*किरंदुल नगरपालिका का ‘अंधेरा’ रहस्य: वार्ड नम्बर 18 में मेन रोड की गली लाइटें महीनों से बंद, अध्यक्ष का गृह वार्ड ही अंधियारा!*
किरंदुल (छत्तीसगढ़), 28 सितंबर 2025 – छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल शहर में एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जो स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को आईना दिखा रहा है। वार्ड नंबर 18 – जो कि नगरपालिका परिषद का मुख्य कार्यालय होने के साथ-साथ वर्तमान अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष का निवास स्थान भी है – इसी वार्ड की मेन रोड पर गली लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं। आधे पोल पर लाइटें चमक रही हैं, तो आधे पर घुप अंधेरा छाया हुआ है। वार्डवासियों की बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मिश्रा कैंप की मेन रोड पर स्थित यह इलाका शहर का एक व्यस्त हिस्सा है, जहां दिनभर ट्रैफिक की रेलम-पेल रहती है। लेकिन रात होते ही यहां का नजारा बदल जाता है – अंधेरे में लोग सड़कों पर लड़खड़ाते नजर आते हैं। स्थानीय निवासी रामेश्वर साहू ने बताया, “हमारे वार्ड में नगरपालिका का दफ्तर है, अध्यक्ष जी का घर भी यहीं है। फिर भी, हमारी शिकायतें हवा में उड़ जाती हैं। पिछले तीन महीनों से ये लाइटें बंद हैं। बच्चे स्कूल जाते समय डरते हैं, महिलाएं अकेले निकलने से कतराती हैं। क्या हमारा वार्ड ‘विशेष’ होने के बावजूद उपेक्षित है?”
यह मुद्दा सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी है। अंधेरे सड़कों पर चोरी-छिनैती की घटनाओं में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। वार्ड नंबर 18 की एक अन्य निवासी, शांति वर्मा ने कहा, “हमने नगरपालिका कार्यालय में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई फॉलो-अप नहीं। अध्यक्ष जी का गृह वार्ड होने के बाद भी गली में लाइटें बंद हैं – ये विडंबना नहीं तो क्या है? क्या हमें भी बाहर से आवाज उठानी पड़ेगी?”
किरंदुल नगरपालिका परिषद का गठन 1960 के दशक में हुआ था, और यह क्षेत्र एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) के खनन कार्यों से जुड़ा होने के कारण आर्थिक रूप से मजबूत माना जाता है। हाल ही में फरवरी 2025 में हुए निकाय चुनावों में भाजपा ने यहां कब्जा जमाया था, और वर्तमान अध्यक्ष रूबी सींग ने विकास के वादे किए थे। लेकिन सड़क, जल निकासी और स्ट्रीट लाइटिंग जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठंडी प्रतिक्रिया ने विपक्ष को मौका दे दिया है। कांग्रेस के स्थानीय नेता ने कहा, “यह प्रशासन की नाकामी है। हम जल्द ही सदन में इस पर चर्चा करेंगे।”
नगरपालिका के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “लाइटों की समस्या बिजली चोरी या पुराने वायरिंग की वजह से हो सकती है। हम जल्द सर्वे करवाएंगे और ठीक करेंगे।” हालांकि, वार्डवासियों का कहना है कि ऐसी ‘जल्दबाजी’ की प्रतिज्ञाएं पहले भी सुन चुके हैं।
यह घटना न सिर्फ किरंदुल बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के छोटे शहरों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत स्ट्रीट लाइटिंग को सोलर पैनल से जोड़ना चाहिए, ताकि ऐसी समस्याएं कम हों। अब सवाल यह है कि क्या वार्डवासी की यह आवाज प्रशासन तक पहुंचेगी, या अंधेरा और गहरा हो जाएगा?
नगरपालिका से अपील: अगर आप भी इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं, तो स्थानीय कार्यालय या सीजी निदान पोर्टल (cgnidaan.com) पर शिकायत दर्ज कराएं। उम्मीद है कि यह खबर जागरूकता फैलाएगी और जल्द समाधान होगा।
