*किरंदुल पोस्ट ऑफिस कब्जा घोटाला: INTUC ने सरकारी संपत्ति हड़प ली, अपना भवन तो बना रखा है किराए का अड्डा!*
दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में जनता की सुविधा लुट रही है – पुराना पोस्ट ऑफिस INTUC के कब्जे में, ग्रामीण भटक रहे हैं!
किरंदुल शहर के हृदय स्थल पर स्थित पुराना पोस्ट ऑफिस भवन आज INTUC (इंटक) के कब्जे में चला गया है। बाहर “पुस्तकालय” का बोर्ड लगा है, लेकिन भवन हमेशा ताला बंद रहता है। अंदर क्या चल रहा है, किसी को पता नहीं। वहीं INTUC का अपना भवन ठीक बगल में है, जिसके ऊपरी तल पर वर्षों से ग्रामीण बैंक को मोटे किराए पर दिया हुआ है। बाकी कमरे भी लॉज की तरह किराए पर चल रहे हैं।
दोहरा चरित्र और साजिश की बू
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पुराने पोस्ट ऑफिस भवन को जानबूझकर जर्जर घोषित कर पोस्ट ऑफिस को हटा दिया गया। नया पोस्ट ऑफिस NMDC शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की तीन दुकानों में ठूंस दिया गया, जहां पहुंचना आम लोगों के लिए मुश्किल और कर्मचारियों के लिए परेशानी भरा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है — INTUC अगर सच में जनसेवा चाहती थी तो अपना भवन क्यों नहीं इस्तेमाल किया?
उसके अपने भवन में जितने कमरे किराए पर चल रहे हैं, वहां हॉल बनाकर डिजिटल पुस्तकालय खोल सकती थी। लेकिन नहीं, INTUC ने सरकारी पोस्ट ऑफिस भवन पर कब्जा जमाना ज्यादा मुनासिब समझा।
INTUC की कमर्शियल मॉडल
अपना भवन → किराए का धंधा (ऊपरी तल पर बैंक + अन्य कमरे)
पुराना पोस्ट ऑफिस भवन → “दिखावे का पुस्तकालय” (ताला बंद)
जनता → पोस्ट ऑफिस के लिए भटकती रही
सोशल मीडिया पर पहले ही किरंदुल में डिजिटल पुस्तकालय की मांग उठ चुकी थी, लेकिन INTUC ने पुरानी इमारत को हड़पकर सिर्फ बोर्ड लगा दिया। अगर किताबें रखी हैं तो ताला क्यों? और अगर इमारत जर्जर थी तो बस स्टैंड के पास की इस प्राइम लोकेशन को तोड़कर बस स्टैंड क्यों नहीं चौड़ा किया गया?
ग्रामीणों की पीड़ा
आज किरंदुल और आसपास के गांवों के लोग पोस्ट ऑफिस की तलाश में भटक रहे हैं। नया पता किसी को नहीं, पहुंच कठिन है। पुराना भवन जो शहर के बीच में था, वहां सबको पता था। INTUC ने ठीक उसी जगह पर कब्जा कर लिया जहां से आम आदमी आसानी से काम कर सकता था।
INTUC का दोहरा चेहरा:
एक तरफ मजदूरों और जनता की सेवक बनने का दावा, दूसरी तरफ सरकारी संपत्ति हड़पकर अपना किराए का साम्राज्य बढ़ाना। अपना भवन तो पूरी तरह कमर्शियल बना दिया, जनता की जरूरत (पोस्ट ऑफिस) को नजरअंदाज कर दिया।
जनता पूछ रही है:
प्रशासन और NMDC ने INTUC को पुराना पोस्ट ऑफिस भवन कब्जे में लेने की अनुमति क्यों दी?
जर्जर घोषणा की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
INTUC अपने भवन का किराया कमाकर क्या कर रही है? मजदूर कल्याण में खर्च होता है या नेताओं की जेब में?
पुराना पोस्ट ऑफिस भवन वापस जनता को क्यों नहीं लौटाया जा रहा?
किरंदुल के लोग अब गुस्से में हैं। INTUC की इस हरकत ने साबित कर दिया कि वह मजदूरों की सेवा कम और सरकारी संपत्ति पर कब्जा व मुनाफा ज्यादा देखती है।
क्या अब प्रशासन इस कब्जा घोटाले की जांच कराएगा?
या INTUC की दादागिरी और किराए का धंधा जारी रहेग!

