बस्तर पंडुम 2025, जो दंतेवाड़ा जिले के कन्या स्कूल मैदान में आयोजित किया जा रहा है, एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उत्सव है।
यह बस्तर की जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया गया एक बड़ा आयोजन है।
इसकी तैयारियों के लिए जिले भर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जो इसकी व्यापक प्रचार-प्रसार रणनीति का हिस्सा हैं। यह आयोजन संभाग स्तर पर 1 से 3 अप्रैल तक चला और अब तृतीय चरण में प्रवेश कर चुका है,
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का 5 अप्रैल को बस्तर पंडुम में शामिल होने और माँ दंतेश्वरी के दर्शन करने का कार्यक्रम भी इस आयोजन को और महत्वपूर्ण बना रहा है।
*माँ दंतेश्वरी मंदिर के सजावट में कमी*
जब माँ दंतेश्वरी मंदिर को हर साल भव्य रूप से सजाया जाता था, इस बार साज-सज्जा में कमी दिख रही है। मुख्य मार्ग पर स्वागत द्वार, टेंट, छाया और फूलों की सजावट जैसी व्यवस्थाएँ, जो पहले पदयात्रियों के लिए की जाती थीं, इस बार नदारद हैं।
साथ ही, बस्तर पंडुम के होर्डिंग्स में माँ दंतेश्वरी की तस्वीर का न होना भी आपके लिए आश्चर्य और निराशा का कारण बना है, क्योंकि वे बस्तर की आराध्य देवी हैं।यह संभव है कि जिला प्रशासन और मंदिर समिति का ध्यान इस बार बस्तर पंडुम के आयोजन पर केंद्रित हो गया हो, जिसके चलते मंदिर की पारंपरिक सजावट और नवरात्रि से जुड़ी अन्य तैयारियों में कमी आई हैं । बस्तर पंडुम एक नया और बड़ा आयोजन है, जिसमें सरकार की ओर से व्यापक संसाधन और प्रयास लगाए जा रहे हैं। अमित शाह के दौरे की तैयारियों ने प्रशासन की प्राथमिकताओं को प्रभावित किया हो। हालाँकि, यह कहना मुश्किल है कि यह जानबूझकर किया गया भेदभाव है या केवल संसाधनों और समय की सीमाओं का परिणाम है।माँ दंतेश्वरी बस्तर की संस्कृति और आस्था का अभिन्न हिस्सा हैं, और उनकी उपेक्षा का कोई इरादा शायद प्रशासन का नहीं रहा होगा। फिर भी, नवरात्रि का समय भक्तों के लिए विशेष होता है, और मंदिर की सजावट व व्यवस्था उस उत्साह का हिस्सा होती है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति से स्पष्टीकरण या ध्यान देने की अपेक्षा की जा सकती है, ताकि भविष्य में आस्था और सांस्कृतिक आयोजनों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
*मंदिर समिति में कौन-कौन हैं?*
माँ दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा का प्रबंधन एक मंदिर समिति या ट्रस्ट के अधीन होता है, जिसे स्थानीय प्रशासन और परंपराओं के अनुसार गठित किया जाता है। हालांकि, इस समिति के सदस्यों की नवीनतम और आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से आसानी से उपलब्ध नहीं है, क्योंकि यह जानकारी आमतौर पर स्थानीय स्तर पर मंदिर प्रबंधन या जिला प्रशासन द्वारा ही रखी जाती है। सामान्य तौर पर, ऐसे मंदिरों की समिति में निम्नलिखित लोग शामिल हो सकते हैं:
*प्रधान पुजारी:*
मंदिर के मुख्य धार्मिक कार्यों की देखरेख करने वाला, जैसे हरेंद्र नाथ ठाकुर, जिनका नाम कुछ स्रोतों में मंदिर के प्रधान पुजारी के रूप में उल्लेखित है।स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि: दंतेवाड़ा जिला प्रशासन से कोई अधिकारी, जैसे कलेक्टर या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति, जो सरकारी स्तर पर समन्वय करता हो।स्थानीय समुदाय के गणमान्य व्यक्ति: बस्तर क्षेत्र के आदिवासी समुदाय या प्रभावशाली लोग, जो मंदिर की परंपराओं और संस्कृति से जुड़े हों।
*ट्रस्ट के सदस्य:*
कुछ नामित सदस्य जो मंदिर के रखरखाव, आयोजन और दान के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होते हैं।सटीक नाम और पद जानने के लिए दंतेवाड़ा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट (dantewada.nic.in) या मंदिर के स्थानीय कार्यालय से संपर्क करना होगा। चूँकि आज 3 अप्रैल 2025 है, और बस्तर पंडुम का आयोजन अभी चल रहा है, हो सकता है कि समिति के सदस्य इस समय व्यस्त हों या उनकी जानकारी अपडेट न हुई हो।सजावट में ध्यान क्यों नहीं दिया गया
चैत्र नवरात्रि में माँ दंतेश्वरी मंदिर की सजावट में कमी दिखी—न तो लाइट्स, न फूल, न ही टेंट की व्यवस्था हुई, जैसा कि हर साल होता था। इसके पीछे कुछ संभावित कारण हो सकते हैं:
*बस्तर पंडुम पर ध्यान केंद्रित होना*
: इस समय दंतेवाड़ा में बस्तर पंडुम 2025 का आयोजन चल रहा है, जो 1 से 3 अप्रैल तक संभाग स्तर पर हुआ और अब तृतीय चरण में है। यह एक बड़ा सांस्कृतिक उत्सव है, जिसमें जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय की पूरी ऊर्जा लगी हुई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 5 अप्रैल को दौरे की तैयारी ने भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया होगा। संभव है कि मंदिर समिति और प्रशासन के संसाधन इस आयोजन में लग गए हों, जिससे मंदिर की सजावट पर कम फोकस रहा।
*संसाधनों की कमी या प्राथमिकता में बदलाव*
बस्तर पंडुम के लिए बड़े-बड़े होर्डिंग्स और प्रचार-प्रसार पर खर्च हुआ । यह संकेत देता है कि बजट और मानव संसाधन का बड़ा हिस्सा उस ओर गया हो। मंदिर की सजावट, जो हर साल टेंट, लाइट्स और फूलों से होती थी, इस बार शायद प्राथमिकता में पीछे छूट गई।
*समन्वय की कमी*
मंदिर समिति और जिला प्रशासन के बीच तालमेल में कमी हो सकती है। अगर समिति ने सजावट की जिम्मेदारी प्रशासन पर छोड़ी और प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, तो यह स्थिति बन सकती है। यह भी संभव है कि समिति के कुछ सदस्य बस्तर पंडुम की तैयारियों में शामिल रहे हों।
*परंपरा से हटकर व्यस्तता*
चैत्र नवरात्रि में मंदिर को सजाने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार अमित शाह के दर्शन और बस्तर पंडुम जैसे बड़े आयोजन ने शायद मंदिर समिति का ध्यान भटकाया हो। होर्डिंग्स में माँ दंतेश्वरी की तस्वीर नहीं थी, जो यह दर्शाता है कि आयोजन का फोकस सांस्कृतिक प्रदर्शन पर था, न कि धार्मिक पहलू
बस्तर में माँ दंतेश्वरी की आस्था बहुत गहरी है, लेकिन इस बार शायद लोग भी उत्सव की तैयारियों में व्यस्त

