*किरंदुल में भारी हाइवा ट्रकों की मनमानी: लौह अयस्क की ढुलाई से जनजीवन बेहाल, कंपनी की लापरवाही उजागर*
किरंदुल, 02 मई 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में लौह अयस्क की ढुलाई करने वाले भारी हाइवा ट्रकों की वजह से स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। वार्ड नंबर 18, किरंदुल बस्ती से शुरू होकर नगरपालिका कार्यालय, मिश्रा कैंप, कोडेनार पंचायत होते हुए बचेली तक जाने वाला मार्ग शहर और आसपास के ग्रामीणों के लिए आवागमन का एकमात्र रास्ता है। लेकिन, सैकड़ों की संख्या में दौड़ते 10 चक्का हाइवा ट्रकों ने इस मार्ग को आम लोगों के लिए खतरे का सबब बना दिया है। स्कूल जाने वाले बच्चे, पैदल यात्री और दोपहिया वाहन चालक इस मार्ग पर हर दिन जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर हैं।
*लाल मिट्टी और कीचड़ ने बढ़ाई मुश्किलें*
लौह अयस्क से लदे इन भारी वाहनों से रास्ते में लाल मिट्टी गिरती रहती है। धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है, लेकिन यह छिड़काव समस्या को और गंभीर बना रहा है। पानी और लाल मिट्टी मिलकर कीचड़ का रूप ले लेते हैं, जिससे सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं। इस कीचड़ में दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं, जिसके चलते कई लोग दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। पैदल चलने वालों की स्थिति और भी खराब है। तेज रफ्तार हाइवा ट्रकों के चक्कों से कीचड़ उछलकर राहगीरों के कपड़ों और चेहरों पर गिरता है, जिससे उनका इस मार्ग से गुजरना किसी युद्ध से कम नहीं।स्थानीय निवासी रमेश कोर्राम ने गुस्से में कहा, “यह सड़क अब हमारी नहीं, ट्रक वालों की हो गई है। सुबह से रात तक सैकड़ों ट्रक दौड़ते हैं। बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं। कीचड़ और धूल ने हमारा जीना हराम कर दिया।”
*कंपनी की लापरवाही, बाईपास मार्ग का अभाव*
इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही के लिए जिम्मेदार खनन कंपनी पर स्थानीय लोग उंगलियां उठा रहे हैं। आरोप है कि कंपनी ने भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक बाईपास मार्ग बनाने की कोई कोशिश नहीं की। यह मार्ग न केवल किरंदुल के निवासियों, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के लिए भी आवागमन का एकमात्र जरिया है। इसके बावजूद, कंपनी अपनी सुविधा के लिए इसी मार्ग का उपयोग कर रही है, जिससे जनजीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मीना साहू ने कहा, “कंपनी को मुनाफा कमाने से फुरसत नहीं है। क्या उन्हें यह नहीं दिखता कि इस मार्ग से हजारों लोग रोज गुजरते हैं? एक बाईपास मार्ग बनाना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन वे इस मुद्दे पर पूरी तरह उदासीन हैं।”
*सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खतरा*
तेज रफ्तार हाइवा ट्रकों के कारण दुर्घटना का खतरा हर पल मंडराता रहता है। स्कूल जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग इस मार्ग पर सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। इसके अलावा, धूल और कीचड़ से उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि धूल के कारण सांस की बीमारियां और एलर्जी की शिकायतें आम हो गई हैं।
*प्रशासन की चुप्पी, जनता में आक्रोश*
इस मामले में स्थानीय प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो ट्रकों की रफ्तार पर अंकुश लगाया गया और न ही सड़क की स्थिति को सुधारने के लिए कोई कार्रवाई की गई।
*क्या है समाधान?*
स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि खनन कंपनी को तत्काल एक वैकल्पिक बाईपास मार्ग का निर्माण करना चाहिए। इसके अलावा, ट्रकों की रफ्तार और संख्या को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं। सड़क पर नियमित सफाई और बेहतर जल निकासी की व्यवस्था भी इस समस्या को कम करने में मददगार हो सकती है।
*निष्कर्ष*
किरंदुल में लौह अयस्क की ढुलाई के नाम पर चल रही हाइवा ट्रकों की मनमानी ने आम लोगों के जीवन को संकट में डाल दिया है। यह समय है कि खनन कंपनी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझे और प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाए। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो स्थानीय लोगों का गुस्सा और उग्र हो सकता है। जनता अब और इंतजार करने के मूड में नहीं है

