*एनएमडीसी ने 16 आदिवासी युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के लिए किया रवाना: आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम*
किरंदुल, 11 सितंबर 2025: राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) ने अपने सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के तहत दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के 16 आदिवासी युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद रवाना किया। यह पहल एनएमडीसी के किरंदुल कॉम्प्लेक्स के अधिशासी निदेशक श्री रवींद्र नारायण के कुशल नेतृत्व और उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन) श्रीमती के.एल.नागवेणी के मार्गदर्शन में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CIPET) के सहयोग से आयोजित की गई।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम तृतीय चरण का हिस्सा है, जिसमें अनुसूचित जनजाति के युवाओं को प्लास्टिक और पॉलिमर प्रौद्योगिकी में कौशल विकास का अवसर प्रदान किया जा रहा है। इससे पहले, परियोजना प्रबंधन द्वारा दो चरणों में युवाओं को प्रशिक्षण के लिए भेजा जा चुका है। इस कार्यक्रम के तहत युवाओं को निःशुल्क तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण, आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सकारात्मक पहल
एनएमडीसी का यह प्रयास आदिवासी युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्यक्रम न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान देगा।
*प्रशिक्षण का महत्व*
सीपेट के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में युवाओं को प्लास्टिक और पॉलिमर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने का मौका मिलेगा। यह तकनीकी प्रशिक्षण उन्हें आधुनिक उद्योगों की मांगों के अनुरूप तैयार करेगा, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
*एनएमडीसी की प्रतिबद्धता*
एनएमडीसी लंबे समय से अपने सीएसआर कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल न केवल युवाओं के लिए नए अवसर खोलेगी, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देकर सामुदायिक उत्थान में भी योगदान देगी।
इस पहल की सराहना करते हुए स्थानीय समुदाय ने एनएमडीसी और सीपेट के प्रयासों को एक प्रेरणादायक कदम बताया। यह कार्यक्रम निश्चित रूप से आदिवासी युवाओं के लिए उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगा।
