*किरंदुल वासियों के लिए खुशी की खबर! अब शहर में आवारा घूम रहे गौओं को मिलेगा सुरक्षित आश्रय*
किरंदुल (दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़) – शहर की सड़कों पर आवारा घूम रहे गौ पशुओं से अब जल्द ही छुटकारा मिलने वाला है। किरंदुल नगर निगम (एनएमडीसी क्षेत्र) के वार्ड क्रमांक 1 में चेक डेम के समीप स्थित जंगल और जमीन पर गौ चारागाह तैयार किया जा रहा है। यह पहल शिव मंदिर समिति और स्थानीय लोगों के सहयोग से हो रही है, जो गौ सेवा के साथ-साथ शहर को भी स्वच्छ और सुरक्षित बनाने में मददगार साबित होगी।
चारागाह की खासियतें:
सुरक्षित जगह: यह क्षेत्र पूरी तरह जंगल में है, जहां वाहनों की आवाजाही न के बराबर है। इससे गौओं के छोटे बछड़ों और बड़े पशुओं को सड़क हादसों से पूरी सुरक्षा मिलेगी।
भोजन की व्यवस्था: सरकारी नर्सरी (वार्ड क्रमांक 18) में 50 से अधिक घास के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। बारिश शुरू होते ही इनका रोपण किया जाएगा। 5-6 महीनों में चारागाह पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जहां घास की अच्छी पैदावार होगी और गौओं को प्राकृतिक चारा उपलब्ध रहेगा।
समयसीमा: बारिश के मौसम में पौधे रोपे जाएंगे, जिससे 5-6 महीने में जगह पूरी तरह उपयोगी बन जाएगी।
शिव मंदिर का पुनरुद्धार:
इसी स्थान पर 20 साल पुराना शिव मंदिर भी स्थित है, जो बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गया था और दो वर्षों से पूजा बंद थी। 1 जनवरी 2026 को स्थानीय लोगों और समिति के सहयोग से मंदिर की सफाई, पूजा और भंडारा कराया गया। अब मंदिर को पूजा योग्य बना दिया गया है।
महिलाओं की सुविधा के लिए पुजारी की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
एनएमडीसी के सहयोग से लाइट की व्यवस्था हो रही है। जल्द ही लाइट खंभे लगाए जाएंगे, ताकि शाम के समय भी अंधेरे में कोई समस्या न हो।
सामुदायिक पहल:
यह गौ चारागाह शिव मंदिर समिति की देखरेख में संचालित होगा। कोई भी दानी यहां आकर गौ सेवा कर सकता है। शहर के आवारा गौओं को यहां लाकर सुरक्षित रखा जाएगा। इससे दोनों तरफ फायदा – शहर स्वच्छ रहेगा और गौ माता भी सुरक्षित व संरक्षित रहेंगी।
यह पहल गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है। छत्तीसगढ़ सरकार की गौधाम योजना के माहौल में किरंदुल की यह स्थानीय पहल और भी प्रासंगिक हो जाती है, जो आवारा पशुओं के संरक्षण पर जोर दे रही है।
किरंदुलवासी अब इस अच्छी पहल का स्वागत कर रहे हैं। आने वाले महीनों में जब चारागाह पूरी तरह तैयार हो जाएगा, तो शहर की सड़कें गौओं से मुक्त होंगी और एक पवित्र, हरित स्थान तैयार होगा जहां गौ सेवा के साथ शिव भक्ति भी जारी रहेगी।
जय गौ माता! जय भोलेनाथ!
यह छोटी सी पहल बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकती है।

