नगरपालिका परिषद किरंदुल नियमानुसार अगले वित्तीय वर्ष का बजट 31 मार्च से पहले पास होना चाहिए था पर अबतक क्यों नहीं हुआ:-नगरपालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी 
इसके बावजूद, मुख्य नगरपालिका अधिकारी से तीन बार पूछने पर केवल मौखिक आश्वासन मिला, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही, 7 मार्च को शपथ ग्रहण के बाद भी न तो योजना और कार्यान्वयन समिति (PIC) की बैठक हुई और न ही परिषद की बैठक, जिसका कारण समझ से परे है।
आखिर मुख्य नगरपालिका अधिकारी बैठकें क्यों नहीं बुला रहे हैं।बजट पास करने की समय-सीमा भारत में नगरपालिकाएँ राज्य-विशिष्ट कानूनों द्वारा संचालित होती हैं, लेकिन संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत कुछ सामान्य सिद्धांत लागू होते हैं। यह अधिनियम शहरी स्थानीय निकायों को मजबूत करने के लिए बनाया गया था और इसमें नगरपालिकाओं को अपने बजट को वार्षिक रूप से तैयार करने और पास करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सामान्यतः, वित्तीय वर्ष जो 1 अप्रैल से शुरू होता है, उससे पहले बजट पास करना अनिवार्य होता है। इस मामले में, उपाध्यक्ष का यह कहना सही है कि बजट 31 मार्च से पहले पास होना चाहिए था। ऐसा न होने से परिषद की कार्यप्रणाली और नागरिकों को सेवाएँ प्रदान करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।मुख्य नगरपालिका अधिकारी की भूमिका मुख्य नगरपालिका अधिकारी का पद प्रशासनिक होता है, जो परिषद के दैनिक कार्यों की देखरेख करता है। वहीं, परिषद, जो अध्यक्ष या उपाध्यक्ष जैसे निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा संचालित होती है, नीतिगत निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार होती है, जिसमें बजट की मंजूरी भी शामिल है। नियमित रूप से परिषद की बैठकें आयोजित करना, अक्सर मासिक, आवश्यक होता है ताकि बजट और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सके। इस स्थिति में, मुख्य अधिकारी द्वारा बैठकें न बुलाना असामान्य और चिंताजनक है।
जवाबदेही से बचाव:
यह भी संभव है कि मुख्य अधिकारी पारदर्शिता की कमी या जिम्मेदारी से बचने के लिए बैठकें नहीं बुला रहे हों। केवल मौखिक आश्वासन देना इस ओर इशारा करता है।स्थिति का प्रभाव बजट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो परिषद की प्राथमिकताओं और वित्तीय योजनाओं को निर्धारित करता है। इसके पास होने में देरी से परिषद के कार्य, जैसे बुनियादी सेवाओं (पानी, सड़क, सफाई) का प्रबंधन, प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही, 7 मार्च से PIC और परिषद की बैठकें न होना इस बात का संकेत है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह ठप है, जो नागरिकों के हित में नहीं है।
किरंदुल नगरपालिका में अब तक नहीं हुआ बजट की कोई बैठक
किरंदुल नगरपालिका में बजट बैठक का न होना चिंता का विषय है। बजट बैठक एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें नगरपालिका आने वाले वर्ष के लिए अपनी वित्तीय योजनाएँ तैयार करती है। इसमें आय और व्यय का अनुमान लगाया जाता है और विकास कार्यों के लिए धनराशि आवंटित की जाती है। मगर अब तक कोई बजट बैठक नहीं हुई है, तो इसका मतलब है कि नगरपालिका के पास कोई स्पष्ट वित्तीय योजना नहीं है। यह स्थिति नगर के विकास और दैनिक कार्यों को प्रभावित कर सकती है।
2025 कैसे चलेगा नगरपालिका परिषद किरंदुल?
2025 में नगरपालिका परिषद का संचालन बिना बजट के बहुत मुश्किल हो सकता है। बजट के बिना, नगरपालिका को यह पता नहीं होगा कि उसके पास कितना धन उपलब्ध है और उसे कहाँ-कहाँ खर्च करना है। विकास कार्यों में रुकावट: सड़क निर्माण, जल आपूर्ति, स्वच्छता जैसी परियोजनाओं के लिए धनराशि की कमी हो सकती है।दैनिक सेवाओं पर असर: कर्मचारियों के वेतन, कचरा प्रबंधन, और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए भी धन की कमी हो सकती है।सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना: केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से धनराशि प्राप्त करने के लिए एक स्पष्ट बजट और योजना की जरूरत होती है। बिना बजट के यह संभव नहीं होगा।हालांकि, नगरपालिका अस्थायी रूप से पिछले साल के बजट या आपातकालीन फंड का उपयोग करके कुछ समय के लिए कार्य चला सकती है, लेकिन यह लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होगा।
1 वर्ष का बजट सत्र नहीं होने से क्या किरंदुल नगरपालिका में विकास कार्य होंगे?
एक वर्ष तक बजट सत्र का न होना विकास कार्यों पर गहरा असर डालेगा। बिना बजट के विकास कार्यों को शुरू करना या पूरा करना लगभग असंभव हो सकता है। इसके प्रभाव इस प्रकार होंगे:धनराशि की कमी: सड़कों की मरम्मत, नई परियोजनाएँ, या स्वच्छता जैसे कार्यों के लिए धन उपलब्ध नहीं होगा।कार्यों में देरी: बिना वित्तीय योजना के, पहले से शुरू किए गए प्रोजेक्ट भी रुक सकते हैं।नागरिक सुविधाओं पर असर: जल आपूर्ति, कचरा प्रबंधन, और स्वास्थ्य सेवाओं में कमी आ सकती है, जिससे निवासियों को परेशानी होगी।हालांकि, अगर नगरपालिका केंद्र या राज्य सरकार की योजनाओं से कुछ धनराशि प्राप्त कर लेती है, तो सीमित स्तर पर कुछ कार्य हो सकते हैं। लेकिन यह पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी एक बजट और स्पष्ट योजना की जरूरत होती है। इसलिए, बिना बजट सत्र के विकास कार्यों का होना बहुत मुश्किल है।

