*दंतेवाड़ा हत्याकांड: 40 दिन से रुका मामला उजागर, नए थाना प्रभारी प्रहलाद कुमार साहू ने एक हफ्ते में सुलझाया सनसनीखेज कत्ल*
दंतेवाड़ा, 10 नवंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 40 दिनों से अटके एक अंधे कत्ल की गुत्थी को आखिरकार पुलिस ने सुलझा लिया। मामला इतना पेचीदा था कि आरोपी तक पहुंचने के लिए भांसी थाना प्रभारी को भी बदलना पड़ा। नए थाना प्रभारी प्रहलाद कुमार साहू को महज एक हफ्ते पहले प्रभार सौंपा गया था, और अपनी निष्ठा व कुशलता से उन्होंने सात दिन के अंदर पति और चाचा द्वारा की गई पत्नी की हत्या का खुलासा कर दोनों आरोपियों को धर दबोचा।
घटना 1 अक्टूबर 2025 की रात की है। ग्राम कुंदेली निवासी रीना रयामी (उम्र करीब 25 वर्ष) का शव 2 अक्टूबर को गांव से बाहर ओटेर खेत के पास झाड़ियों में निर्वस्त्र हालत में मिला था। शुरू में लगा कि कोई अजनबी ने बलात्कार कर हत्या की है। मृतका के पति राजेश रयामी ने ही पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन जांच की गहराई में यही पति मुख्य आरोपी निकला।
पुलिस की प्रारंभिक जांच 38 दिनों तक फंसी रही। साइबर सेल ने हजारों मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया, सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। आखिरकार, मामले की गंभीरता को देखते हुए भांसी थाना प्रभारी को बदल दिया गया। नवंबर 2025 को निरीक्षक प्रहलाद कुमार साहू को थाने का प्रभार सौंपा गया।
*प्रहलाद साहू ने 7 दिनों में किया कमाल*
पहला कदम: मृतका के आखिरी लोकेशन और घर लौटने की पुष्टि।
दूसरा कदम: राजेश रयामी से कड़ाई से पूछताछ।
तीसरा कदम: घटनास्थल (घर) का रिकंस्ट्रक्शन और मोटरसाइकिल (CG 18 R 2844) की बरामदगी।
चौथा कदम: चाचा रमेश रयामी की भूमिका का खुलासा।
प्रहलाद साहू ने खुलासा किया कि 1 अक्टूबर रात 8 बजे घर में झगड़े के दौरान राजेश ने पत्नी का गला घोंटकर हत्या की। फिर चाचा रमेश की मदद से शव को मोटरसाइकिल पर लादकर गांव से बाहर फेंका। बलात्कार का भ्रम पैदा करने के लिए शव को निर्वस्त्र किया, कपड़े, थैला और मोबाइल (फ्लाइट मोड में) झाड़ियों में छिपाए।
9 नवंबर को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 नवंबर को कोर्ट में पेश किया गया। मामला अब धारा 64(1), 103(1), 3(5), 238 बीएनएस के तहत दर्ज है।
*पुलिस की तारीफ, प्रहलाद साहू बने हीरो*
एसपी गौरव राय ने कहा, “प्रहलाद साहू की निष्ठा और तेज़ जांच ने न सिर्फ़ न्याय दिलाया, बल्कि पुलिस की विश्वसनीयता भी बढ़ाई।” स्थानीय ग्रामीणों में राहत की लहर है। एक बुजुर्ग ने कहा, “40 दिन तक डर था, कोई पकड़ा ही नहीं जाएगा। प्रहलाद साहब आए और सात दिन में सब साफ कर दिया।”
इस सफलता में साइबर सेल के बेलाल सिंह, एसडीओपी कपिल चंद्रा और टीम का भी योगदान रहा, लेकिन स्पॉटलाइट प्रहलाद कुमार साहू पर है—जिन्होंने साबित किया कि सही इरादा और मेहनत से कोई भी गुत्थी नहीं रहती अटकी।

