*किरंदुल में बारिश के बीच दशहरा का जोश: 52 फीट का रावण पुतला जला, सुशासन दिवस पर शाकाहारी उत्सव की धूम*
किरंदुल/बचेली, 3 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के बैलाडीला क्षेत्र में दशहरा पर्व का उत्साह बारिश की बाधा को पार करते हुए चरम पर रहा। किरंदुल के रावण भाठा में 52 फीट ऊंचा रावण का पुतला 7 से 8 बजे के बीच तेज बारिश के बावजूद जलाया गया, जिसने बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश पूरे क्षेत्र में गूंजाया। दूसरी ओर, बचेली में 50 फीट का रावण पुतला एक दिन पहले तैयार होकर उत्सव का केंद्र बना। इस बार सुशासन दिवस (2 अक्टूबर) के अवसर पर प्रशासन की मांसाहारी भोजन पर रोक ने उत्सव को शाकाहारी रंग दिया, जिसे स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक अपनाया।
*बारिश में रावण दहन: किरंदुल का अटल जज्बा*
किरंदुल के फुटबाल ग्राउंड में आयोजित रावण दहन का कार्यक्रम बारिश की चुनौती के बावजूद निर्बाध रहा। शाम 7 बजे शुरू हुई बूंदाबांदी ने आयोजकों और दर्शकों का उत्साह कम नहीं किया। छतरियों और रेनकोट में सजे हजारों लोग ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ रावण दहन देखने पहुंचे। 8 बजे जैसे ही 52 फीट का पुतला आतिशबाजी के साथ धू-धू कर जला, आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी और तालियों की गड़गड़ाहट ने माहौल को यादगार बना दिया। स्थानीय निवासी ममता देवी ने कहा, “बारिश ने हमें नहीं रोका। यह दशहरा हमारे लिए एकता और श्रद्धा का प्रतीक है।”
*बचेली में भी 50 फीट का पुतला बना आकर्षण*
पड़ोसी बचेली में 50 फीट का रावण पुतला पहले ही तैयार कर लिया गया था, जो स्थानीय कारीगरों की मेहनत का नमूना है। बांस, कागज और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से बने इस पुतले ने रामायण की कथा को जीवंत किया। बचेली में भी रावण दहन का आयोजन भव्य रहा, जहां स्थानीय रामलीला समिति ने परंपरागत नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ उत्सव को और रंगीन बनाया।
*सुशासन दिवस की सौगात: शाकाहारी दशहरा*
2 अक्टूबर को गांधी जयंती के साथ सुशासन दिवस के अवसर पर प्रशासन ने मांसाहारी भोजन और विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसके चलते रावण भाठा और आसपास की दुकानें पहली बार पूरी तरह शाकाहारी रहीं। पनीर टिक्का, कचौड़ी, जलेबी, और हल्दी दूध जैसे व्यंजनों ने मेले में चार चांद लगाए। व्यापारी राजेश सिन्हा ने बताया, “शाकाहारी स्टॉल्स ने न केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखा, बल्कि परिवारों के लिए हेल्दी ऑप्शन्स भी दिए।” यह पहल स्थानीय लोगों के बीच अहिंसा और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश लेकर आई।
*सुरक्षा और व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम*
प्रशासन ने बारिश को देखते हुए विशेष तैयारियां की थीं। किरंदुल और बचेली में अग्निशमन दल, पुलिस बल और मेडिकल टीमें तैनात थीं। यातायात प्रबंधन और पार्किंग की व्यवस्था ने भीड़ को नियंत्रित रखा। एसडीएम किरंदुल ने कहा, “हमने बारिश के बावजूद सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल आयोजन सुनिश्चित किया। यह सामुदायिक सहयोग की जीत है।”
*बैलाडीला का दशहरा: एकता और उत्साह का प्रतीक*
बैलाडीला, जो अपनी खनन गतिविधियों के लिए जाना जाता है, में दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का उत्सव है। खनन श्रमिकों और उनके परिवारों ने इस अवसर पर एकजुट होकर परंपराओं को जीवंत रखा। रामलीला का समापन और रावण दहन का शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में होने से उत्सव की गरिमा और बढ़ गई।
यह दशहरा किरंदुल और बचेली के लिए एक ऐतिहासिक पल बन गया, जहां बारिश ने उत्साह को डिगा नहीं पाया। बुराई का अंत और अच्छाई की जीत का यह संदेश पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा लेकर आया है। स्थानीय लोग अब अगले साल के और भव्य आयोजन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

