*मिनी इंडिया में फूट की साजिश! एनएमडीसी का विवादास्पद पत्र: किरंदुल को ‘एनएमडीसी कर्मचारी’ और ‘गैर-कर्मचारी’ में बांटने की तैयारी?*
किरंदुल (दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़) – जहां सदियों से आदिवासी, हिंदू, मुस्लिम, सिख समेत सभी समुदाय भाईचारे की मिसाल पेश करते आए हैं, वहीं नवरत्न कंपनी एनएमडीसी के एक आंतरिक पत्र ने पूरे ‘मिनी इंडिया’ को हिला दिया है। पत्र में 14 सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के नाम के आगे “एनएमडीसी कर्मचारी” उपसर्ग जोड़ने का फैसला लिया गया है।
लेकिन अब पूरे किरंदुल में तीखा विरोध शुरू हो गया है। गैर-एनएमडीसी किरंदुल निवासियों समेत सभी सामाजिक संस्थाओं ने इस आदेश का पुरजोर विरोध किया है।
पत्र का विवरण
*एनएमडीसी किरंदुल परियोजना के मानव संसाधन विभाग से जारी पत्र में कहा गया है:*
“सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत, संबंधित समाज/भवनों के नाम के आगे ‘एनएमडीसी कर्मचारी’ उपसर्ग जोड़ने का फैसला किया गया है। यह पहल कंपनी के कल्याणकारी उपायों और सामाजिक योगदान के बारे में कर्मचारियों तथा आम जनता में अधिक जागरूकता पैदा करेगी।”
अंतिम तिथि: 10 जुलाई 2026 तक नाम बदलकर पंजीकरण करवाना और दस्तावेज जमा करना अनिवार्य।
प्रभाव: सभी बोर्ड, साइनेज और नामों में “एनएमडीसी कर्मचारी” जोड़ना जरूरी।
*तीखा विरोध: “समाज तोड़ने वाला फैसला बर्दाश्त नहीं”*
*यूपी बिहार सामाजिक संस्था के वर्तमान अध्यक्ष रविन्द्र सोनी ने कहा,*
“यूपी बिहार सामाजिक संस्था वर्षों पुरानी है। भवन निर्माण सभी के सहयोग से हुआ था और आज भी सभी लोग अपना सहयोग देते हैं। एनएमडीसी का यह फैसला समाज को तोड़ रहा है, दो भागों में बांट रहा है, जो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अगर एनएमडीसी भवन बना कर दे रही है तो सामाजिक नाम बदलने की जगह भवन पर बड़े अक्षरों में अपना नाम लिख ले, लेकिन समाज को बांटने की कोशिश न करे।”
*जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष आर.सी. नाहक ने कहा,*
“किरंदुल में एनएमडीसी कर्मचारी और अन्य सभी एक साथ मिलकर रहते हैं। एनएमडीसी के इस पत्र ने सभी को दो भागों में बांटने का काम किया है। हम सभी इस फैसले के खिलाफ हैं।”
*आदिवासी समाज के विजय सोढ़ी ने आरोप लगाते हुए कहा,*
“एनएमडीसी ऐसे आदेश देकर अंग्रेजों वाला शासन लागू करना चाहती है – ‘फूट डालो और राज करो’। आदिवासी और सभी हम सब एक हैं। ऐसे फैसले का हम पुरजोर विरोध करते हैं।”
*नगरपालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने कड़े शब्दों में विरोध जताया और कहा,*
“एनएमडीसी हिटलरशाही की तरह पेश आ रही है। समाजों के नाम में ‘एनएमडीसी कर्मचारी’ जोड़ना बड़ा गलत फैसला है। हम ऐसा बिल्कुल नहीं होने देंगे।”
*पूर्व सांसद प्रतिनिधि राजू रेड्डी ने चेतावनी देते हुए कहा* कि इस तरह की हिटलरशाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
“एनएमडीसी अब बंटवारे की लकीर न खींचे, नहीं तो एनएमडीसी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।”
और भी बड़े सवाल
इंटक और एसकेएमएस यूनियन को इस नोटिस से पूरी छूट क्यों दी गई है जबकि अन्य 14 संस्थाओं पर दबाव?
राघव मंदिर (जो एनएमडीसी से पहले का है) समेत अन्य संस्थाओं में क्या अब गैर-एनएमडीसी लोगों का प्रवेश बंद हो जाएगा?
*निर्माणाधीन फ्लाईओवर ब्रिज क्या केवल एनएमडीसी कर्मचारियों के लिए होगा?*
*क्या ‘मिनी इंडिया’ अब ‘मिनी विभाजित भारत’ बनने जा रहा है?*
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं – एनएमडीसी किरंदुल की प्राकृतिक संपदा पर निर्भर है। यहां के आदिवासी और गैर-कर्मचारी भी कंपनी के विकास में योगदान देते हैं। फिर ऐसा भेदभाव और विभाजन क्यों?
किरंदुल की एकता पर खतरा
राघव मंदिर पूरे किरंदुल की आस्था का केंद्र है। एनएमडीसी का यह कदम सामाजिक सद्भाव को गंभीर खतरा पहुंचा रहा है।
एनएमडीसी से तत्काल जवाब की मांग:
14 संस्थाओं पर दबाव और चुनिंदा यूनियनों को छूट क्यों?
क्या यह फैसला सभी हितधारकों से चर्चा के बाद लिया गया?
सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाले इस कदम पर कंपनी की क्या सफाई है?
समय आ गया है कि प्रशासन, स्थानीय सांसद, विधायक और एनएमडीसी प्रबंधन इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लें। मिनी इंडिया की एकता टूटने नहीं दी जानी चाहिए।
किरंदुलवासी जागो! एकता बचाओ – एनएमडीसी के विभाजनकारी फैसले का पुरजोर विरोध करो!

