*चोलनार आश्रम में सामाजिक उत्सवों की झलक: जन्मदिन से दान तक, दो हृदयस्पर्शी आयोजन*
किरन्दुल, 10 नवंबर 2025 – दंतेवाड़ा जिले के चोलनार स्थित गायत्री ग्रामोत्थान सेवा समिति द्वारा संचालित माता भगवती विधालय/दंतेश्वरी आश्रम (चोलनार आश्रम) इन दिनों सामाजिक सद्भाव और धार्मिक उत्साह का केंद्र बना हुआ है। पिछले दो महीनों में यहां दो महत्वपूर्ण आयोजन हुए, जिनमें स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने आश्रम के निःशुल्क संचालित विद्यालय के बच्चों के कल्याण के लिए योगदान दिया। ये कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं, बल्कि सामुदायिक सेवा की मिसाल भी पेश करते हैं।
पहला आयोजन: रियांस झा का जन्मदिन – गायत्री महायज्ञ की आहुतियां
14 सितंबर 2025 को एनएमडीसी किरन्दुल के वरिष्ठ प्रबंधक (मैकेनिकल) श्री मनीष झा ने अपने परिवार और इष्ट मित्रों के साथ आश्रम पहुंचकर पुत्र चिरंजीवी रियांस झा का जन्मदिन मनाया। उत्सव को विशेष बनाने के लिए एक कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ में पुत्र एवं परिवार की सुख-शांति, दीर्घायु तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र से आहुतियां दी गईं।
इस अवसर पर समिति के सचिव और गुरुजी उपस्थित रहे। श्री झा ने आश्रम के बच्चों को भोजन करवाकर उत्सव को और यादगार बनाया। संस्था ने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा, “इस शुभ अवसर पर आश्रम को चुनने और बच्चों की सेवा के लिए हार्दिक आभार।”
दूसरा आयोजन: ICH टीम का भोजन दान – मां गायत्री की पूजा
9 नवंबर 2025 को ICH किरन्दुल के मैनेजर श्री एम. आई. बेनी अपने सभी ICH साथियों के साथ सपरिवार आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने मां गायत्री की पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया। इसके बाद आश्रम के सभी बच्चों के लिए दोपहर का भोजन करवाया।
यह विद्यालय पूरी तरह निःशुल्क संचालित होता है, जहां गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा व पोषण मिलता है। आयोजन में समिति के सचिव श्री डी. पी. डहेरिया, गुरुजी तथा SKMS यूनियन के कार्यकारणी सदस्य श्री नरसिम्हा रेड्डी सपरिवार मौजूद रहे। संस्था ने श्री बेनी और उनकी टीम को साधुवाद देते हुए कहा, “बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था करके आपने हमारी सेवा को मजबूत किया है। बहुत-बहुत धन्यवाद।”
विश्लेषण: सामाजिक योगदान की प्रेरणा
ये दोनों आयोजन आश्रम की भूमिका को रेखांकित करते हैं। गायत्री परिवार द्वारा संचालित यह संस्थान न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि शिक्षा और पोषण के माध्यम से ग्रामीण बच्चों के जीवन को संवार रहा है। एनएमडीसी और ICH जैसे औद्योगिक संस्थानों के अधिकारी अपने व्यक्तिगत उत्सवों को सामाजिक सेवा से जोड़कर एक आदर्श स्थापित कर रहे हैं। इससे न केवल बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलता है, बल्कि सामुदायिक एकता भी मजबूत होती है।
ऐसे प्रयास बस्तर जैसे क्षेत्र में, जहां संसाधन सीमित हैं, विकास की नई दिशा दिखाते हैं। संस्था के सचिव श्री डहेरिया ने कहा, “ऐसे दानवीरों का सहयोग हमें और बच्चों तक पहुंचने की प्रेरणा देता है।”
चोलनार आश्रम की ये गतिविधियां साबित करती हैं कि छोटे-छोटे योगदान से बड़ा बदलाव संभव है। आइए, ऐसे आयोजनों से प्रेरित होकर अधिक से अधिक लोग आगे आएं!

