*किरंदुल में NMDC की लापरवाही: जर्जर मकानों में पनप रहा अपराध, भविष्य में बड़े हादसे का खतरा*
किरंदुल (छत्तीसगढ़): राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) की किरंदुल परियोजना के तहत बने पुराने और जर्जर मकानों की बदहाल स्थिति ने शहरवासियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। ये खाली पड़े मकान अब नशेड़ियों, शराबियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन मकानों में गांजा, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन खुलेआम हो रहा है, साथ ही जुआ खेलने जैसे अवैध गतिविधियों का भी केंद्र बन गया है। सवाल यह है कि अगर भविष्य में इन जर्जर मकानों में कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या यह जिम्मेदारी NMDC की होगी, जिसने इन मकानों को खुला छोड़ दिया, या फिर नगरपालिका की, जिसके क्षेत्र में ये मकान आते हैं?
*जर्जर मकानों का हाल: हादसों का इंतजार*
किरंदुल में NMDC के कई पुराने मकान, जो कभी कर्मचारियों के आवास के लिए बनाए गए थे, अब पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। इन मकानों की दीवारें और छतें टूट रही हैं, और ये कभी भी ढह सकते हैं। इसके बावजूद, इन मकानों को न तो ध्वस्त किया गया है और न ही इनकी मरम्मत की गई है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, ये मकान असामाजिक तत्वों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं। रात के समय इन मकानों में नशाखोरी और अन्य अवैध गतिविधियां जोरों पर होती हैं।
एक स्थानीय निवासी ने बताया, “रात में इन मकानों के आसपास जाना खतरनाक है। नशेड़ी और शराबी यहां जमा होते हैं। बच्चे और महिलाएं इन रास्तों से गुजरने में डरते हैं। अगर कोई मकान ढह गया और कोई हादसा हुआ, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?”
*असामाजिक गतिविधियों का गढ़*
सूत्रों के अनुसार, इन जर्जर मकानों में न केवल नशाखोरी हो रही है, बल्कि जुआ और अन्य आपराधिक गतिविधियों का भी संचालन हो रहा है। किरंदुल शहर के कुछ युवा इन मकानों को अपने अवैध कामों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है।”पुलिस कभी-कभी छापा मारती है, लेकिन ये लोग फिर वापस आ जाते हैं। NMDC और नगरपालिका को इन मकानों को बंद करना चाहिए या इन्हें तोड़ देना चाहिए,”
*जिम्मेदारी का पेच: NMDC या नगरपालिका?*
ये जर्जर मकान NMDC की संपत्ति हैं, लेकिन ये किरंदुल नगरपालिका के क्षेत्र में आते हैं। इस वजह से जिम्मेदारी को लेकर असमंजस की स्थिति है। NMDC का कहना है कि ये मकान पुराने हो चुके हैं और इन्हें नए प्रोजेक्ट्स के तहत ध्वस्त करने की योजना है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। दूसरी ओर, नगरपालिका का कहना है कि ये मकान NMDC की संपत्ति हैं, इसलिए उनकी देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी NMDC की है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, सुरेश साहू , ने कहा, “यह जिम्मेदारी का खेल शहर के भविष्य को खतरे में डाल रहा है। अगर कोई बड़ा हादसा हुआ, तो दोनों पक्ष एक-दूसरे पर दोष मढ़ेंगे। लेकिन उससे पहले क्यों नहीं कोई कदम उठाया जा रहा?”
*भविष्य में मंडराता खतरा*
विशेषज्ञों का कहना है कि ये जर्जर मकान न केवल असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन रहे हैं, बल्कि ये एक बड़े हादसे को भी न्योता दे रहे हैं। बारिश के मौसम में इन मकानों के ढहने का खतरा और बढ़ जाता है। अगर कोई व्यक्ति इन मकानों में मौजूद हो और कोई हादसा हो, तो यह एक मानवीय त्रासदी में बदल सकता है।
इसके अलावा, इन मकानों के आसपास रहने वाले परिवारों का कहना है कि ये मकान शहर की सुंदरता को भी प्रभावित कर रहे हैं और आसपास के क्षेत्र में अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं।

