*दंतेवाड़ा के सुदूर नक्सल प्रभावित गांव में अम्बेडकर जयंती का हर्षोल्लास: CAF कैंप ने बांटी सौगात, बढ़ाया भाईचारा*

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*दंतेवाड़ा के सुदूर नक्सल प्रभावित गांव में अम्बेडकर जयंती का हर्षोल्लास: CAF कैंप ने बांटी सौगात, बढ़ाया भाईचारा*

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 14 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के सुदूर क्षेत्र की ग्राम पंचायत हीरोली दोकापारा में स्थित सीएएफ (छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल) पुलिस कैंप में आज भारत रत्न डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाई गई। यह आयोजन न केवल सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बना, बल्कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच आपसी मेल-मिलाप को और मजबूत करने का अनुपम उदाहरण भी साबित हुआ।

कैंप के मुखिया रामावतार सिंह ने इस अवसर पर गांव के ग्रामीणों को शासन-प्रशासन से जोड़ने और पुलिस-जनता के बीच विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष पहल की। उन्होंने 100 टी-शर्ट्स और 100 साड़ियां ग्रामीणों को वितरित कीं। साथ ही कैंप परिसर में हलवा-पूड़ी का भंडारा लगाया गया, जिसमें गांव के सभी निवासियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और भोजन ग्रहण किया।

नक्सल मुक्ति के बाद बदलते रंग

दोकापारा क्षेत्र को पूर्व में नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, जहां सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच दूरी थी। लेकिन अब नक्सलवाद से मुक्ति के बाद गांव में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं। आज यहां शांति और विकास के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित हो रहे हैं। ग्रामीण अब एक-दूसरे के साथ भाईचारा बनाए हुए हैं और सुरक्षा बलों को अपना अभिन्न हिस्सा मान रहे हैं।

रामावतार सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का मकसद केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ना और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी पुलिस कैंप ग्रामीणों के विकास और कल्याण के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

सकारात्मक संदेश

यह आयोजन दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षा बलों की जन-संपर्क नीति की सफलता को दर्शाता है। जहां एक समय हिंसा और भय का माहौल था, वहां अब उत्सव, भाईचारा और विकास की कहानियां उभर रही हैं। डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती पर समानता, न्याय और सशक्तिकरण का संदेश इस कार्यक्रम के माध्यम से और मजबूती से पहुंचा।

दोकापारा अब नक्सल मुक्त गांव के रूप में नई राह पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे कार्यक्रम न केवल ग्रामीणों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र में शांति और समृद्धि का संदेश भी देते हैं।

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