*किरंदुल: भारी बारिश और लैंडस्लाइड के खतरे के बीच एनएमडीसी की सख्ती, कर्मचारियों के निजी वाहनों पर भी रोक की मांग तेज*
दंतेवाड़ा, 15 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बैलाडीला क्षेत्र में इस मानसून सीजन में औसत से कहीं अधिक वर्षा ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण सड़कें, नाले और खनन क्षेत्र क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जबकि जगह-जगह भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की घटनाओं ने खतरे की घंटी बजा दी है। राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के किरंदुल खनन क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है, जहां सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं और ढीली चट्टानों व मिट्टी के कारण अभी भी खतरा बरकरार है। ऐसे में, विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर एनएमडीसी किरंदुल-बचेली प्रोजेक्ट प्रबंधन ने बाहरी लोगों और वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। जिला प्रशासन ने भी इसकी पुष्टि करते हुए आदेश जारी किया है। लेकिन अब सवाल उठ रहा है: क्या यह प्रतिबंध सिर्फ बाहरी वाहनों तक सीमित रहेगा, या एनएमडीसी कर्मचारियों के निजी वाहनों—खासकर उनके परिजनों के साथ—पर भी लागू होगा?
*भारी बारिश का कहर: खनन क्षेत्र में बढ़ा खतरा*
इस वर्ष दंतेवाड़ा में औसत वर्षा से 30-40% अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे बैलाडीला की पहाड़ियां अस्थिर हो गई हैं। एनएमडीसी किरंदुल प्रोजेक्ट की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, भारी वर्षा के कारण खनन क्षेत्र में सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और लैंडस्लाइड का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा, घना कोहरा और लगातार बारिश की संभावना ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विश्वकर्मा पूजा (17 सितंबर को मनाया जाने वाला यह पर्व खनन क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है) के दिन खदान क्षेत्रों में बाहरी लोगों एवं वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जिला प्रशासन के आदेश के तहत इसका उल्लंघन दंडनीय होगा।
*कर्मचारियों के परिजनों के लिए छूट? सवालों का दौर*
किरंदुल और बचेली क्षेत्र में रहने वाले एनएमडीसी कर्मचारियों के परिजन अक्सर निजी वाहनों से खनन क्षेत्र घूमने जाते हैं, खासकर विश्वकर्मा पूजा के दौरान। विश्वकर्मा पूजा जैसे अवसर पर यह आम बात है। लेकिन अब प्रमुख स्थानीय लोगों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के केंद्र में यही मुद्दा है: क्या कर्मचारियों को विशेष छूट मिलेगी, जबकि उनके परिजनों को बाहरी लोगों की तरह प्रवेश निषेध का सामना करना पड़ेगा?
किरंदुल के कुछ प्रमुख निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “एनएमडीसी बाढ़, बारिश और भूस्खलन जैसे विषम परिस्थितियों का हवाला देकर बाहरी वाहनों पर रोक लगा रहा है, जो उचित है। लेकिन अगर कर्मचारियों के निजी वाहनों को छूट दी जाती है, तो यह अन्य लोगों के साथ पक्षपात और दिखावा ही होगा। प्राकृतिक घटनाएं किसी को देखकर नहीं होतीं—ना बाहरी को, ना कर्मचारी को। खतरा सबके लिए समान है। अगर कोई कर्मचारी अपने परिवार के साथ निजी वाहन से प्रवेश करता है और दुर्भाग्य से कोई हादसा होता है, तो क्या जिम्मेदारी एनएमडीसी की नहीं बनेगी?”
ये सवाल इसलिए भी प्रासंगिक हैं क्योंकि पिछले वर्षों में दंतेवाड़ा में लैंडस्लाइड जैसी घटनाओं में कई मजदूरों की जान जा चुकी है। उदाहरण के लिए, 2024 में एनएमडीसी के चेक-डैम टूटने से किरंदुल शहर में बाढ़ आई थी, जबकि फरवरी 2024 में एक माइनिंग साइट पर लैंडस्लाइड से चार मजदूरों की मौत हो गई थी। ऐसी घटनाओं ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमजोरियों को उजागर किया है। सहरी संगठनों का कहना है कि अगर निजी वाहनों पर भी सख्ती नहीं की गई, तो यह असमानता का प्रतीक बनेगा और जनता का विश्वास कम होगा।
विश्लेषण: सुरक्षा बनाम समानता का संतुलन
एनएमडीसी का यह कदम सुरक्षा के लिहाज से सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सभी के लिए समान रूप से लागू होगा? बाहरी वाहनों पर रोक लगाना आसान है, लेकिन कर्मचारियों के निजी वाहनों को अनुमति देना जोखिम को बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं में ‘विशेष छूट’ का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। एक पर्यावरण विशेषज्ञ ने कहा, “बैलाडीला जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लैंडस्लाइड का खतरा मौसम पर निर्भर करता है, न कि व्यक्ति की पहचान पर। अगर एनएमडीसी कर्मचारियों के परिजनों को भी प्रवेश की अनुमति दी जाती है, तो यह सुरक्षा नीति की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करेगा।”
दूसरी ओर, एनएमडीसी प्रबंधन का तर्क हो सकता है कि कर्मचारी आधिकारिक ड्यूटी पर होते हैं, लेकिन परिजनों के साथ निजी वाहनों का उपयोग विश्वकर्मा पूजा में आम है। जिला प्रशासन से संपर्क करने पर अधिकारियों ने कहा कि आदेश सभी गैर-आवश्यक वाहनों पर लागू है, लेकिन स्पष्ट निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे। स्थानीय लोगों से अपील की जा रही है कि वे प्रशासन के आदेशों का पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
अपील: सुरक्षा पहले, विवाद बाद
एनएमडीसी और जिला प्रशासन से मांग हो रही है कि निजी वाहनों पर प्रतिबंध के बारे में स्पष्टता लाई जाए, ताकि कोई भ्रम न रहे। विश्वकर्मा पूजा जैसे पवित्र अवसर पर सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। अगर प्रतिबंध सभी पर समान रूप से लागू होता है, तो यह न केवल जानमाल की रक्षा करेगा, बल्कि निष्पक्षता का भी प्रतीक बनेगा। फिलहाल, क्षेत्रवासियों को सतर्क रहने और आधिकारिक सूचनाओं का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।
