*किरंदुल में 2024 की बाढ़ के बाद 2025 में जिला प्रशासन और एनएमडीसी व नगरपालिका प्रशासन की सजगता ने रोकी जल प्रलय*

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*किरंदुल में 2024 की बाढ़ के बाद 2025 में जिला प्रशासन और एनएमडीसी व नगरपालिका प्रशासन की सजगता ने रोकी जल प्रलय*


दंतेवाड़ा, 29 अगस्त 2025: बस्तर संभाग का किरंदुल शहर, जो 2024 में भयंकर बाढ़ की चपेट में आया था, इस बार 2025 में जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत, नगरपालिका और एनएमडीसी की बारिश से पहले की तैयारियों के कारण जल प्रलय से पूरी तरह सुरक्षित रहा। जहां दंतेवाड़ा में 26 अगस्त 2025 को शंखनी और डंकनी नदियों के उफान ने 97 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए शहर को दो हिस्सों में बांट दिया और 200 से अधिक घरों को तबाह कर दिया, वहीं किरंदुल में बाढ़ की भनक तक नहीं लगी। यह जिला प्रशासन, नगरपालिका और एनएमडीसी की सामूहिक दूरदर्शिता और प्रभावी योजना का परिणाम है।

*2024 की बाढ़: एक सबक*

पिछले साल 2024 में किरंदुल में भारी बारिश के कारण पहाड़ियों पर बना एक डैम टूट गया था, जिससे एनएमडीसी के किरंदुल प्लांट और निचली बस्तियों में पानी घुस गया था। इस आपदा ने प्रशासन को बारिश से पहले की तैयारियों के महत्व को समझाया। इस अनुभव से सबक लेते हुए, जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत के नेतृत्व में इस बार व्यापक तैयारियां की गईं, जिसने किरंदुल को बाढ़ के खतरे से बचाया।

*जिला कलेक्टर की रणनीति और एनएमडीसी की सजगता*

जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बाढ़ के खतरे को देखते हुए किरंदुल में हाई अलर्ट जारी किया और नदी-नालों के जलस्तर की हर घंटे निगरानी के निर्देश दिए। उनकी अपील थी कि लोग अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और सतर्क रहें। इसके साथ ही, एनएमडीसी ने माइनिंग क्षेत्रों में जलभराव को नियंत्रित करने के लिए पानी की दिशा परिवर्तन की तकनीक अपनाई। वार्ड नंबर 1 के डैम में जमा “लाल सोना” (लौह अयस्क) को समय रहते खाली कराया गया और जगह-जगह चेक डैम बनाए गए, जिसने बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

*नगरपालिका की सक्रियता*

नगरपालिका अध्यक्ष रूबी सिंह और उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी के नेतृत्व में नगरपालिका ने शहर की गलियों और नालियों में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए व्यापक सफाई अभियान चलाया। गाटर पुलिया और सीएससी सेंटर जैसे जलभराव संभावित क्षेत्रों में जेसीबी मशीनों से सफाई की गई। नतीजतन, किरंदुल की गलियां इस बार बाढ़ मुक्त रहीं। खासकर रेड जोन माने जाने वाले वार्ड नंबर 1, 3, 4, 6 और 7 में पानी की निकासी इतनी प्रभावी थी कि ऐसा लगा मानो नालियों में पानी ही नहीं था। केवल मांसाहारी मार्केट क्षेत्र में मामूली जलभराव देखा गया, जिसे तुरंत नियंत्रित कर लिया गया।

*दंतेवाड़ा में तबाही, किरंदुल में शांति*

जबकि दंतेवाड़ा में भारी बारिश ने शंखनी और डंकनी नदियों को उफान पर ला दिया, जिससे शहर टापुओं में तब्दील हो गया, किरंदुल में जिला प्रशासन, एनएमडीसी और नगरपालिका की सजगता ने बाढ़ को पूरी तरह रोक दिया।, कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। उनकी रणनीति और नगरपालिका के सहयोग से किरंदुल इस बार जल प्रलय से बचा रहा।

*सामूहिक प्रयासों का श्रेय*

इस सफलता का श्रेय जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत, एनएमडीसी परियोजना किरंदुल, नगरपालिका अध्यक्ष रूबी सिंह, उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी, समस्त वार्ड पार्षदों और नगरपालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों को जाता है। उनकी बारिश से पहले की तैयारियों और समन्वित प्रयासों ने किरंदुल को एक मिसाल बनाया, जहां बाढ़ का खतरा होने के बावजूद शहरवासियों ने चैन की नींद सोई।

*निष्कर्ष*

किरंदुल की इस उपलब्धि से साफ है कि सही समय पर सही योजना और सामूहिक प्रयास प्राकृतिक आपदाओं को भी नियंत्रित कर सकते हैं। यह कहानी न केवल किरंदुल के लिए, बल्कि पूरे बस्तर संभाग के लिए एक प्रेरणा है कि पूर्व तैयारी और जागरूकता से बाढ़ जैसे संकटों को टाला जा सकता है।,,

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