*किरंदुल में RSS शताब्दी वर्ष का भव्य पथ संचलन: एकता के स्वरों से गूंजा दंतेवाड़ा का हृदय*
किरंदुल, दंतेवाड़ा, 12 अक्टूबर 2025:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में आज एक अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायी पथ संचलन का आयोजन किया गया। यह संचलन न केवल संघ की सदी पुरानी यात्रा का जीवंत प्रमाण था, अपितु राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम, एकजुटता और समर्पण की भावना को आकाश छूते हुए प्रदर्शित करने वाला एक जीवंत चित्रण सिद्ध हुआ। सैकड़ों स्वयंसेवकों की अनुशासित शोभायात्रा ने स्थानीय निवासियों के हृदय में देशभक्ति की लौ को और प्रज्वलित कर दिया, जो प्रत्येक कदम पर प्रतीत हो रही थी।
सुबह के शांतिपूर्ण क्षणों में बंगाली कैंप स्थित दुर्गा मंदिर से प्रारंभ हुआ यह पथ संचलन, किरंदुल के प्रमुख चौराहों और चौकों को पार करता हुआ राघव मंदिर में एक भावपूर्ण समापन पर पहुंचा। स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में, संगठित मार्गदर्शन के अंतर्गत, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के उद्घोषों से वातावरण को गुंजायमान कर रहे थे। इस संचलन में भाग लेने वाले युवा, वृद्ध, महिलाएं और बच्चे—सभी ने एक ही सूत्र में बंधकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प को पुनः दोहराया। यह दृश्य ऐसा था मानो सैकड़ों वर्ष पुरानी भारतीय परंपरा की धारा, आधुनिक भारत के भविष्य की ओर अग्रसर हो रही हो, जहां एकता की ज्योति अंधकार को निगल लेने को तत्पर हो।
मार्गस्थल पर किरंदुल की गौरवशाली महिलाओं और नन्हे-मुन्ने बच्चों ने इस शोभायात्रा का स्वागत एक अपूर्व उत्साह के साथ किया। जगह-जगह चौकों पर फूलों की वर्षा से सजा हुआ था पूरा परिदृश्य, जो स्वयंसेवकों के सम्मान में वर्षा ऋतु की वर्षा सरीखा प्रतीत हो रहा था। पुष्पांजलि के साथ-साथ आतिशबाजी की चमकदार ज्योतियां आकाश में उड़ती हुईं, मानो राष्ट्र प्रेम की चिंगारियां प्रत्येक हृदय तक पहुंच रही हों। स्थानीय निवासियों के चेहरों पर मुस्कान और आंखों में चमक थी, जो इस आयोजन को एक सामूहिक उत्सव का रूप प्रदान कर रही थी। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया, जबकि बच्चे तिरंगे झंडे लहराते हुए स्वयंसेवकों का अभिनंदन कर रहे थे—यह दृश्य एकता के अमर स्वरूप को साकार कर रहा था।
यह पथ संचलन RSS के शताब्दी वर्ष के व्यापक अभियान का हिस्सा है, जो 2 अक्टूबर 2025 से प्रारंभ होकर पूरे वर्ष भर चलेगा। संघ के इस उत्सव के माध्यम से देश भर में एकता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय पुनर्जागरण का संदेश प्रसारित किया जा रहा है। किरंदुल जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में यह आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां स्वयंसेवकों का समर्पण स्थानीय समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आयोजकों के अनुसार, इस संचलन ने न केवल संघ की जड़ों को मजबूत किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरक उदाहरण स्थापित किया।
किरंदुल के निवासी इस आयोजन को स्मरणीय बताते हुए कहते हैं कि यह न केवल एक मार्च था, अपितु राष्ट्र के प्रति प्रेम का एक महासागर था, जो प्रत्येक कण में व्याप्त था। RSS के स्थानीय प्रभारी ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों से क्षेत्र में एकता और विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ जाएगा। यह संचलन दंतेवाड़ा की मिट्टी में बोए गए बीजों का फल है, जो एक समृद्ध और एकजुट भारत की कल्पना को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हुआ।
