*बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ का सख्त ऐलान – 15 सितंबर का चुनाव पूरी तरह फर्जी, व्यापारियों से बहिष्कार का आह्वान*

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*बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ का सख्त ऐलान – 15 सितंबर का चुनाव पूरी तरह फर्जी, व्यापारियों से बहिष्कार का आह्वान*

किरंदुल (दंतेवाड़ा):

बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ की संचालन समिति ने किरंदुल के सभी व्यापारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि 15 सितंबर को होने वाला तथाकथित चुनाव संघ के नियमों, परंपराओं और व्यापारी एकता के खिलाफ है। समिति ने इसे व्यापारियों को तोड़ने और गुमराह करने की गहरी साजिश करार देते हुए स्पष्ट शब्दों में घोषणा की –

> “यह चुनाव अवैध है, यह चुनाव षड्यंत्र है, यह चुनाव व्यापारियों को बांटने की चाल है –

इसका सख्त विरोध करो…

बहिष्कार! बहिष्कार! बहिष्कार!”

फर्जी रजिस्टर और धोखाधड़ी का आरोप

संचालन समिति ने बताया कि 30 अगस्त को बैठक के नाम पर जो रजिस्टर व्यापारियों से हस्ताक्षर कराए गए थे, वह पूरी तरह फर्जी और भ्रामक था। उस रजिस्टर में न कोई एजेंडा था, न ही पारदर्शिता। समिति ने कड़ा सवाल उठाया है कि यदि बैठक सही थी, तो उस रजिस्टर को अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

ठेकेदारों की गुप्त साजिश!

संचालन समिति ने आरोप लगाया कि यह चुनाव बंद कमरों में ठेकेदारों द्वारा रचा गया षड्यंत्र है। इसका असली उद्देश्य किरंदुल के व्यापारियों को आपस में लड़ाना और संघ की एकता को खत्म करना है।

> “ठेकेदार हमारे भाई हैं, लेकिन संघ के नियमों के अनुसार उन्हें स्थायी सदस्यता नहीं दी जा सकती। जो ठेकेदार व्यापारी या गोमास्ता हैं, उनका हम स्वागत करते हैं। पर बाकी ठेकेदार केवल विशेष आमंत्रित सदस्य रह सकते हैं।”

15 सितंबर के चुनाव का पूर्ण बहिष्कार

संघ ने कठोर शब्दों में कहा है कि यह चुनाव पूरी तरह अवैध है और व्यापारियों की एकता के खिलाफ है। इसलिए सभी व्यापारी भाई एकजुट होकर इसका पूर्ण बहिष्कार करें।

संघ का सशक्त संदेश:

> “हम किरंदुल के व्यापारी किसी के बहकावे में नहीं आएंगे,

किसी दबाव में नहीं झुकेंगे।

15 सितंबर के फर्जी चुनाव का करेंगे पूर्ण बहिष्कार।

*बहिष्कार! बहिष्कार! बहिष्कार!”*

व्यापारियों से सीधी अपील

संचालन समिति ने सभी व्यापारियों से आग्रह किया है कि वे न केवल वोट डालने से इंकार करें, बल्कि इस अवैध चुनाव को पूरी तरह असफल बना दें।

> “एकता हमारी ताकत है। फूट डालने वालों को करारा जवाब दो।

15 सितंबर को घर में रहो – फर्जी चुनाव को ठुकराओ!”

निष्कर्ष:

इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि किरंदुल में व्यापारिक राजनीति गरमा गई है और लोगो ने फर्जी चुनाव का बहिष्कार कर दिया है?

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