*किरंदुल: वार्ड 8 के पार्षद राजकुमार सोनी की घोर लापरवाही से बाजार बना मौत का जाल, गांधीनगर हाट बाजार में करोड़ों की बर्बादी उजागर*
किरंदुल (सी ज़ी संविधान न्यूज़ ): किरंदुल का मुख्य बाजार आज पूरी तरह से अराजकता और मौत के मुहाने पर खड़ा है, और इसके लिए सीधे जिम्मेदार हैं वार्ड क्रमांक 8 के पार्षद राजकुमार सोनी। उनकी घोर लापरवाही और निकम्मेपन का यह जीता-जागता उदाहरण है कि बाजार सुबह 6 बजे से मुख्य रोड पर फैल जाता है, जहां लोग 8 बजे तक सब्जियां खरीदने में व्यस्त रहते हैं, लेकिन पार्षद महोदय की नींद 9 बजे जाकर खुलती है। जब तक वे अपनी आंखें मलते हैं, बाजार अपने चरम पर पहुंच चुका होता है, और दुर्घटनाओं का इंतजार कर रहा होता है। क्या यह पार्षद की जिम्मेदारी नहीं कि वे अपने वार्ड की सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करें? लेकिन सोनी की यह आलसी और गैर-जिम्मेदाराना रवैया शहर को तबाही की ओर धकेल रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पार्षद सोनी की यह नाकामी नई नहीं है। 18 साल पहले जब गांधीनगर हाट बाजार का निर्माण हुआ था, तब भी वे ही वार्ड 8 के पार्षद थे, और नगरपालिका के तत्कालीन अध्यक्ष पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह (वर्तमान अध्यक्ष रूबी सिंह के पति) थे। क्या इस बाजार को बनाने का मकसद सिर्फ सरकारी पैसों का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत करना था? आज गांधीनगर हाट बाजार पूरी तरह वीरान और खाली पड़ा है, जहां 30-40 हटरी का पक्का कंक्रीट निर्माण करोड़ों की लागत से किया गया था। यह जगह सालों से धूल फांक रही है, जबकि इसे उपयोगी बनाया जा सकता था। पार्षद सोनी और नगरपालिका अध्यक्ष की असफलता यहां साफ झलकती है – उन्होंने कभी इसकी सुध नहीं ली, और अब यह भ्रष्टाचार का स्मारक बनकर खड़ा है।
किरंदुल का यह ज्वलंत मुद्दा और भी शर्मनाक तब बन जाता है जब हम वार्ड क्रमांक 12 के 80 परिवारों की स्थिति देखते हैं। इन परिवारों को हटाने के लिए जी-जान लगाई जा रही है, लेकिन नगरपालिका अध्यक्ष व वार्ड पार्षद 12 व 8 के पार्षद सोनी और नगरपालिका की नजर गांधीनगर हाट बाजार पर क्यों नहीं जाती? इस वीरान जगह पर चबूतरे का निर्माण करोड़ों की लागत से हुआ है, जो 18 सालों से बेकार पड़ा है। इसे चारदीवारी से घेरकर, कमरों का निर्माण करके 40 परिवारों को नीचे और ऊपरी मंजिल तैयार कर 40 परिवारों को स्थापित किया जा सकता है। कुल मिलाकर 80 परिवार यहां बसाए जा सकते हैं। या फिर इसे गोदामों या गरीब बेघर परिवारों के लिए व्यवस्था करके उपयोगी बनाया जा सकता है। लेकिन नगरपालिका अध्यक्ष व पार्षद सोनी की उदासीनता के कारण यह करोड़ों का प्रोजेक्ट बर्बाद हो रहा है, और गरीबों की जिंदगियां दांव पर लगी हैं।
यह स्थिति नगरपालिका अध्यक्ष व पार्षद राजकुमार सोनी की पूर्ण असफलता और भ्रष्टाचार में संलिप्तता को उजागर करती है। शहरवासी पूछ रहे हैं – क्या सोनी का पार्षद बनना सिर्फ नाम का है? उनकी लापरवाही से बाजार रोड पर मौत का नाच हो रहा है, और गांधीनगर हाट बाजार जैसे संसाधन सड़ रहे हैं। नगरपालिका को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, वरना किरंदुल की जनता इस निकम्मे नेतृत्व को कभी माफ नहीं करेगी। पार्षद सोनी की यह नाकामी न सिर्फ वार्ड 8 को, बल्कि पूरे शहर को शर्मसार कर रही है।

