*गौरव पथ पर गड्ढों का तांडव: प्रशासन की लापरवाही या जानबूझकर गोलमाल? किरंदुल-कोड़ेनार में जिम्मेदारी का घालमेल, जनता की जान पर बन रही है खेल!*
किरंदुल। गौरव पथ — नाम तो बड़ा शानदार, लेकिन हकीकत में यह सड़क अब मौत का फंदा बन चुकी है। आज जब पूरा इलाका गड्ढों से भरा पड़ा है, तो सवाल उठता है — यह क्षेत्र ग्राम पंचायत कोड़ेनार का है या किरंदुल नगरपालिका का? कोई जवाब देने वाला नहीं। सफाई की बात करें तो नगरपालिका के कर्मचारी झाड़ू मारते दिखते हैं, लेकिन क्षेत्र को पंचायत का बताया जाता है। फिर सवाल यह — अगर इलाका पंचायत का है तो नगरपालिका के सफाई कर्मचारी यहां क्यों सफाई करते हैं? और अगर सफाई नगरपालिका कर रही है तो यह क्षेत्र पंचायत का कैसे हो गया?
सबसे बड़ा सवाल जनता के मन में यह है — क्या ग्राम पंचायत कोड़ेनार गौरव पथ की सफाई को कागजों में दिखाकर मोटी रकम का गोलमाल कर रही है? सालों से यही खेल चल रहा है। पंचायत अपने मूलभूत सुविधाओं में सफाई का खर्चा दिखा रही है, जबकि असल काम नगरपालिका के कर्मचारी कर रहे हैं। या फिर यह पूरा क्षेत्र किरंदुल नगरपालिका के दायरे में आता है, जिसके कारण नगरपालिका मजबूरन सफाई कर रही है? लेकिन फिर पंचायत इसे अपना क्षेत्र क्यों बता रही है?
अब आता है असली खुलासा। किरंदुल के स्वागत द्वार से महज 50 मीटर दूर मुख्य मार्ग पर 1 से 2 फीट गहरा गड्ढा बन चुका है — इसे छोटा तालाब कहना ज्यादा सही होगा। इस गड्ढे की मरम्मत कौन करेगा — किरंदुल नगरपालिका या कोड़ेनार ग्राम पंचायत? कोई जवाब नहीं। कोई जिम्मेदार नहीं। कोई देखने वाला नहीं।
जनता की जान अब गले की फांस बन गई है। दोपहिया वाहन वाले इस गड्ढे में फंस गए तो बड़ा हादसा तय है। चारपहिया वाहनों को भारी नुकसान। गौरव पथ से गुजरने वाला हर राहगीर अपनी जिंदगी की चिंता में डूबा रहता है। क्या इतने बड़े गड्ढे को मुख्य मार्ग पर छोड़ना प्रशासन की सोची-समझी लापरवाही नहीं है?
सबसे बड़ी विडंबना यह कि इस गड्ढे को पार करके ही किरंदुल के सारे जनप्रतिनिधि और अधिकारी आते-जाते हैं। और गड्ढे से महज 70 मीटर की दूरी पर ग्राम पंचायत कोड़ेनार की सरपंच मीना मंडावी का निवास स्थान है। फिर भी जनता की तकलीफ देखने वाला कोई नहीं। सरपंच जी के घर के इतने करीब इतना बड़ा गड्ढा, लेकिन उनकी नजर नहीं पड़ रही? या फिर नजरअंदाज कर दिया गया है?
क्या यह प्रशासनिक घालमेल है?
क्या पंचायत और नगरपालिका के बीच जिम्मेदारी टालने का खेल चल रहा है?
क्या सफाई और मरम्मत के नाम पर फंड का गबन हो रहा है?
क्या जनता की जान की कीमत सिर्फ कागजों पर ही लिखी जाती है?
गौरव पथ आज गौरव के बजाय गड्ढों का प्रतीक बन चुका है। प्रशासन को जवाब देना चाहिए — कब तक जनता इस मौत के गड्ढे से गुजरती रहेगी? कब तक सरपंच और अधिकारी इस गड्ढे को नजरअंदाज करते रहेंगे? समय आ गया है कि जिम्मेदारों पर सवाल खड़े हों और जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, वरना एक छोटा सा गड्ढा बड़ा हादसा बन सकता है।

