*बीजापुर में ऐतिहासिक सरेंडर: 103 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसक रास्ता, 49 पर था 1.06 करोड़ का इनाम – नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी जीत*

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*बीजापुर में ऐतिहासिक सरेंडर: 103 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसक रास्ता, 49 पर था 1.06 करोड़ का इनाम – नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी जीत*

*बीजापुर (छत्तीसगढ़), 3 अक्टूबर 2025*

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में विजयादशमी के पावन पर्व पर एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। 103 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया और पुलिस व केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 23 महिलाएं और संगठन के कई उच्च पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें डिवीजनल कमांडर (डीवीसीएम), पार्टी प्लाटून कमांडर (पीपीसीएम) और एरिया कमेटी सदस्य जैसे प्रमुख चेहरे हैं। खास बात यह है कि 49 ईनामी नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था, जो प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओइस्ट) को गहरा आघात पहुंचाने वाला कदम साबित हुआ।

यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा एकल दिवसीय माओवादी आत्मसमर्पण है। आत्मसमर्पण करने वालों में डिवीजनल कमेटी सदस्य लच्छू पूनेम उर्फ संतोष (36 वर्ष), प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य गुड्डू फरसा उर्फ विजय (30 वर्ष), भीमा सोढी उर्फ कमल सिंह (45 वर्ष) और कंपनी नंबर 10 की पार्टी सदस्या हिडमे फरसा जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन नक्सलियों ने संगठन की खोखली विचारधारा, आंतरिक मतभेदों, क्रूर शोषण और सुरक्षा बलों के लगातार दबाव का हवाला देते हुए यह फैसला लिया। एक आत्मसमर्पित नक्सली ने बताया, “संगठन में महिलाओं और कमजोर सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार होता था। सरकार की पुनर्वास नीतियों ने हमें नई जिंदगी की उम्मीद दी।”

*सरकार की नीतियों का असर: ‘पूना मारगेम’ से प्रेरित होकर लौटे मुख्यधारा में*

यह सरेंडर राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ और ‘नियेद नेल्ला नार योजना’ का प्रत्यक्ष परिणाम है। ‘पूना मारगेम’ (नया रास्ता) अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रमों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की किरणें पहुंचाई हैं। प्रत्येक आत्मसमर्पित व्यक्ति को तत्काल 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई, साथ ही नौकरी, शिक्षा, कौशल विकास और आवास जैसी सुविधाओं का वादा किया गया। बीजापुर एसपी डॉ. जीतेंद्र कुमार यादव ने कहा, “यह न केवल सुरक्षा बलों की सफलता है, बल्कि ग्रामीणों के सहयोग और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का नतीजा है। हम नक्सलियों से अपील करते हैं कि वे भी मुख्यधारा में लौटें।”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर सुरक्षा बलों को बधाई देते हुए कहा, “विजयादशमी का पर्व आज हिंसा और भ्रम पर विकास एवं विश्वास की ऐतिहासिक विजय का साक्षी बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हमारा संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन हो जाएगा। आत्मसमर्पित साथियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्ज्वल भविष्य दिया जाएगा।” सीआरपीएफ डीआईजी कमलोचन कश्यप ने भी इसे बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में मील का पत्थर बताया।

*नक्सल प्रभाव में कमी: आंकड़े बयां कर रहे कहानी*

इस घटना से पहले, जनवरी 2025 से बीजापुर में 421 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया, 410 ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 137 मुठभेड़ों में मारे गए। पूरे बस्तर संभाग में 2025 से अब तक 924 गिरफ्तारियां, 599 आत्मसमर्पण और 195 मौतें दर्ज की गईं। डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ और कोबरा जैसे बलों की सक्रियता ने नक्सल नेटवर्क को कमजोर किया है। अंदरूनी इलाकों में नए सुरक्षा कैंप, सड़कें, बिजली-पानी और जनकल्याण योजनाओं ने ग्रामीणों का भरोसा जीता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सरेंडर नक्सलवाद के पतन का संकेत है, जो विकास के रास्ते पर बस्तर को ले जा रहा है।

यह घटना न केवल बीजापुर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणादायक है। हिंसा के चक्र से बाहर निकलकर नई जिंदगी की शुरुआत करने वाले इन 103 व्यक्तियों की कहानी शांति और समृद्धि की दिशा में एक नई उम्मीद जगाती है। बस्तर की धरती अब ‘विकास की विजय’ का गवाह बन रही है।

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