*किरंदुल पोस्टऑफिस विवाद: बुजुर्ग-दिव्यांगों की परेशानी और पुराने भवन की मांग*

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*किरंदुल पोस्टऑफिस विवाद: बुजुर्ग-दिव्यांगों की परेशानी और पुराने भवन की मांग*

 

बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर के पोस्टऑफिस अधिकारियों ने हाल ही में किरंदुल पोस्टऑफिस का निरीक्षण किया। निरीक्षण में वर्तमान अस्थायी स्थान और बस स्टैंड के पास पुराने पोस्टऑफिस भवन दोनों जगहों का दौरा किया गया। दौरे के बाद अधिकारियों ने एनएमडीसी किरंदुल प्रबंधन को पत्र लिखकर स्पष्ट मांग रखी है कि पोस्टऑफिस को पुनः पुराने स्थान पर बस स्टैंड के समीप स्थापित किया जाए।

वर्तमान स्थान की गंभीर समस्याएं

अधिकारियों ने पाया कि वर्तमान पोस्टऑफिस तीन दुकानों में अस्थायी रूप से चलाया जा रहा है। यह स्थान कार्यालय के उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। सबसे बड़ी समस्या बुजुर्गों, अपाहिजों और दिव्यांग जनों के लिए है। 20-25 फीट ऊंची सीढ़ियां चढ़ना-उतरना उनके लिए लगभग असंभव है।

इसके अलावा:

शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं

पानी की सुविधा नहीं

फोटोकॉपी की सुविधा नहीं

भारी पार्सल और सामान लाने-ले जाने में अत्यधिक कठिनाई

ये सभी कमियां पोस्टऑफिस जैसी आवश्यक जनसेवा को प्रभावित कर रही हैं। पुराना भवन बस स्टैंड के पास आज भी अच्छी हालत में है और वहां पोस्टऑफिस पुनः शुरू करने की मांग जायज मानी जा रही है।

जनहित बनाम कब्जा का सवाल

किरंदुल की जनता, खासकर दिव्यांगों और आसपास के ग्रामीणों की नजर अब एनएमडीसी परियोजना प्रबंधन और श्रमिक संगठन INTUC पर टिकी हुई है। सवाल यह है कि क्या जनहित में पुराने पोस्टऑफिस भवन में सेवा फिर से शुरू की जाएगी, या INTUC पुराने भवन में कब्जा बनाए रखेगा?

INTUC से भी सवाल उठाया जा रहा है। पुराने पोस्टऑफिस भवन में जो कब्जा है, उसे कब्जा क्यों न कहा जाए? क्या INTUC द्वारा लगाए गए बोर्ड पर कहीं यह दर्ज है कि “सरदार वल्लभभाई पटेल पुस्तकालय” का संचालन INTUC द्वारा किया जा रहा है? यदि ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है, तो जनता की नजर में यह INTUC का कब्जा ही माना जाएगा। भवन में आज भी पोस्टऑफिस का जनरेटर रखा होना इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि वह संपत्ति अभी भी पोस्टऑफिस से जुड़ी हुई है और INTUC के नियंत्रण में है।

आगे की राह

पोस्टऑफिस अधिकारियों की सिफारिश और जनता की मांग साफ है—बुजुर्गों, दिव्यांगों और आम नागरिकों के हित में पुराने स्थान पर पोस्टऑफिस की बहाली। अब एनएमडीसी प्रबंधन और INTUC को स्पष्ट रुख अपनाना होगा। जनहित के इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की भूमिका पर किरंदुल की जनता नजर रखे हुए है।

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