*किरंदुल: कुबेर नगरी का दोहरा चेहरा – NMDC की चमक और नगरपालिका का अंधेरा*
रिपोर्ट: सी ज़ी संविधान न्यूज़ छत्तीसगढ़
किशोर कुमार रामटेके
(28 जनवरी 2026)
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बसा किरंदुल शहर, जिसे ‘कुबेर नगरी’ के नाम से जाना जाता है, इन दिनों एक अजीबोगरीब नजारे का गवाह बन रहा है। दिन ढलते ही यह कस्बा मानो दो अलग-अलग दुनिया में बंट जाता है। एक तरफ राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) का क्षेत्र, जो तिरंगे रंग की जगमगाती लाइटों से सजा-धजा नजर आता है, और दूसरी तरफ नगरपालिका का इलाका, जहां अंधेरा छाया रहता है या फिर लाइटों की आंखमिचौनी चलती रहती है। यह असमानता न केवल शहर की खूबसूरती को प्रभावित कर रही है, बल्कि स्थानीय निवासियों के जीवन को भी मुश्किल बना रही है। क्या यह वाकई एक ही शहर है, या विकास की खाई ने इसे दो हिस्सों में बांट दिया है? आइए इस मुद्दे का गहराई से विश्लेषण करें।
किरंदुल की पहचान: खनन की राजधानी
किरंदुल छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण खनन केंद्र है, जहां NMDC की आयरन ओर खदानें देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती हैं। NMDC, एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम, यहां की मुख्य आर्थिक धुरी है। इसकी वजह से शहर को ‘कुबेर नगरी’ कहा जाता है, क्योंकि खनन से मिलने वाली समृद्धि ने यहां रोजगार और विकास को बढ़ावा दिया है। NMDC का टाउनशिप क्षेत्र आधुनिक सुविधाओं से लैस है – अच्छी सड़कें, अस्पताल, स्कूल और अब तिरंगे रंग की LED लाइटें, जो बस स्टैंड से पूरे टाउनशिप को रोशन करती हैं। ये लाइटें न केवल सौंदर्य बढ़ाती हैं, बल्कि सुरक्षा भी सुनिश्चित करती हैं। लेकिन शहर का दूसरा हिस्सा, जो नगरपालिका के अधीन आता है, इससे बिल्कुल अलग है। यहां शाम होते ही सड़कें अंधेरी हो जाती हैं, और कुछ जगहों पर लाइट पोल तो हैं, लेकिन वे दम तोड़ते दीये की तरह टिमटिमाते रहते हैं।
समस्या का विश्लेषण: दो भागों में बंटा शहर
स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह समस्या नई नहीं है, लेकिन हाल के महीनों में यह और गंभीर हो गई है। NMDC क्षेत्र में लाइटिंग सिस्टम हाई-टेक है – सोलर ब्लिंकर्स और LED लाइट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो ऊर्जा कुशल और पर्यावरण अनुकूल हैं। वहीं, नगरपालिका क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट्स पुरानी हैं, रखरखाव की कमी है, और बिजली कटौती की समस्या आम है। कारणों में शामिल हैं:
प्रशासनिक विभाजन: NMDC एक केंद्रीय उपक्रम है, जिसका अपना बजट और प्रबंधन है। यह अपने क्षेत्र की देखभाल स्वयं करता है, जबकि नगरपालिका स्थानीय सरकार पर निर्भर है। बजट की कमी, भ्रष्टाचार या प्राथमिकताओं का अभाव यहां की मुख्य समस्या है।
आर्थिक असमानता: खनन से मिलने वाली रॉयल्टी का बड़ा हिस्सा NMDC को जाता है, लेकिन स्थानीय विकास के लिए पर्याप्त फंड ट्रांसफर नहीं होता। हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने NMDC पर 1620 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जो खनन नियमों के उल्लंघन से जुड़ा था, लेकिन इसका असर लाइटिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं पर नहीं पड़ा।
पर्यावरण और सुरक्षा के प्रभाव: अंधेरे इलाकों में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए। किरंदुल जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में, जहां जंगलों से सटे इलाके हैं, अंधेरा वन्यजीवों के हमलों या अपराधों को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही, यह शहर की छवि को प्रभावित करता है, जो पर्यटन और निवेश के लिए महत्वपूर्ण है।
एक स्थानीय निवासी, जो नाम न छापने की शर्त पर बोले, कहते हैं, “NMDC वाले इलाके में तो रात में भी दिन जैसा उजाला है, लेकिन हमारे मोहल्ले में बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। क्या हम एक ही शहर के नागरिक नहीं हैं?” यह सवाल शहर की एकता पर उठता है।
सकारात्मक पहलू और समाधान की दिशा
हालांकि समस्या गंभीर है, लेकिन इसमें सुधार की गुंजाइश है। NMDC ने हाल के वर्षों में अपने टाउनशिप में LED लाइट्स लगाकर ऊर्जा बचत की मिसाल पेश की है, और सोलर एनर्जी पर फोकस किया है। अगर नगरपालिका और NMDC के बीच सहयोग बढ़े, तो पूरे शहर को फायदा हो सकता है। संभावित समाधान:
संयुक्त प्रोजेक्ट: NMDC अपनी CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड से नगरपालिका क्षेत्र में लाइटिंग सुधार सकता है। पहले भी NMDC ने स्थानीय विकास में योगदान दिया है, जैसे आवासीय टाउनशिप का निर्माण।
सरकारी हस्तक्षेप: छत्तीसगढ़ सरकार को बजट आवंटित करना चाहिए और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं के तहत लाइटिंग को अपग्रेड करना चाहिए। सोलर स्ट्रीट लाइट्स का इस्तेमाल बिजली कटौती की समस्या को हल कर सकता है।
समुदाय की भूमिका: स्थानीय लोग शिकायत दर्ज कराकर दबाव बना सकते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे मुद्दे उठाने से ध्यान आकर्षित होता है, जैसा कि अन्य शहरों में देखा गया है।
निष्कर्ष: एकता की जरूरत
किरंदुल की कुबेर नगरी की चमक पूरे शहर में फैलनी चाहिए, न कि सिर्फ एक हिस्से में। यह समस्या विकास की असमानता को उजागर करती है, जहां कॉर्पोरेट क्षेत्र चमकता है, लेकिन लोकल गवर्नेंस पिछड़ जाता है। अगर समय रहते कदम उठाए जाएं, तो किरंदुल न केवल खनन की राजधानी, बल्कि एक समान रूप से रोशन और सुरक्षित शहर बन सकता है। स्थानीय प्रशासन और NMDC को मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि शाम ढलते ही शहर एक हो जाए, न कि दो?

