*बैलाडीला में दशहरा की भव्य तैयारी पूरी: किरंदुल में 52 फीट का रावण पुतला, बचेली में 50 फीट का तैयार, सुशासन दिवस पर मांसाहारी बंद*
किरंदुल/बचेली, 2 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के खनिज समृद्ध क्षेत्र बैलाडीला में दशहरा पर्व की धूम शुरू हो चुकी है। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयादशमी के अवसर पर किरंदुल और बचेली में रावण दहन की तैयारियां जोरों पर हैं। किरंदुल के रावण भाठा में 52 फीट ऊंचा रावण का भव्य पुतला तैयार हो गया है, जबकि पड़ोसी बचेली में 50 फीट का पुतला एक दिन पहले ही सजाकर रखा गया है। फुटबाल ग्राउंड में रावण दहन की सारी व्यवस्था पूरी हो चुकी है, जहां हजारों श्रद्धालु एकत्रित होकर इस पर्व का आनंद लेंगे।
इस बार दशहरा की खासियत यह है कि 2 अक्टूबर गांधीजी के जन्मदिन के रूप में सुशासन दिवस के बीच मनाया जा रहा है। प्रशासन ने पहले ही घोषणा कर दी है कि पूरे क्षेत्र में मांसाहारी भोजन पूरी तरह बंद रहेगा। इसके चलते रावण भाठा और आसपास की दुकानें पहली बार बिना मांसाहारी स्टॉल के सजी हैं। खाने-पीने की पारंपरिक शाकाहारी दुकानें, मिठाई की दुकानें और अन्य स्ट्रीट फूड स्टॉल्स रंग-बिरंगे परिधानों में सजकर तैयार हैं, जो पर्यावरण अनुकूल और स्वास्थ्यप्रद उत्सव का संदेश दे रही हैं। स्थानीय निवासी रमेश साहू ने बताया, “यह बदलाव सराहनीय है। दशहरा अब न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बन गया है।”
*विशाल पुतलों की चमक-दमक और सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम*
किरंदुल के फुटबाल ग्राउंड में स्थापित 52 फीट ऊंचे रावण पुतले को देखने के लिए दूर-दूर से लोग उमड़ रहे हैं। पुतला बनाने में स्थानीय कारीगरों ने बांस, कागज और रंगों का बेहतरीन उपयोग किया है, जो रामायण की कथा को जीवंत कर रहा है। इसी तरह बचेली में 50 फीट का पुतला भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यातायात प्रबंधन, पार्किंग और अग्निशमन की व्यवस्था की है। एसडीएम किरंदुल ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि उत्सव शांतिपूर्ण और पर्यावरण हितैषी तरीके से संपन्न हो।”
*सुशासन दिवस पर विशेष संदेश: अहिंसा और शाकाहार का संयोजन*
गांधीजी के सिद्धांतों से प्रेरित होकर इस वर्ष का दशहरा अहिंसा और शाकाहार पर केंद्रित है। मांस विक्रेताओं को अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है, बल्कि पशु कल्याण और स्वास्थ्य जागरूकता को भी बढ़ावा दे रहा है। स्थानीय व्यापारियों ने इसे स्वागत योग्य बताया और शाकाहारी व्यंजनों की विविधता पर जोर दिया। एक दुकानदार ने कहा, “पनीर टिक्का, सब्जी चाट और हल्दी दूध जैसी चीजें इस बार मुख्य आकर्षण हैं।”
बैलाडीला क्षेत्र, जो लौह अयस्क उत्पादन के लिए जाना जाता है, में दशहरा न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि खनन श्रमिकों और परिवारों के लिए एकजुटता का प्रतीक भी। शाम को होने वाले रावण दहन के साथ ही रामलीला का समापन होगा, जो पूरे क्षेत्र में उत्साह भर देगा। पंचांग के अनुसार, रावण दहन का शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में है, जो इस पर्व को और भी विशेष बनाएगा।
यह दशहरा बैलाडीला को नई ऊर्जा देगा, जहां बुराई का अंत होते ही नई शुरुआत की कामना सब कर रहे हैं। उत्सव के दौरान मौसम भी सहयोगी बनेगा, जिससे परिवारों के साथ मनोरंजन का पूरा इंतजाम है।

