*भूतपूर्व सैनिक स्वर्गीय मनोहरलाल की जमीन पर कब्जा: न्याय के लिए दर-दर भटकता परिवार*
दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़: एक भूतपूर्व सैनिक स्वर्गीय मनोहरलाल के परिवार की दर्दनाक कहानी सामने आई है, जो अपनी ही पट्टे की जमीन को वापस पाने के लिए वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहा है। किरंदुल के पातालनागर क्षेत्र में स्थित इस जमीन पर न केवल स्थानीय लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है, बल्कि भारत की नवरत्न कंपनी नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NMDC) ने भी बिना अनुमति या मुआवजे के सड़क निर्माण कर लिया है। यह मामला न केवल कानूनी उल्लंघन का है, बल्कि एक सैनिक के सम्मान और उसके परिवार के हक को कुचलने का भी प्रतीक है।
*जमीन पर कब्जे का चौंकाने वाला खुलासा*
स्वर्गीय मनोहरलाल की पांच एकड़ जमीन पातालनागर लालपानी नाला के पास स्थित है, जहां से हजारों लोग रोजाना लोहा पुल के रास्ते आना-जाना करते हैं। इस जमीन का पट्टा पीड़ित परिवार ने दिखाया, जो उनके स्वामित्व का स्पष्ट प्रमाण है। परिवार का कहना है कि इस जमीन पर पहले एक कच्चा रास्ता था, जिसका उपयोग ग्रामीण आने-जाने के लिए करते थे। लेकिन NMDC ने बिना उनकी अनुमति या जानकारी के इस जमीन पर पक्की RCC सड़क का निर्माण कर लिया। इस सड़क का उपयोग अब AMNS कंपनी और पालनार क्षेत्र की ओर जाने के लिए हो रहा है।
परिवार ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान बिजली के खंभे लगाए गए, जिससे उनकी जमीन का एक हिस्सा पूरी तरह बर्बाद हो गया। अब वे इस जमीन का किसी भी कार्य के लिए उपयोग नहीं कर सकते। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों ने उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है, और इस मामले में न्यायालय का आदेश होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
*न्यायालय का आदेश और सरकारी उदासीनता*
पीड़ित परिवार ने वर्षों तक दंतेवाड़ा के न्यायालय में अपनी जमीन को वापस पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। अंततः, न्यायालय ने अतिक्रमणकारियों को सात दिनों के भीतर जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया था। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह आदेश लागू नहीं हुआ। परिवार का कहना है कि वे अब भी सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि NMDC जैसी प्रतिष्ठित कंपनी ने भी बिना मुआवजे या अनुमति के सैनिक की जमीन पर सड़क बना ली। यह सवाल उठता है कि क्या एक सरकारी कंपनी को इस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार है? क्या एक भूतपूर्व सैनिक के परिवार को उनके हक के लिए इस तरह तिरस्कृत किया जाना उचित है?
*परिवार का दर्द और सिस्टम की नाकामी*
स्वर्गीय मनोहरलाल ने देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया, लेकिन आज उनका परिवार अपनी ही जमीन के लिए दर-दर भटक रहा है। परिवार ने CG संविधान न्यूज़ से बातचीत में बताया कि वे बार-बार तहसील, कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। परिवार का कहना है, “हमारी जमीन पर न केवल स्थानीय लोगों ने कब्जा किया, बल्कि NMDC ने भी हमारी जमीन छीन ली। हमारी जमीन पर बनी सड़क और बिजली के खंभों ने हमारी जमीन को बेकार कर दिया। हम चाहकर भी अब उसका उपयोग नहीं कर सकते।”
*क्या है कानूनी स्थिति?*
भारत में भूमि अतिक्रमण से संबंधित मामले राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के दायरे में आते हैं। छत्तीसगढ़ में शासकीय पड़ और गैरान जमीन पर अतिक्रमण को नियमित करने के लिए कुछ प्रावधान मौजूद हैं, जैसे कि शासन निर्णय दिनांक 04/04/2002, जिसमें अतिक्रमण को नियमित करने के लिए दंड राशि जमा करने की बात कही गई है। लेकिन इस मामले में, परिवार का दावा है कि उनकी जमीन निजी स्वामित्व वाली है और इसके बावजूद उस पर कब्जा किया गया है।
न्यायालय के आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने में देरी और NMDC जैसी कंपनी द्वारा बिना मुआवजे के सड़क निर्माण जैसे मामले गंभीर प्रश्न उठाते हैं। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि एक भूतपूर्व सैनिक के परिवार के साथ अन्याय भी है।
*सैनिक कल्याण की स्थिति*
छत्तीसगढ़ में सैनिक कल्याण के लिए संचालनालय मौजूद है, जो भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए कार्य करता है। लेकिन इस मामले में, ऐसा प्रतीत होता है कि सैनिक कल्याण विभाग ने भी इस परिवार की कोई मदद नहीं की। यह सवाल उठता है कि क्या सैनिक कल्याण के नाम पर बनी संस्थाएं वास्तव में पीड़ित सैनिक परिवारों के लिए काम कर रही हैं?
*क्या मिलेगा परिवार को न्याय?*
यह मामला न केवल स्वर्गीय मनोहरलाल के परिवार की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे सिस्टम की उदासीनता और रसूखदारों की ताकत के आगे आम लोग बेबस हो जाते हैं। NMDC जैसी नवरत्न कंपनी का इस तरह बिना अनुमति सड़क निर्माण करना न केवल कानूनी उल्लंघन है, बल्कि यह एक भूतपूर्व सैनिक के परिवार के प्रति घोर असम्मान भी है।
स्थानीय प्रशासन और NMDC को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। परिवार को उनकी जमीन का मुआवजा या उचित कानूनी समाधान दिया जाना चाहिए। साथ ही, न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करते हुए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को तेज करना होगा।
*निष्कर्ष* स्वर्गीय मनोहरलाल के परिवार की यह कहानी दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्र में सिस्टम की नाकामी और रसूखदारों की मनमानी को उजागर करती है। एक भूतपूर्व.soldier के परिवार को अपनी ही जमीन के लिए इस तरह भटकना पड़े, यह न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह देश के उन नायकों के प्रति समाज और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाता है, जिन्होंने देश की सेवा में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। क्या यह परिवार कभी अपनी जमीन और सम्मान वापस पा सकेगा, या फिर सरकारी अमला और रसूखदारों की ताकत के आगे उनकी आवाज दबकर रह जाएगी? यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
*सुझाव:* इस मामले को और गंभीरता से उठाने के लिए पीड़ित परिवार को सैनिक कल्याण विभाग, स्थानीय विधायक, और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से संपर्क करना चाहिए। साथ ही, इस मुद्दे को सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से प्रचारित करने से भी दबाव बन सकता है।


