*दंतेवाड़ा में पत्नी की हत्या का सनसनीखेज खुलासा: पति ने गला घोंटकर मारा, चाचा ने शव छिपाने में दी मदद*
दंतेवाड़ा, 10 नवंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के भांसी थाना क्षेत्र में एक महिला की हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। यह मामला एक अंधे कत्ल का था, जहां मृतका का शव निर्वस्त्र हालत में झाड़ियों में फेंका गया था। जांच में पता चला कि हत्या किसी अजनबी ने नहीं, बल्कि मृतका के पति ने ही की थी, और शव को ठिकाने लगाने में उसके चाचा ने सहयोग किया। पुलिस की विशेष टीम ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और स्थानीय पूछताछ के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई। दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
घटना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2025 को हुई, जब ग्राम कुंदेली के ओटेर खेत के पास सड़क किनारे एक महिला का शव मिला। मृतका की पहचान रीना रयामी के रूप में हुई, जो गांव की ही निवासी थी। शव निर्वस्त्र अवस्था में झाड़ियों में पड़ा था, जिससे शुरू में बलात्कार और हत्या का शक हुआ। मृतका के पति राजेश रयामी ने ही पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन जांच में वही मुख्य आरोपी निकला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ हुआ कि मौत गला घोंटने से हुई थी। इसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 64(1) और 103(1) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया।
पुलिस अधीक्षक गौरव राय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उदित पुष्कर (आईपीएस) और रामकुमार बर्मन के मार्गदर्शन में एसडीओपी कपिल चंद्रा के नेतृत्व वाली टीम ने मामले की गहन जांच शुरू की। थाना प्रभारी भांसी प्रहलाद कुमार साहू और साइबर सेल की टीम ने करीब एक महीने तक अथक प्रयास किए। उन्होंने हजारों मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया, कई सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आसपास के गांवों—जैसे कुंदेली, भांसी मासापारा, बड़े कमेली, धुरली और गमावाड़ा—के सैकड़ों ग्रामीणों से पूछताछ की। जांच से पता चला कि घटना वाले दिन (1 अक्टूबर 2025) शाम को रीना घर पहुंच गई थी, लेकिन रात 8 बजे के आसपास पति राजेश से झगड़े के दौरान उसने गला घोंटकर हत्या कर दी।
आरोपी राजेश ने साक्ष्य मिटाने के लिए चाचा रमेश रयामी की मदद ली। दोनों ने शव को मोटरसाइकिल (हीरो डीलक्स, नंबर सीजी 18 आर 2844) में लादकर गांव से बाहर ओटेर खेत के पास फेंक दिया। बलात्कार का भ्रम पैदा करने के लिए शव को निर्वस्त्र किया और रीना का थैला, मोबाइल (फ्लाइट मोड में) व कपड़े झाड़ियों में छिपा दिए। पुलिस ने मुख्य घटनास्थल (राजेश का घर) का निरीक्षण किया, रिकंस्ट्रक्शन कराया और सबूत जुटाए। 9 नवंबर 2025 को दोनों आरोपियों—राजेश रयामी (27 वर्ष) और रमेश रयामी (36 वर्ष), दोनों कुंदेली रयामी पारा के निवासी—को गिरफ्तार किया गया। उन्हें 10 नवंबर को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर भेजा गया। केस में अब धारा 3(5) और 238 बीएनएस भी जोड़ी गई है, क्योंकि साक्ष्य छिपाने का इरादा साफ था। अपराध संख्या 18/25 दर्ज है।
यह मामला घरेलू हिंसा और साक्ष्य छिपाने के गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। पुलिस की जांच से साबित हुआ कि अपराधी कितनी चालाकी से गुमराह करने की कोशिश करते हैं, लेकिन तकनीकी और स्थानीय सहयोग से सच्चाई सामने आ ही जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में साइबर सेल की भूमिका बढ़ती जा रही है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां पारंपरिक जांच चुनौतीपूर्ण होती है। दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पुलिस की यह सफलता स्थानीय समुदाय में विश्वास बढ़ाने वाली है।
इस जांच में एसडीओपी किरंदुल कपिल चंद्रा, थाना प्रभारी प्रहलाद कुमार साहू, निरीक्षक विजय राठौर, सउनि जयमंगल श्यामले, प्रधान आरक्षक विनोद मंडावी, नंदकुमार सिदार, महिला प्रधान आरक्षक भारती मंडावी, आरक्षक राजेंद्र ठाकुर, कन्हैया राठिया, महिला आरक्षक चेतना शाहनी और साइबर सेल के आरक्षक बेलाल सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पुलिस का कहना है कि आगे भी ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

