*बैलाडीला में ओणम का हर्षोल्लास: केरला समाज की सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय एकता का प्रतीक*
किरंदुल, छत्तीसगढ़ (2 नवंबर 2025): दक्षिण भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और छत्तीसगढ़ की आदिवासी आस्था का अनोखा संगम बैलाडीला में देखने को मिला, जब केरला समाज ने ओणम त्योहार को बड़े उत्साह के साथ मनाया। ओणम, जो केरल का राष्ट्रीय त्योहार है, महान राजा महाबली की कथा पर आधारित है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के वामन अवतार ने महाबली से तीन पग भूमि मांगी थी, और उनकी उदारता के सम्मान में हर साल वे अपने प्रजा से मिलने आते हैं। यह फसल उत्सव समृद्धि, खुशी और सामुदायिक एकता का प्रतीक है, जो नए चावल की फसल (छत्तीसगढ़ में ‘नवा खानी’ के रूप में जाना जाता है) की खुशी को दर्शाता है। 10 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में पारंपरिक नृत्य, सर्प नौका दौड़, पुष्प सज्जा (पुक्कलम) और स्वादिष्ट साध्या भोज का आनंद लिया जाता है।
बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ समुदाय के बीच यह उत्सव न केवल सांस्कृतिक विविधता का उत्सव था, बल्कि स्थानीय एकता का भी प्रतीक बन गया। बैलाडीला व्यपारी कल्याण संघ (बीवीकेएस), जो किरंदुल क्षेत्र के व्यापारियों का प्रमुख संगठन है और क्षेत्रीय विकास व सामाजिक कल्याण में सक्रिय भूमिका निभाता है, ने इस अवसर पर केरला समाज को विशेष सम्मान प्रदान किया। संघ की संचालन समिति ने ओणम की बधाई देते हुए केरला समाज को मां दंतेश्वरी का छायाचित्र भेंट किया। मां दंतेश्वरी, दंतेवाड़ा स्थित प्राचीन शक्ति पीठ की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो 14वीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर में विराजमान हैं। यह 52 शक्ति पीठों में से एक है, जहां सती के दांत के गिरने की कथा जुड़ी हुई है। बस्तर की कुलदेवी मां दंतेश्वरी आदिवासी संस्कृति का अभिन्न अंग हैं और बस्तर दशहरा का केंद्र बिंदु हैं। यह उपहार केरल की समृद्धि की कामना के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक शक्ति का आशीर्वाद प्रदान करता है, जो दोनों संस्कृतियों के मेलजोल को मजबूत करता है।
इस समारोह में एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रविंद्र नारायण भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। एनएमडीसी, जो बैलाडीला की लौह अयस्क खदानों का संचालन करने वाली भारत की प्रमुख कंपनी है, ने इस उत्सव में सक्रिय भागीदारी निभाई। श्री नारायण ने ओणम की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “ओणम जैसे त्योहार हमें सिखाते हैं कि समृद्धि तभी सच्ची होती है जब वह सबके साथ साझा की जाए। बैलाडीला जैसे क्षेत्र में विभिन्न संस्कृतियों का यह मेल हमें मजबूत बनाता है।” उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को औपचारिक गरिमा प्रदान की और स्थानीय व्यापार-उद्योग जगत के समर्थन को रेखांकित किया।
केरला समाज के सदस्यों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य-गान कर उत्सव को जीवंत बनाया, जबकि स्थानीय निवासियों ने ‘नवा खानी’ के व्यंजनों का लुत्फ उठाया। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम बना, बल्कि बैलाडीला क्षेत्र में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाला सकारात्मक कदम साबित हुआ। बीवीकेएस के अध्यक्ष ने बताया, “मां दंतेश्वरी का यह छायाचित्र ओणम की खुशी को स्थायी बनाने का प्रतीक है। हम भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करेंगे।”
ओणम का यह उत्सव साबित करता है कि त्योहार सीमाओं से परे होते हैं। जहां केरल की पौराणिक कथाएं खुशी बांटती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ की मां दंतेश्वरी शक्ति का आशीर्वाद देती हैं। बैलाडीला जैसे औद्योगिक क्षेत्र में यह सामुदायिक एकता एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

