*किरंदुल में एनएमडीसी स्कूल का वार्षिक महोत्सव: बच्चों की प्रतिभा और बस्तर की संस्कृति की जीवंत झलक”*

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*किरंदुल में एनएमडीसी स्कूल का वार्षिक महोत्सव: बच्चों की प्रतिभा और बस्तर की संस्कृति की जीवंत झलक”*

किरंदुल, 26 अप्रैल 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित एनएमडीसी परियोजना विद्यालय, किरंदुल ने अपने वार्षिक उत्सव को बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया। यह आयोजन न केवल विद्यालय के गौरवशाली इतिहास और इसकी जीवन गाथा को दर्शाता है, बल्कि बच्चों की प्रतिभा, संस्कृति और सामुदायिक भावना को भी उजागर करता है। इस वर्ष का वार्षिक उत्सव विद्यालय के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिसमें छात्र-छात्राओं ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

*विद्यालय की गौरवशाली यात्रा*

एनएमडीसी परियोजना विद्यालय, किरंदुल की स्थापना राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के सामाजिक दायित्व के तहत हुई थी। यह विद्यालय न केवल किरंदुल और आसपास के क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय समुदाय के सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 1966 के दशक में स्थापित यह विद्यालय आज क्षेत्र में शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

विद्यालय की जीवन गाथा कठिनाइयों को पार करते हुए उत्कृष्टता की ओर बढ़ने की कहानी है। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता कम थी, लेकिन एनएमडीसी के प्रयासों और विद्यालय के समर्पित शिक्षकों की मेहनत ने इसे बदल दिया। आज यहाँ के छात्र न केवल शैक्षणिक क्षेत्र में बल्कि कला, संस्कृति, खेल और अन्य गतिविधियों में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं।

विद्यालय का दर्शन “शिक्षा, संस्कार और संस्कृति” पर आधारित है। यहाँ बच्चों को न केवल किताबी ज्ञान दिया जाता है, बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़े रखने का प्रयास किया जाता है। एनएमडीसी के सहयोग से विद्यालय में आधुनिक सुविधाएँ जैसे विज्ञान प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब और खेल के मैदान उपलब्ध हैं, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करते हैं।

*वार्षिक उत्सव: एक रंगारंग आयोजन*

इस वर्ष का वार्षिक उत्सव विद्यालय परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय गणमान्य व्यक्ति, एनएमडीसी के अधिकारी, अभिभावक और समुदाय के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिसने आयोजन को एक पवित्र और उत्साहपूर्ण शुरुआत दी।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बच्चों की मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियाँ थीं। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ कक्षाओं के छात्रों ने विभिन्न शैलियों में नृत्य प्रस्तुत किए। पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य जैसे राउत नाचा और पंथी से लेकर समकालीन नृत्य शैलियों तक, हर प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। खास तौर पर, स्थानीय आदिवासी संस्कृति को दर्शाने वाला एक नृत्य, जिसमें छात्रों ने रंग-बिरंगे परिधानों में अपनी प्रस्तुति दी, ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके अलावा, छात्रों ने नाटक, गायन और कविता पाठ जैसे अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। एक नाटक, जो पर्यावरण संरक्षण के महत्व को दर्शाता था, ने दर्शकों को गहरे तक प्रभावित किया। यह नाटक बच्चों की रचनात्मकता और सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी जागरूकता का प्रतीक था।

*विद्यालय की अपनी पहचान*

एनएमडीसी परियोजना विद्यालय, किरंदुल की अपनी एक विशिष्ट पहचान है। यह विद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है, जो बच्चों को अपनी प्रतिभा को निखारने और अपनी संस्कृति को संजोने का अवसर देता है। यहाँ की शिक्षा प्रणाली समावेशी है, जो विभिन्न पृष्ठभूमि के बच्चों को एक साथ लाती है।

विद्यालय का वार्षिक उत्सव इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे यह संस्थान बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और नेतृत्व की भावना को प्रोत्साहित करता है। इस आयोजन में बच्चों ने न केवल अपनी प्रतिभा दिखाई, बल्कि यह भी साबित किया कि वे भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनने की राह पर हैं।

*शिक्षक कांता राम की रंगोली ने जीता सबका दिल*

बीआईओ पी स्कूल के शिक्षक कामता राम ने अपनी अनूठी कला से न केवल विद्यालय का माहौल रंगीन किया, बल्कि बस्तर के आदिवासी संस्कृति को भी एक नई पहचान दी। उनके द्वारा स्कूल के फर्श पर बनाई गई रंगोली में आदिवासी जीवन की खूबसूरती को इतने जीवंत अंदाज में उकेरा गया कि देखने वाला हर शख्स मंत्रमुग्ध हो गया।

कामता राम ने रंगोली में बस्तर की आदिवासी परंपराओं, प्रकृति और संस्कृति को बारीकी से दर्शाया। उनके रंगों का जादू ऐसा था कि स्कूल के बच्चे, शिक्षक और अभिभावक इस खूबसूरत रंगोली के साथ सेल्फी लेने से खुद को रोक नहीं पाए। यह रंगोली न केवल कला का नमूना है, बल्कि बस्तर की समृद्ध विरासत को सहेजने का एक अनूठा प्रयास भी है।

स्थानीय लोगों ने कामता राम की इस पहल की जमकर सराहना की। स्कूल के प्राचार्य ने बताया, “कामता जी ने अपनी कला से बच्चों में रचनात्मकता और संस्कृति के प्रति प्रेम जगाया है। यह रंगोली हमारे स्कूल की शान बन गई है।”

*अभिभावकों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया*

कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने विद्यालय के प्रयासों की सराहना की। एक अभिभावक, श्री रमेश कुमार ने कहा, “यह देखकर गर्व होता है कि हमारे बच्चे न केवल पढ़ाई में बल्कि कला और संस्कृति में भी इतने प्रतिभाशाली हैं। यह विद्यालय हमारे समुदाय के लिए एक वरदान है।”

विद्यालय की प्राचार्य, सुनील दुबे ने अपने संबोधन में कहा, “हमारा उद्देश्य बच्चों को ऐसी शिक्षा देना है जो उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफल बनाए। यह वार्षिक उत्सव हमारी उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मैं अपने छात्रों और शिक्षकों को उनकी मेहनत और समर्पण के लिए बधाई देता हूँ।”

*एनएमडीसी का योगदान*

एनएमडीसी ने इस विद्यालय को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की है, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए निरंतर मार्गदर्शन भी दिया है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “एनएमडीसी का मानना है कि शिक्षा समाज के विकास की नींव है। हम इस विद्यालय के माध्यम से क्षेत्र के बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

*निष्कर्ष* एनएमडीसी परियोजना विद्यालय, किरंदुल का वार्षिक उत्सव एक ऐसा आयोजन था, जिसने शिक्षा, संस्कृति और समुदाय के बीच के सुंदर तालमेल को दर्शाया। यह आयोजन न केवल बच्चों की प्रतिभा को प्रदर्शित करने का मंच था, बल्कि विद्यालय की गौरवशाली यात्रा और इसकी सामाजिक प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है। इस तरह के आयोजन न केवल छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि समुदाय को एकजुट करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।यह विद्यालय निश्चित रूप से किरंदुल के लिए एक गर्व का विषय है, और इसका वार्षिक उत्सव इस क्षेत्र में शिक्षा और संस्कृति के प्रति इसके योगदान का एक जीवंत उत्सव है।

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