*किरंदुल में पत्रकारों का अनोखा और सशक्त प्रदर्शन: गड्ढों भरे ‘गौरव पथ’ पर वृक्षारोपण कर सरकार और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई आवाज*
दंतेवाड़ा (किरंदुल): सड़कों की खस्ताहालत पर आमजन का गुस्सा अब चुप्पी तोड़ रहा है। किरंदुल के मुख्य मार्ग पर बने तालाब नुमा गड्ढों को लेकर स्थानीय पत्रकारों ने एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने गौरव पथ पर ही वृक्षारोपण कर दोनों मुद्दों को एक साथ उठाया — पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सड़क की जर्जर स्थिति पर ध्यान दिलाया।
यह वृक्षारोपण मुख्य रूप से मुख्य मार्ग के उस हिस्से पर किया गया, जहां बडे बडे गड्ढे गड्ढे तालाब जैसे नजर आते हैं। पत्रकारों का कहना है कि यह अभियान सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार और जनप्रतिनिधियों को सड़क की दुर्दशा दिखाने का एक सृजनात्मक तरीका है। गड्ढों को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रहेगा, क्योंकि नए लगाए गए पौधों की देखभाल के नाम पर भी प्रशासन को इस ओर ध्यान देना पड़ेगा।
इस अभियान में शामिल प्रमुख लोग:
कांग्रेस जिला प्रवक्ता राहुल महाजन
कांग्रेस पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष राजू रेड्डी
पत्रकार किशोर कुमार रामटेके
पत्रकार किशोर जाल
एस.एच. अजहर (एस अच अजहर)
पंकज सिन्हा
और अन्य स्थानीय पत्रकार व कार्यकर्ता
ये सभी लोग एक साथ मुख्य मार्ग पार खड़े होकर पौधे लगाते नजर आए। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास सिर्फ नाम का नहीं होना चाहिए। 12.5 करोड़ रुपये की लागत से बने गौरव पथ का हाल यह है कि बस स्टैंड से रिंग रोड नंबर-4 तक की सड़क फिर से गड्ढों से भरी पड़ी है। आम नागरिकों को रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पत्रकारों का संदेश
“हमने वृक्ष लगाकर दोहरी जिम्मेदारी निभाई है — एक तरफ पर्यावरण को हरा-भरा बनाने का प्रयास, दूसरी तरफ जनता की समस्या को सरकार तक पहुंचाना। गड्ढे सिर्फ सड़क के नहीं, बल्कि विकास की कहानी के भी हैं। जनप्रतिनिधि अब सड़क पर उतरकर खुद देख लें कि स्थिति क्या है।”
यह अभियान किरंदुलवासियों के बीच काफी चर्चा में है। स्थानीय लोग इसे सराहना के साथ देख रहे हैं कि मीडिया और कार्यकर्ता अब सिर्फ खबर लिखने तक सीमित नहीं रह गए, बल्कि समस्या का हल निकालने के लिए मैदान में उतर आए हैं।
किरंदुल जैसे औद्योगिक क्षेत्र में बेहतर सड़कें न सिर्फ सुविधा, बल्कि सुरक्षा का भी मुद्दा हैं। उम्मीद की जाती है कि इस सृजनात्मक प्रदर्शन से संबंधित विभाग जल्द ही सड़क की मरम्मत और सुधार के काम को गति देगा।
एक पेड़, एक संदेश — किरंदुल के पत्रकारों ने साबित कर दिया कि आवाज उठाने के कई तरीके होते हैं। कुछ लोग शोर मचाते हैं, तो कुछ पौधे लगाते हुए शांत लेकिन मजबूत संदेश देते हैं।

