*बस्तर ओलंपिक की चमक पर साया: धुरली के मासूम छात्रों का पिकअप हादसा, प्रशासन की लापरवाही ने उजागर की सुरक्षा की पोल*
दंतेवाड़ा, 4 नवंबर 2025 (सीजी संविधान न्यूज विशेष): बस्तर ओलंपिक भांसी में खेल की धूम मचाने जा रहे धुरली के छात्र-छात्राओं का सपना एक क्रूर हादसे में दर्द में बदल गया। एक पिकअप वाहन में ठूंसकर ले जाए जा रहे दर्जनों मासूमों की चीखें आज सुबह दंतेवाड़ा के कुआकोंडा मार्ग पर गूंजीं, जब वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। सीजी 18आर 5013 नंबर की इस पिकअप में 20 से अधिक छात्र सवार थे, जो खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित थे। हादसे में दर्जनों छात्र घायल हो गए, जिनमें से एक की उंगलियां बुरी तरह चपेट में आ गईं। NMDC अपोलो अस्पताल में चल रहे इलाज के बीच सवाल उठ रहे हैं—क्या जिला प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है? और इस लापरवाही के जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होगी?
*हादसे की दर्दनाक तस्वीर: ठूंसकर ले जाए जा रहे थे बच्चे*
सुबह करीब 8 बजे धुरली से रवाना हुई पिकअप में छात्रों को ऐसी असुरक्षित स्थिति में बिठाया गया था मानो वे कोई माल हो। वाहन की क्षमता से कहीं अधिक सवार होने के कारण ओवरलोडिंग ने हादसे को न्योता दिया। तेज रफ्तार और खराब सड़क की वजह से वाहन कुआकोंडा के पास पलट गया, जिससे छात्रों के शरीर आपस में उलझ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पिकअप के पलटते ही मासूमों की चीखें आसमान छूने लगीं। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत सहायता पहुंचाई,
घायलों को तत्काल NMDC अपोलो अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि सभी के एक्स-रे चल रहे हैं। एक छात्र की उंगलियां बुरी तरह प्रभावित हैं, जबकि अन्य में मामूली से गंभीर चोटें हैं। अस्पताल स्रोतों के अनुसार, स्थिति स्थिर है, लेकिन पूर्ण रिपोर्ट आने में समय लगेगा। परिवारजन अस्पताल के बाहर बेचैन नजर आ रहे हैं, जो बार-बार प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।
*प्रशासन की लापरवाही: सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़*
यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की गंभीर लापरवाही का नंगा चेहरा है। बस्तर ओलंपिक जैसे बड़े आयोजन में छात्रों को भाग लेने के लिए भेजना तो प्रशंसनीय है, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर क्या कोई योजना थी?
ओवरलोडिंग की अनदेखी: पिकअप वाहन को माल ढुलाई के लिए डिजाइन किया गया है, न कि स्कूली बच्चों के परिवहन के लिए। फिर भी, शिक्षा विभाग या खेल प्रकोष्ठ ने इसे मंजूरी दी। क्या वाहन की फिटनेस चेक हुई? क्षमता से दोगुने सवारों को ठूंसना बच्चों के जीवन से खिलवाड़ क्यों?
परिवहन व्यवस्था का अभाव: जिले में स्कूल बसों या सुरक्षित वाहनों की कमी क्यों? ग्रामीण क्षेत्रों से शहर तक के सफर के लिए ऐसी असुरक्षित व्यवस्था क्यों अपनाई जाती है? पिछले साल भी दंतेवाड़ा में इसी तरह के हादसों में ग्रामीण घायल हुए थे, लेकिन सबक नहीं लिया गया
*बस्तर ओलंपिक: खेल का उत्सव या सुरक्षा का सवाल?*
बस्तर ओलंपिक भांसी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय प्रयास है। यहां सैकड़ों छात्र खेल के माध्यम से नई उम्मीदें पाल रहे हैं। लेकिन अगर परिवहन जैसी बुनियादी सुरक्षा न दी जाए, तो यह उत्सव एक त्रासदी बन जाता है। राज्य सरकार ने हाल ही में ‘सुरक्षित स्कूल अभियान’ की घोषणा की थी, लेकिन जमीनी स्तर पर क्या अमल हो रहा है? यह हादसा चेतावनी है—बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता न दी गई तो खेल का सपना दर्द बन जाएगा।
*अपील: कार्रवाई हो, न्याय मिले*
सीजी संविधान न्यूज की ओर से जिला प्रशासन से मांग है:
सभी घायल छात्रों का मुफ्त और त्वरित इलाज सुनिश्चित करें।
ओवरलोडिंग और असुरक्षित परिवहन के जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई करें।
भविष्य के आयोजनों के लिए सुरक्षित बसों की व्यवस्था करें।
हादसे की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करें।
परिवारजन कहते हैं, “हमारे बच्चे खेलने गए थे, लेकिन लापरवाही ने उन्हें चोट दी। न्याय मिलना चाहिए।” बस्तर के इन मासूमों की आवाज दबने न पाए। क्या प्रशासन सुन रहा है?

