*किरंदुल में NMDC के करोड़ों की संपत्ति पर ठेका श्रमिकों का बेधड़क कब्जा: क्या बड़े अधिकारी हैं साजिश में शामिल?*

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*किरंदुल में NMDC के करोड़ों की संपत्ति पर ठेका श्रमिकों का बेधड़क कब्जा: क्या बड़े अधिकारी हैं साजिश में शामिल?*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 30 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के किरंदुल में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) की करोड़ों रुपये की फाइन ओर (बारीक लौह अयस्क) की जमीन पर ठेका श्रमिकों का अवैध अतिक्रमण फिर से सिर उठा रहा है। वार्ड नंबर 14 में स्थित यह नजुल भूमि, जो NMDC की किरंदुल परियोजना का हिस्सा है, अब ठेका श्रमिकों और स्थानीय ठेकेदारों के लिए ‘फ्री लैंड’ बन गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यहां लाखों टन फाइन ओर पड़ी हुई है, जिसकी कीमत करोड़ों-अरबों में है, लेकिन कुछ ठेका श्रमिक बेखौफ निर्माण कर रहे हैं। क्या NMDC या नगरपालिका ने इन ठेका श्रमिकों को कोई ‘विशेष छूट’ दे रखी है? या फिर पीछे बड़े अधिकारियों का हाथ है, जो इस लूट को आंखें मूंदकर देख रहे हैं?

यह कोई नई कहानी नहीं है। कुछ वर्ष पहले भी इसी जगह पर स्थानीय ठेकेदारों ने अवैध गोदाम बना लिए थे। तब तत्कालीन तहसीलदार जीवेश सोरी ने बुलडोजर चलाकर इसे जमींदोज कर दिया था। लेकिन अब वही पुरानी बीमारी फिर से उभर आई है। एक ठेका श्रमिक ने पहले निर्माण किया, और अब दूसरा कर रहा है। क्या यह संयोग है या सुनियोजित साजिश? विश्लेषण करने पर साफ लगता है कि यह NMDC की लापरवाही और नगरपालिका की मिलीभगत का नतीजा है। जहां एक ओर NMDC को राज्य सरकार से खनन उल्लंघनों के लिए 1620 करोड़ रुपये का जुर्माना झेलना पड़ रहा है (जैसा कि हालिया रिपोर्ट्स में सामने आया है), वहीं दूसरी ओर उसकी अपनी संपत्ति पर अवैध कब्जा हो रहा है, और कोई कार्रवाई नहीं हो रही। यह दोहरी मार नहीं, बल्कि संस्थागत भ्रष्टाचार की मिसाल है।

विश्लेषण से पता चलता है कि ठेका श्रमिकों को ‘विशेष छूट’ का कोई कानूनी आधार नहीं है। NMDC के क्षेत्र में अतिक्रमण पूरी तरह अवैध है, और नजुल भूमि पर निर्माण भूमि राजस्व संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। लेकिन अगर ठेका श्रमिक बेधड़क निर्माण कर रहे हैं, तो सवाल उठता है – क्या NMDC या नगरपालिका के बड़े अधिकारी इनसे रिश्वत ले रहे हैं? या फिर राजनीतिक दबाव में आंखें फेर रहे हैं? पहले भी ऐसे मामले में कार्रवाई हुई थी, लेकिन अब चुप्पी क्यों? यह करोड़ों की सरकारी संपत्ति की लूट है, जो अंततः देश के खजाने को चूना लगा रही है। NMDC की किरंदुल परियोजना, जो देश की प्रमुख लौह अयस्क उत्पादन इकाइयों में से एक है, ऐसी लापरवाही से अपनी साख खो रही है। हाल के वर्षों में किरंदुल में आग लगने की घटनाएं और खनन उल्लंघन के केस पहले ही NMDC को बदनाम कर चुके हैं, और अब यह अतिक्रमण का खेल इसे और गहराई में धकेल रहा है।

यह घोर लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की कहानी है। NMDC और जिला प्रशासन को तुरंत इस पर ध्यान देना चाहिए। अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साबित होगा कि सिस्टम में सड़ांध है, जहां ठेका श्रमिकों को ‘विशेष छूट’ नहीं, बल्कि ‘विशेष संरक्षण’ मिला हुआ है। क्या जिला प्रशासन जागेगा, या करोड़ों की लूट जारी रहेगी? जनता की नजरें अब प्रशासन पर टिकी हैं – अगर अब भी चुप रहे, तो यह न केवल अपराध है, बल्कि देशद्रोह के बराबर है।

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