*एनएमडीसी परियोजना अस्पताल, किरंदुल में लापरवाही का गंभीर मामला: एम्बुलेंस खड़ी रहते भी मरीज को इंकार, सुविधाएं भी जर्जर*

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*एनएमडीसी परियोजना अस्पताल, किरंदुल में लापरवाही का गंभीर मामला: एम्बुलेंस खड़ी रहते भी मरीज को इंकार, सुविधाएं भी जर्जर*

दंतेवाड़ा (किशोर कुमार रामटेके, वंदे भारत): छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल स्थित एनएमडीसी परियोजना अस्पताल में ग्रामीणों के लिए उपलब्ध एम्बुलेंस सुविधा को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आपात स्थिति में एम्बुलेंस उपलब्ध रहते हुए भी मरीज को लेने से इनकार किए जाने का आरोप लगा है।

*घटना क्या हुई?*

मंगलवार सुबह करीब 7:50 बजे घड़ी चौक के समीप मुख्य मार्ग पर दो दिनों से एक अज्ञात व्यक्ति गंभीर हालत में पड़ा हुआ था। स्थानीय पत्रकार किशोर कुमार रामटेके को सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंचे। व्यक्ति की हालत देखते हुए उन्होंने तुरंत एनएमडीसी परियोजना अस्पताल को फोन कर एम्बुलेंस मांगी। अस्पताल कर्मचारी आयतु ने बताया कि एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है और फोन काट दिया।

जब पत्रकार अस्पताल पहुंचे तो वहां एम्बुलेंस खड़ी मिली, लेकिन ड्राइवर और आयतु दोनों मौजूद नहीं थे। आयतु को 5-7 बार फोन करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार अस्पताल के नियमित एनएमडीसी कर्मचारी साहू (ड्राइवर) ने दूसरे एम्बुलेंस से अज्ञात व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया, जहां फिलहाल उसका इलाज चल रहा है।

20-25 मिनट बाद आयतु अस्पताल पहुंचा। पूछने पर उसने बताया कि एम्बुलेंस नंबर CG 17 LC 7437 का ड्राइवर साहिल फोन नहीं उठा रहा था और अंदर सो रहा था, इसलिए एम्बुलेंस देने से मना किया गया। तीन दिन पहले भी ड्राइवर राजू कुंजाम के व्यवहार को लेकर ग्रामीणों से कहा-सुनी हुई थी।

*अस्पताल की अन्य खामियां*

रक्त जांच कक्ष के पास पीनें के पानी का फ्रिज लगा हुआ है, लेकिन महीनों से सूखा पड़ा है।

ओपीडी में आने वाली महिलाओं के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। वार्डों के अंदर शौचालय हैं, लेकिन ओपीडी क्षेत्र में महिलाओं को इस बुनियादी सुविधा से वंचित रखा गया है।

*ग्रामीणों और पत्रकार का आरोप*

एनएमडीसी परियोजना अस्पताल में ग्रामीणों के लिए अलग से तीन एम्बुलेंस की व्यवस्था बताई जाती है, लेकिन व्यवहार और उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। एम्बुलेंस ड्राइवरों और कर्मचारियों का रवैया विवादास्पद बताया जा रहा है। दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को आपात स्थिति में समय पर सुविधा न मिलना जानलेवा साबित हो सकता है।

यह मामला एनएमडीसी प्रबंधन और अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। दूरदराज के इस क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग लंबे समय से की जा रही है।

प्रबंधन की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस गंभीर लापरवाही और सुविधाओं की कमी पर एनएमडीसी प्रबंधन और अस्पताल अधीक्षक का बयान अभी तक उपलब्ध नहीं हो सका है। वंदे भारत इस मामले की आगे भी निगरानी करेगा और प्रबंधन की प्रतिक्रिया प्रकाशित करेगा।

नागरिक अपील:

ऐसी लापरवाही की कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन, मीडिया या उच्चाधिकारियों को सूचित करें। स्वास्थ्य सेवा मौलिक अधिकार है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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