*किरंदुल में बीजेपी के निष्कासन और त्यागपत्र विवाद: मीरा तिवारी ने मंडल अध्यक्ष विजय सोढ़ी पर उठाए सवाल*
छत्तीसगढ़ के किरंदुल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मंडuल अध्यक्ष विजय सोढ़ी द्वारा मीरा तिवारी के निष्कासन की घोषणा के बाद एक नया विवाद सामने आया है। मीरा तिवारी ने इस निष्कासन को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं और बीजेपी मंडल अध्यक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। तिवारी का दावा है कि उन्होंने 31 जनवरी 2025 को ही पार्टी के सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया था, जिसकी जानकारी विभिन्न अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक भी की गई थी। ऐसे में, 6 फरवरी 2025 को उनका निष्कासन कैसे हो सकता है? तिवारी ने सवाल किया कि जब किसी ने स्वयं त्यागपत्र दे दिया हो, तो उसका त्यागपत्र स्वीकार या अस्वीकार होता है, न कि निष्कासन।
*मीरा तिवारी का पक्ष और सवाल*
मीरा तिवारी ने मंडल अध्यक्ष विजय सोढ़ी से कई तीखे सवाल पूछे हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
*1:-निष्कासन की वैधता:*
तिवारी ने कहा कि जब उन्होंने पहले ही सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया था, तो निष्कासन की घोषणा का क्या आधार है?
उन्होंने मांग की कि इस पर मंडल अध्यक्ष स्पष्ट जवाब दें।
*2:-जमीन विवाद पर सफाई:* विजय सोढ़ी ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि किरंदुल के जमीन विवाद में कोई भी बीजेपी कार्यकर्ता शामिल नहीं है। तिवारी ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए मांग की कि बीजेपी मंडल कार्यकारिणी की सूची का अवलोकन किया जाए ताकि यह स्पष्ट हो कि क्या वाकई कोई बीजेपी कार्यकर्ता इस विवाद में शामिल नहीं है।
*3:-मारपीट का वीडियो और कार्रवाई:* तिवारी ने बंगाली कैंप के सरस्वती शिशु मंदिर में एक शिक्षक के साथ मारपीट के वायरल वीडियो का जिक्र किया। इस वीडियो में कथित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ता शामिल थे। तिवारी ने सवाल उठाया कि इस मामले में पार्टी ने अब तक क्या कार्रवाई की और किन लोगों को निष्कासित किया गया? उन्होंने यह भी पूछा कि किसके दबाव में इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई।
*4:- पार्टी की चुप्पी:* तिवारी ने बीजेपी की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के गंभीर मुद्दों पर पार्टी नेताओं का कोई बयान न आना उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने पूछा कि क्या केवल चुनाव लड़ने वालों को ही निष्कासित किया जाएगा, जबकि अन्य गलत काम करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
*विश्लेषण: निष्कासन बनाम त्यागपत्र*
मीरा तिवारी के दावों ने बीजेपी की स्थानीय इकाई में नेतृत्व और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। तिवारी का तर्क है कि जब उन्होंने स्वेच्छा से सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया था, तो निष्कासन की घोषणा केवल राजनीतिक नाटक हो सकता है। यह सवाल उठता है कि क्या यह कदम तिवारी की छवि को नुकसान पहुंचाने या स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
जमीन विवाद और मारपीट के मामले में तिवारी द्वारा उठाए गए सवाल बीजेपी की स्थानीय इकाई की कार्यशैली पर भी प्रकाश डालते हैं। यदि कार्यकारिणी सदस्यों की सूची में कोई नाम सामने आता है या मारपीट के वीडियो में बीजेपी कार्यकर्ताओं की संलिप्तता सिद्ध होती है, तो यह पार्टी के लिए एक बड़ा विवाद बन सकता है। तिवारी ने यह भी इंगित किया कि इन मामलों में कार्रवाई की कमी बीजेपी की आंतरिक जवाबदेही और अनुशासन पर सवाल उठाती है।
*निष्कर्ष* मीरा तिवारी द्वारा उठाए गए सवाल न केवल किरंदुल बीजेपी मंडल के लिए बल्कि पार्टी की व्यापक छवि के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। यह मामला पार्टी के भीतर पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन की कमी को उजागर करता है। तिवारी का यह बयान कि “क्या केवल चुनाव लड़ने वालों का ही निष्कासन होगा?” बीजेपी के सामने एक नैतिक सवाल खड़ा करता है। अब यह देखना होगा कि मंडल अध्यक्ष विजय सोढ़ी और बीजेपी की स्थानीय इकाई इन आरोपों का जवाब कैसे देती है। इस मामले में आगे की प्रेस वार्ता या आधिकारिक बयान से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

