*प्रकाश विद्यालय में ट्यूशन का ‘खेल’: शिक्षकों की मनमानी, अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ*

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*प्रकाश विद्यालय में ट्यूशन का ‘खेल’: शिक्षकों की मनमानी, अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ*

प्रकाश विद्यालय, जो शिक्षा के क्षेत्र में अपनी साख का दावा करता है, अब एक गंभीर विवाद के घेरे में है। एक अभिभावक द्वारा दी गई चौंकाने वाली जानकारी ने स्कूल के शिक्षकों की कार्यशैली और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावक का आरोप है कि स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक बच्चों की पढ़ाई पर जानबूझकर ध्यान नहीं दे रहे और उन्हें ट्यूशन के नाम पर अपने घर बुलाकर 1000 से 1800 रुपये तक की अतिरिक्त फीस वसूल रहे हैं। यह ‘खेल’ न केवल अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रहा है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है।

*ट्यूशन का दबाव, फेल होने की धमकी*

अभिभावक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि स्कूल के शिक्षक कक्षा में पढ़ाई को हल्के में लेते हैं और बच्चों को कमजोर बताकर उनके माता-पिता को डराते हैं। यदि कोई बच्चा ट्यूशन नहीं लेता, तो अभिभावकों को बुलाकर बच्चों की पढ़ाई में कमजोरी का हवाला दिया जाता है और फेल होने की धमकी दी जाती है। इसके बाद अभिभावकों पर दबाव डाला जाता है कि वे अपने बच्चों को शिक्षकों के घर चलने वाली ट्यूशन कक्षाओं में भेजें, जहां प्रति बच्चा 1000, 1200 या 1800 रुपये तक की मासिक फीस ली जाती है।

*शिक्षकों की कमाई का जरिया बना ट्यूशन*

यह खुलासा स्पष्ट करता है कि शिक्षक स्कूल में पढ़ाई को जानबूझकर अधूरा छोड़ रहे हैं ताकि ट्यूशन के जरिए उनकी अतिरिक्त कमाई का रास्ता बना रहे। यह न केवल स्कूल की शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि शिक्षकों की नैतिकता और जिम्मेदारी को भी कठघरे में खड़ा करता है। अभिभावकों का कहना है कि इस तरह की मनमानी से उनकी आर्थिक स्थिति पर बोझ पड़ रहा है, और बच्चों पर भी पढ़ाई का अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है।

*अभिभावकों में आक्रोश, स्कूल प्रबंधन पर सवाल*

इस मामले ने अभिभावकों में गुस्सा पैदा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्कूल प्रबंधन इस ‘ट्यूशन रैकेट’ से अनजान है? या फिर प्रबंधन की मिलीभगत से यह सब चल रहा है? अभिभावकों का कहना है कि स्कूल को शिक्षकों की इस मनमानी पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देनी चाहिए।

*शिक्षा या धंधा?*

यह मामला शिक्षा के व्यावसायीकरण की एक और कड़वी सच्चाई को सामने लाता है। जब शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़कर निजी कमाई को प्राथमिकता देने लगें, तो यह बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए खतरे की घंटी है। प्रकाश विद्यालय के इस कथित ‘ट्यूशन खेल’ ने न केवल स्कूल की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग को भी तेज कर दिया है।

*सी जी संविधान न्यूज़ में खबर के बाद आगे क्या*

अभिभावकों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि कक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए, ताकि ट्यूशन की मजबूरी खत्म हो। यह खबर न केवल प्रकाश विद्यालय के लिए एक चेतावनी है, बल्कि उन सभी शिक्षण संस्थानों के लिए सबक है जो शिक्षा को व्यापार का साधन बना रहे हैं।

क्या आप भी इस तरह के किसी अनुभव से गुजरे हैं? अपनी राय और सुझाव हमारे साथ साझा करें।

नोट: यह खबर एक अभिभावक द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। स्कूल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए हम जल्दी ही संपर्क करने की कोशिश करेंगे

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