*किरंदुल: बेतरतीब यातायात और लापरवाही बनी हादसों की वजह हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे, नगरपालिका की चुप्पी पर सवाल?*
किरंदुल, छत्तीसगढ़ का एक छोटा सा औद्योगिक शहर, जो अपनी खनन गतिविधियों के लिए जाना जाता है, आजकल अपनी अव्यवस्थित यातायात प्रणाली और लापरवाह प्रशासन के कारण चर्चा में है। शहर का मुख्य मार्ग, जो कभी बदलाव की स्थिति में नहीं आ सका, अब हादसों का पर्याय बन चुका है। बेतरतीब ढंग से खड़े वाहन, भारी-भरकम 14 चक्का ट्रक जो बीच सड़क पर चढ़ाई चढ़ते हैं, और जगह की कमी के कारण रुकने को मजबूर ड्राइवरों की स्थिति ने शहर को एक टाइम बम के कगार पर ला खड़ा किया है।
*हादसों का इंतज़ार करती सड़कें*
किरंदुल का मुख्य मार्ग, जो बैलाडीला के खनन क्षेत्रों से होकर गुजरता है, भारी वाहनों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र है। लेकिन सड़क पर अव्यवस्थित पार्किंग और भारी ट्रकों की अचानक रुकने की मजबूरी ने इसे खतरनाक बना दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार ट्रकों के ब्रेक फेल होने या पीछे लुढ़कने की स्थिति में बड़े हादसे होने का खतरा बना रहता है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यहां हर दिन हादसा टल रहा है, लेकिन प्रशासन को शायद बड़े हादसे का इंतज़ार है।”
*बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ की अनसुनी मांग*
बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ वर्षों से मांग कर रहा है कि बाजार क्षेत्र को व्यवस्थित किया जाए और अवैध पार्किंग पर रोक लगे। लेकिन नगरपालिका की ओर से इस मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। संघ के एक सदस्य ने बताया, “हम बार-बार नगरपालिका से अनुरोध कर रहे हैं कि बाजार को व्यवस्थित करें, सड़कों को अतिक्रमण से मुक्त करें, लेकिन हर बार हमें एक ही जवाब मिलता है – ‘नोटिस जारी कर दिया गया है।’ लेकिन नोटिस के बाद कार्रवाई कब होगी, यह कोई नहीं जानता।”
*सुलभ शौचालय और बस स्टैंड की बदहाली*
किरंदुल की समस्याएं केवल सड़कों तक सीमित नहीं हैं। शहर के सुलभ शौचालय और बस स्टैंड की स्थिति भी बद से बदतर हो चुकी है। गंदगी, रखरखाव की कमी और अव्यवस्था के कारण ये सुविधाएं आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। एक स्थानीय निवासी ने चिंता जताते हुए कहा, “बस स्टैंड पर न तो बैठने की व्यवस्था है और न ही स्वच्छता। सुलभ शौचालयों का हाल ऐसा है कि लोग इस्तेमाल करने से डरते हैं।”
*नगरपालिका की लापरवाही*
नगरपालिका की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है और जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं हो रहा। एक व्यापारी ने गुस्से में कहा, “नगरपालिका को शायद तब नींद खुलेगी, जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा।” यह कहावत कि “हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे” किरंदुल की स्थिति पर पूरी तरह लागू होती है।
*आवश्यक कदम और समाधान*
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने कुछ ठोस कदमों की मांग की है:
यातायात व्यवस्था में सुधार: सड़कों पर अवैध पार्किंग को हटाने के लिए सख्त कार्रवाई और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती।
बाजार का व्यवस्थापन: बाजार क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने और दुकानों को व्यवस्थित करने की योजना।
सार्वजनिक सुलभ शौचालय से बस स्टैंड तक सुबह से रात 8 बजे तक जत ख़त खड़ी दो पहिया चार पहिया वाहनें हादशों को आमंत्रित
नगरपालिका की जवाबदेही: प्रशासन को समयबद्ध कार्रवाई के लिए जवाबदेह बनाना।
*निष्कर्ष*
किरंदुल की जनता आज एक ऐसी व्यवस्था में जी रही है, जहां हर दिन हादसे का खतरा मंडरा रहा है। नगरपालिका की उदासीनता और लापरवाही ने शहर को एक खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब समय है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी समझे और त्वरित कार्रवाई करे, ताकि किरंदुल की जनता को सुरक्षित और व्यवस्थित जीवन मिल सके। क्या प्रशासन समय रहते जागेगा, या फिर एक बड़े हादसे का इंतज़ार करेगा? यह सवाल हर किरंदुलवासी के मन में कौंध रहा है।

