*दंतेवाड़ा: त्योहारों में खाद्य जांच का ‘नाटक’ या वास्तविक सुरक्षा? रिपोर्टों की कमी से उठे सवाल, विभाग पर पारदर्शिता की मांग*

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*दंतेवाड़ा: त्योहारों में खाद्य जांच का ‘नाटक’ या वास्तविक सुरक्षा? रिपोर्टों की कमी से उठे सवाल, विभाग पर पारदर्शिता की मांग*

दंतेवाड़ा, 7 अक्टूबर 2025 (स्पेशल रिपोर्ट): छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में त्योहारों के दौरान खाद्य विभाग की जांच अभियान तो धूमधाम से चलते हैं, लेकिन इनकी रिपोर्टें कहां गुम हो जाती हैं? स्थानीय निवासियों के बीच यह सवाल तेज हो रहा है कि क्या जिले की खाद्य सामग्री वाकई शुद्ध है, या अधिकारियों की ‘मिलीभगत’ से मिलावटखोरी पनप रही है? हर साल नवरात्रि, दीवाली जैसे पर्वों पर होटलों, दुकानों और मेले से सैंपल कलेक्ट होते हैं, लेकिन कार्रवाई की कोई खबर नहीं। जिला प्रशासन और खाद्य विभाग को अब पारदर्शिता के लिए कदम उठाने की चुनौती मिली है।

दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल जिले में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं, वहां खाद्य सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। स्थानीय निवासी रामू मंडावी बताते हैं, “हमने देखा है कि अधिकारी होटलों से नमूने ले जाते हैं, लेकिन उसके बाद क्या हुआ? कोई रिपोर्ट नहीं, कोई कार्रवाई नहीं। क्या सभी मिठाइयां और दूध शुद्ध हैं, या मिलावट छिपा ली जाती है?” इसी तरह, गीता कुर्रामी कहती हैं, “बच्चों को मिलावटी खाने से बीमारी हो सकती है। हमें रिपोर्ट दिखानी चाहिए ताकि विश्वास बने।”

जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDO) द्वारा हर साल सैकड़ों सैंपल कलेक्ट किए जाते हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्तर पर 2024-25 में नवरात्रि-दशहरा के दौरान 5,000 से अधिक नमूने जांच के लिए भेजे गए, जिनमें से 15% में मिलावट पाई गई। लेकिन दंतेवाड़ा के लिए कोई जिला-विशेष रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। राज्य के अन्य जिलों जैसे सरगुजा में तो मिलावटी मिठाइयों पर जुर्माना लगाया गया, लेकिन यहां चुप्पी साधी गई।

खाद्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी (नाम गोपनीय) ने बताया, “जांच प्रक्रिया चल रही है, रिपोर्ट लैब से आने पर कार्रवाई होगी। लेकिन सुरक्षा कारणों से (नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के चलते) विस्तृत जानकारी सीमित रखी जाती है।” हालांकि, यह जवाब निवासियों को संतुष्ट नहीं कर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के दिशानिर्देशों के तहत रिपोर्टें वेबसाइट पर अपलोड होनी चाहिए, जो दंतेवाड़ा की साइट (dantewada.nic.in) पर उपलब्ध नहीं हैं।

यह मुद्दा तब और गंभीर हो जाता है जब याद किया जाए कि 2023 में दंतेवाड़ा में ही एक स्कूल मिड-डे मील में मिलावट की शिकायत आई थी, जिसकी जांच अधर में लटक गई। राज्य स्तर पर खाद्य विभाग ने 2025 में ‘मिलावट मुक्त त्योहार’ अभियान चलाया, लेकिन जमीनी स्तर पर पारदर्शिता की कमी से प्रभाव कम हो रहा है।

सकारात्मक कदम की उम्मीद: अच्छी बात यह है कि जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत ने हाल ही में स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा, “हम पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल पोर्टल विकसित कर रहे हैं, जहां रिपोर्टें उपलब्ध होंगी।” यदि यह वादा पूरा होता है, तो दंतेवाड़ा के 5 लाख से अधिक निवासी सुरक्षित भोजन का हकदार बनेंगे। स्थानीय संगठन ‘आदिवासी विकास मंच’ ने विभाग से मांग की है कि अगले त्योहार से पहले जिला-स्तरीय रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

यह मुद्दा न केवल दंतेवाड़ा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक सबक है। पारदर्शिता से ही विश्वास बनेगा, और त्योहार खुशियों के साथ-साथ स्वास्थ्य की गारंटी देंगे। विभाग को अब कार्रवाई दिखानी होगी—क्या रिपोर्टें जल्द आएंगी? जिला वासियों की नजरें टिकी हैं।

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