*किरंदुल बिग ब्रेकिंग: एनएमडीसी किरंदुल परियोजना क्षेत्र में एल एंड टी-आरडी के मजदूरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 12 घंटे काम और 400-500 रुपये दिहाड़ी का मुद्दा*

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*किरंदुल बिग ब्रेकिंग: एनएमडीसी किरंदुल परियोजना क्षेत्र में एल एंड टी-एआरडी के मजदूरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 12 घंटे काम और 400-500 रुपये दिहाड़ी का मुद्दा*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 13 अप्रैल 2026 – दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में एनएमडीसी की किरंदुल परियोजना (एसपी-3) पर कार्यरत एल एंड टी तथा एआरडी कंपनी के सैकड़ों मजदूरों ने आज सुबह से ही पेमेंट, दिहाड़ी और काम के घंटों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।

एनएमडीसी के इस बड़े आयरन ओर प्रोजेक्ट पर सामंता, एल एंड टी और एआरडी जैसी बड़ी कंपनियों के माध्यम से हजारों मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें स्थानीय मजदूरों की संख्या करीब 2000 बताई जा रही है, जबकि छत्तीसगढ़ के बाहर से आए 3000 से 4000 मजदूर भी कार्यरत हैं। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें केंद्र सरकार के न्यूनतम मजदूरी नियमों (1 अप्रैल 2026 से लागू) की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

मजदूरों का कहना है कि उन्हें 12 घंटे काम कराया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने 8 घंटे का ही प्रावधान किया है। स्थानीय मजदूरों को मात्र 400-450 रुपये दिहाड़ी दी जा रही है, जबकि बाहर से आए मजदूरों को 450-500 रुपये। वहीं केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार अनस्किल्ड मजदूर के लिए 783 रुपये प्रतिदिन और स्किल्ड मजदूर के लिए 954 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम दिहाड़ी तय की गई है।

यह हड़ताल सिर्फ किरंदुल तक सीमित नहीं है। किरंदुल-बचेली क्षेत्र में इन बड़ी कंपनियों द्वारा मजदूरों का लगातार शोषण किए जाने की शिकायतें पहले भी आती रही हैं। मजदूरों का आरोप है कि कंपनियां सस्ती मजदूरी पर ज्यादा घंटे काम कराकर प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इससे मजदूरों का स्वास्थ्य और हक दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

मजदूरों की मांगें

केंद्र सरकार के न्यूनतम मजदूरी नियम (783 रुपये अनस्किल्ड, 954 रुपये स्किल्ड) का तुरंत लागू होना।

8 घंटे के काम का सख्ती से पालन।

समय पर और पूरा भुगतान।

बाहर से आए और स्थानीय मजदूरों के बीच भेदभाव समाप्त।

एनएमडीसी की किरंदुल परियोजना देश के प्रमुख आयरन ओर उत्पादन केंद्रों में शामिल है। ऐसे में इस हड़ताल का असर पूरे प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है। अभी तक प्रशासन या कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी बाहर से आए मजदूरों की पूरी जानकारी न होने की बात कही जा रही है, जो श्रम नियमों की अनदेखी को और उजागर करता है।

विश्लेषण:

यह हड़ताल सिर्फ दिहाड़ी का मुद्दा नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर ठेकेदार कंपनियों द्वारा श्रमिकों के शोषण का मामला है। केंद्र सरकार ने महंगाई को देखते हुए 1 अप्रैल 2026 से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई, लेकिन किरंदुल-बचेली जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़ी कंपनियां अभी भी पुरानी दरों पर काम करा रही हैं। इससे स्थानीय युवाओं में रोष बढ़ रहा है और प्रवासी मजदूर भी शोषित हो रहे हैं। अगर जल्द ही बातचीत नहीं हुई तो यह हड़ताल लंबी खिंच सकती है और एनएमडीसी के उत्पादन लक्ष्य पर असर डाल सकती है।

स्थानीय प्रशासन, एनएमडीसी प्रबंधन और श्रम विभाग को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि मजदूरों का हक मिले और परियोजना भी सुचारू रूप से चल सके।

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