*कुट्रेम के समर्पित शिक्षक एम.आर. टांडिया का भावुक विदाई समारोह: 42 वर्षों का अनमोल योगदान*
कुंवाकोंडा (दंतेवाड़ा), 22 जुलाई 2026 — बस्तर की धरती पर शिक्षा के दीपक की तरह जलते एक शिक्षक की 42 वर्ष लंबी सेवा यात्रा आज भावुक विदाई के साथ समाप्त हुई। कुंवाकोंडा ब्लॉक के कुट्रेम शासकीय विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक श्री एम.आर. टांडिया के सेवानिवृत्ति अवसर पर विद्यालय परिसर में एक हृदयस्पर्शी विदाई समारोह आयोजित किया गया।
समारोह में सहायक खंड शिक्षा अधिकारी सहित ब्लॉक के सभी शिक्षकगण उपस्थित रहे। पूरा कुट्रेम गांव इन पलों में गहरी खामोशी और भावुकता में डूबा नजर आया।
जंगलों से शुरू हुई सेवा यात्रा
23 जनवरी 1987 को जब एम.आर. टांडिया कुट्रेम विद्यालय में शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए, तब परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं। किरंदुल से कुट्रेम की लगभग 10 किलोमीटर की दूरी घने जंगलों से भरी थी। साइकिल भी दुर्लभ थी, इसलिए वे पैदल ही विद्यालय पहुंचते थे। बस्तर-दंतेवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की रोशनी कम थी, लोग भाषा और आधुनिक ज्ञान से अनभिज्ञ थे।
लेकिन टांडिया सर ने कभी हार नहीं मानी। गांव के विकास के साथ-साथ उन्होंने अपनी यात्रा को भी बदला — पैदल से साइकिल, फिर मोटरसाइकिल और आज सेवानिवृत्ति के समय कार तक। इन 42 वर्षों में उन्होंने न केवल बच्चों को पढ़ाया, बल्कि पूरे गांव को शिक्षा और जागरूकता की दिशा में आगे बढ़ाया।
“टांडिया सर ने अपना पूरा जीवन कुट्रेम को समर्पित कर दिया। वे यहां के बच्चे, परिवार और शिक्षा के प्रति इतने समर्पित रहे कि उनका जाना पूरे गांव के लिए भावुक क्षण है,” उपस्थित शिक्षकों और ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा।
भावुक विदाई और भविष्य की कामनाएं
समारोह के दौरान वातावरण भावुकता से भरा रहा। सभी शिक्षकों, छात्रों और ग्रामीणों ने टांडिया सर के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कई लोगों ने सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें विद्यालय आकर बच्चों को मार्गदर्शन देने का अनुरोध किया, जो उनके प्रति गहरे सम्मान और विश्वास को दर्शाता है।
यह समारोह न केवल एक शिक्षक की सेवानिवृत्ति का उत्सव था, बल्कि समर्पण, त्याग और ग्रामीण शिक्षा के प्रति अटूट लगन का प्रतीक बन गया।
श्री एम.आर. टांडिया ने पूरे करियर में साबित किया कि सच्चा शिक्षक भौतिक सुख-सुविधाओं से नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य और समर्पण से पहचाना जाता है। उनकी कहानी बस्तर के उन असंख्य शिक्षकों की प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं।
कुट्रेम और पूरे कुंवाकोंडा ब्लॉक को ऐसे समर्पित शिक्षक के लिए गर्व है। टांडिया सर को सेवानिवृत्त जीवन में स्वस्थ्य, सुख और संतोष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

