*बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ के ऐतिहासिक चुनाव: 97.87% मतदान ने रचा नया कीर्तिमान, विरोधियों की ‘विभाजन की घिनौनी साजिश’ को ठुकराया!*

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*बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ के ऐतिहासिक चुनाव: 97.87% मतदान ने रचा नया कीर्तिमान, विरोधियों की ‘विभाजन की घिनौनी साजिश’ को ठुकराया!*

दंतेवाड़ा, 4 नवंबर 2025: दंतेवाड़ा जिले के व्यावसायिक हृदय बैलाडीला में आज एक ऐसा ऐतिहासिक चुनावी महासंग्राम समाप्त हुआ, जिसने न केवल स्थानीय व्यापारियों के बीच एकता की मिसाल कायम की, बल्कि पूरे क्षेत्र में लोकतंत्र की जीत का प्रतीक रचा। बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ (BVKS) के इस चुनाव में कुल 463 मतदाताओं में से 453 ने अपने मताधिकार का भरपूर उपयोग किया, जो 97.87% का अभूतपूर्व मतदान प्रतिशत है। यह आंकड़ा न केवल संघ के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ता है, बल्कि यह दर्शाता है कि जब एकता पर संकट आता है, तो समाज की आत्मा जागृत हो जाती है। तीन पैनलों और एक स्वतंत्र अध्यक्ष उम्मीदवार के बीच चले इस मुकाबले ने साबित कर दिया कि बैलाडीला के व्यापारी न तो विभाजन की चालों में फंसते हैं और न ही लोकतंत्र को कमजोर होने देते हैं।

यह चुनाव महज एक संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का प्रतीक बन गया। कुल मतदाताओं में से मात्र 10 वोट अनुपस्थित रहे, जिनमें से 7 वे थे जो हाल ही में संघ को तोड़ने की कुटिल कोशिश में लगे हुए थे। कुछ दिनों पहले एक गिरोह ने BVKS को दो भागों में बांटने की नीच और घिनौनी साजिश रची थी, जिसकी पूरी बैलाडीला ने एकजुट होकर निंदा की। ये विभाजनकारी तत्व, जो ‘एक समाज, एक परिवार, एक संघ’ के सिद्धांत को कलंकित करने पर तुले हुए थे, अपनी असफलता से लज्जित हो गए। उच्च मतदान ने इन विरोधियों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ दिया—यह साबित करते हुए कि बैलाडीला के व्यापारी न तो उनकी चालाकियों का शिकार बनेंगे और न ही अपनी एकजुटता को दांव पर लगाएंगे। यह हार न केवल व्यक्तिगत, बल्कि एक नैतिक पराजय है, जो ऐसी नीच हरकतों को हमेशा के लिए सबक सिखाती है।

*97.87% मतदान का गहन विश्लेषण: लोकतंत्र की अपार ऊर्जा का प्रमाण*

यह मतदान प्रतिशत कोई संयोग नहीं, बल्कि BVKS की मजबूत जड़ों और सदस्यों की जागरूकता का प्रतिबिंब है। सामान्य चुनावों में जहां 60-70% मतदान को भी सफल माना जाता है, वहां 97.87% का आंकड़ा एक चमत्कारिक उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि:

जागरूकता का स्तर: लगभग सभी सदस्यों ने संघ की एकता को खतरे में देखकर सक्रिय भागीदारी निभाई, जो सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल है।

विरोध का प्रतीक: 10 अनुपस्थित वोटों में विरोधी तत्वों की भूमिका ने उल्टा उनके खिलाफ माहौल बनाया, जिससे शेष मतदाताओं में उत्साह दोगुना हो गया।

भविष्य की दिशा: इतना ऊंचा मतदान न केवल संघ को मजबूत बनाता है, बल्कि दंतेवाड़ा जैसे दूरदराज क्षेत्रों में भी लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रेरित करेगा। यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनेगा, जो ग्रामीण भारत की राजनीतिक परिपक्वता को उजागर करता है।

चुनाव की समाप्ति के बाद शाम 5 बजे शुरू हुई मतगणना ने पूरे क्षेत्र को सांसें थामने पर मजबूर कर दिया। कुल 9 दौर में 50-50 वोटों की गिनती की गई, जहां हर दौर में टक्कर इतनी कड़ी थी कि किसी भी उम्मीदवार को एकतरफा बढ़त नजर नहीं आई। अंतिम दौर तक सस्पेंस चरम पर था—लोगों को अंतिम घड़ी तक जीत का इंतजार करना पड़ा। खासकर उपाध्यक्ष पद पर दोनों उम्मीदवारों को समान 135 वोट मिले, जिसके बाद संचालन समिति और चुनाव अधिकारी ने सिक्का उछालकर फैसला सुनाया। यह निष्पक्षता का प्रतीक था, जो BVKS की पारदर्शिता को रेखांकित करता है।

*विजयी उम्मीदवार: नई शुरुआत का संदेश*

इस ऐतिहासिक मुकाबले के विजेता इस प्रकार हैं, जो संघ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा करते हैं:

पद विजेता का नाम

ध्यक्ष  संदीप साव

उपाध्यक्ष सुभाष हलदर

उपाध्यक्ष अनिशा प्रदीप संकरण

कोषाध्यक्ष के रघु राव

सचिव साहिल छालिवाल

सह-सचि वबप्पी मजूमदार

सह-सचिव संदीप गुप्ता

ये विजेता न केवल योग्य हैं, बल्कि वे BVKS की एकता और विकास की प्रतीक हैं। अध्यक्ष संदीप साव ने जीत के बाद कहा, “यह जीत पूरे संघ की है। हम विभाजन की किसी भी कोशिश को नाकाम करेंगे और बैलाडीला को व्यापारिक केंद्र के रूप में चमकाएंगे।”

BVKS का यह चुनाव दंतेवाड़ा के लिए एक नई शुरुआत है—जहां लोकतंत्र की जीत ने नफरत को हरा दिया। यह साबित करता है कि जब समाज एकजुट होता है, तो कोई साजिश सफल नहीं हो सकती। बैलाडीला के व्यापारी अब नई ऊर्जा से लैस हैं, और आने वाले दिनों में संघ के विकास से क्षेत्र की समृद्धि सुनिश्चित होगी। जय बैलाडीला, जय एकता!

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