*किरंदुल नगरपालिका के लिए अच्छी खबर! अस्थाई दखल शुल्क निविदा में रिकॉर्ड 14.20 लाख की बोली, अब 50% जमा की बारी – 8वें दिन स्थिति क्या?*

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*किरंदुल नगरपालिका के लिए अच्छी खबर! अस्थाई दखल शुल्क निविदा में रिकॉर्ड 14.20 लाख की बोली, अब 50% जमा की बारी – 8वें दिन स्थिति क्या?*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 13 अप्रैल 2026 – किरंदुल नगरपालिका में अस्थाई दखल शुल्क (टोल/एंट्री फीस) की 2026-27 सत्र की निविदा प्रक्रिया में बड़ा सकारात्मक विकास हुआ है। 6 अप्रैल 2026 को शाम 4 बजे खुली इस निविदा में अधिकतम बोली 14 लाख 20 हजार रुपये पहुंच गई, जो पिछले 4-5 वर्षों में औसतन 4 लाख रुपये के आसपास रहने वाली बोली से दोगुनी से भी ज्यादा है। इससे नगरपालिका को 10 लाख रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व मिलने की मजबूत उम्मीद जगी है, जो सड़क सुधार, सफाई, विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं में सीधा निवेश हो सकता है।

निविदा प्रक्रिया के अनुसार, सफल बोलीदाता को 7 दिनों के अंदर बोली राशि का 50% यानी 7 लाख 10 हजार रुपये नगरपालिका कार्यालय में जमा करना था। आज 8वां दिन है और 7वां दिन रविवार होने के कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि राशि जमा हुई या नहीं। अगर सफल बोलीदाता ने समय पर जमा नहीं किया तो उनकी अमानत राशि जब्त हो जाएगी और वे भविष्य की निविदाओं में भी भाग लेने के अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे। ऐसे में नगरपालिका को फिर से नई निविदा निकालनी पड़ सकती है।

पिछले वर्षों से तुलना: विकास के लिए सुनहरा मौका

पिछले वर्षों में यह ठेका 4 लाख के अंदर सिमट जाता था, लेकिन इस बार बोली में जबरदस्त उछाल आया। दूसरी सर्वोच्च बोली भी 14 लाख रुपये रही। अगर सब कुछ सुचारू रहा तो नगरपालिका की आमदनी में भारी बढ़ोतरी होगी, जो स्थानीय विकास को नई गति देगी। मुख्य अधिकारी पर अब यह जिम्मेदारी है कि वसूली पूरी तरह पारदर्शी हो – आधिकारिक 50 रुपये की पर्ची पर ही शुल्क लिया जाए, कोई मनमानी न हो।

*विवाद एक बोलीदाता सुनील कुमार गुप्ता का पहलू भी सामने*

निविदा खुलते ही कुछ अनियमितताओं की चर्चा भी हुई। एक बोलीदाता सुनील कुमार गुप्ता ने एक ही सील बंद लिफाफे में दो अलग-अलग दरों वाले आवेदन जमा किए, जिसे नियमों का उल्लंघन और गुमराह करने की मंशा बताया जा रहा है। पिछले वर्ष राम छालीवाल (सुनील गुप्ता से जुड़े) पर अवैध वसूली के आरोप भी लगे थे। मुख्य अधिकारी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अगर इनकी बोली सफल होती है तो मामला परिषद की सामान्य बैठक में रखा जाएगा और फैसला लिया जाएगा।

अब क्या होगा?

नागरिकों और स्थानीय व्यापारियों की नजर अब मुख्य अधिकारी और परिषद पर है। अगर 50% राशि जमा हो गई तो यह किरंदुल नगरपालिका के लिए वाकई अच्छी खबर साबित होगी – ज्यादा राजस्व, बेहतर विकास। अगर नहीं जमा हुई तो फिर नई निविदा की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे थोड़ी देरी हो सकती है।

किरंदुलवासी उम्मीद कर रहे हैं कि पारदर्शिता बरती जाए, नियमों का पालन हो और यह अतिरिक्त राशि जनहित के कार्यों में खर्च हो। CG Samvidhan News लगातार इस मामले पर नजर रखे हुए है। अपडेट के लिए बने रहें – क्या 50% जमा हो गया या फिर नई निविदा की घोषणा?

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