*किरंदुल नगरपालिका में पार्टनरशिप का ‘खेल’? ठेकेदारों-अधिकारियों की कथित मिलीभगत से लाखों के फर्जीवाड़े की आशंका, जांच की मांग तेज*
दंतेवाड़ा, 6 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ की सबसे धनी नगरपालिकाओं में शुमार किरंदुल में विकास कार्यों को लेकर अब सवालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, बीजापुर के ठेकेदारों और स्थानीय अधिकारियों के बीच कथित ‘पार्टनरशिप’ के जरिए लाखों-करोड़ों के फर्जीवाड़े की पूरी संभावना नजर आ रही है। हालांकि, ये आरोप अभी तक आधिकारिक तौर पर सिद्ध नहीं हुए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। क्या यह महज अफवाह है या वास्तव में सिस्टम की खामियां? इसकी गहन जांच की मांग उठने लगी है।
सूत्रों का दावा है कि किरंदुल नगरपालिका के विकास कार्यों में ठेकेदार और अधिकारी ‘आधा-आधा’ हिस्सेदारी के फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं, जिसके चलते कार्यों में लापरवाही बरती जा रही है। गुणवत्ता की अनदेखी के कारण शहरवासी परेशान हैं। खासकर वार्ड नंबर 6 और 7 में 20 साल पुरानी नालियों की मरम्मत का मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां नालियां नीचे से पूरी तरह टूट चुकी हैं, लेकिन ऊपर से मात्र 1-2 फीट की अतिरिक्त ढलाई करके उन्हें ‘उंचा’ करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह न केवल बर्बादी का प्रतीक है, बल्कि भविष्य में बाढ़ जैसी आपदाओं को न्योता दे सकता है। “शहर में हर गली-नुक्कड़ पर इसकी चर्चा हो रही है, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे हैं,” एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।
इस पूरे प्रकरण में इंजीनियरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्षों से किरंदुल में जमे अभियंता तीरथ राम सिन्हा का स्थानांतरण बीजापुर हो चुका है, लेकिन वे अभी तक रिलीव न हो पाए हैं। इसी तरह, दूसरे अभियंता मार्कंडेय का स्थानांतरण जगरगुंडा कर दिया गया है, फिर भी वे किरंदुल की ‘धन-समृद्धि’ से मोहित होकर जाने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, बीजापुर नगरपालिका से किरंदुल आए अभियंता देवांगन ने अपना पदभार संभाल लिया है, लेकिन पुराने अधिकारियों की मौजूदगी से सिस्टम में ‘ओवरलैप’ की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, यह ‘धन-मोह’ और अधिकारियों की कथित मिलीभगत का नतीजा है, जिससे विकास बजट का दुरुपयोग हो रहा है मुख्य अधिकारी पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि स्थानांतरण के बावजूद पुराने इंजीनियरों को रिलीव नहीं किया जा रहा? स्थानीय पार्षदों और नागरिक संगठनों ने जिला प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की है, ताकि किरंदुल जैसे धनी नगर की संपदा का सही उपयोग हो सके।
किरंदुल, जो एनएमडीसी जैसी संस्थाओं के कारण आर्थिक रूप से मजबूत है, विकास के मामले में हमेशा सुर्खियों में रहता है। लेकिन अगर ये आरोप सही साबित हुए, तो यह न केवल नगरपालिका की छवि को धक्का पहुंचाएगा, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी तोड़ेगा। जिला कलेक्टर कार्यालय से जब तक कोई स्पष्ट बयान न आए, तब तक यह मामला संदेह के घेरे में ही बना रहेगा। क्या होगी अगली कार्रवाई? आने वाले दिनों में नजरें यहीं टिकी रहेंगी।

