और PHE विभाग, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही पर सवाल उठाता है। जनता मांग कर रही है कि:
*2016 की 12 करोड़ रुपये की परियोजना की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो।*
*मलागीर नाले की जल आपूर्ति योजना को प्राथमिकता दी जाए, ताकि नल जल योजना का लाभ लोगों तक पहुंचे।*
*भविष्य में ऐसी परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।*
*किरंदुल की जनता का “दिल के अरमान” मलागीर नाले में बहने से बचाने के लिए अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है। क्या PHE विभाग और नगरपालिका इस बार जनता के सपनों को हकीकत में बदल पाएंगे, या यह कहानी फिर अधूरी रह जाएगी? यह सवाल समय और प्रशासन के जवाब पर निर्भर करता है।

