*किरंदुल वार्ड-8: मुख्य बाजार में महीनों से छाया अंधेरा, पार्षद पर बिजली तारों पर अतिक्रमण का गंभीर आरोप*
दंतेवाड़ा, 26 सितंबर 2025 (स्पेशल रिपोर्ट): छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 में स्थित मुख्य बाजार, जो शहर का व्यस्ततम व्यापारिक केंद्र है, पिछले कई महीनों से पूर्ण अंधेरे में डूबा हुआ है। गली लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे रात्रि में बाजार की सड़कें और गलियां खतरे से खाली नहीं। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि वार्ड पार्षद, जो खुद इसी बाजार में रहते हैं, इस समस्या की अनदेखी कर रहे हैं। इससे भी चौंकाने वाला दावा है कि पार्षद अपने निजी मकान निर्माण के दौरान बिजली के हवाई तारों पर ही अतिक्रमण कर चुके हैं, जो न केवल सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है, बल्कि गली लाइटों की मरम्मत को भी रोक रहा है। नवरात्रि का पर्व नजदीक होने के साथ ही हजारों श्रद्धालुओं के दुर्गा पूजा के लिए आने की उम्मीद है, लेकिन बाजार का यह अंधेरा न केवल व्यापार को प्रभावित कर रहा है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा को भी जोखिम में डाल रहा है।
*समस्या की जड़: मौखिक शिकायतों से जागे नहीं जनप्रतिनिधि*
किरंदुल के इस हृदय स्थल पर सैकड़ों परिवार निवास करते हैं, और बाजार में दर्जनों दुकानें हैं। स्थानीय निवासी रमेश साहू बताते हैं, “हमने कई बार पार्षद महोदय को मौखिक रूप से सूचित किया। सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो शेयर कर भी आवाज उठाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब लगता है कि लिखित शिकायत ही एकमात्र रास्ता बचेगा, ताकि ‘कुंभकर्ण नींद’ से जाग सकें।” एक अन्य व्यापारी, जो नाम न छापने की शर्त पर बोल रहे थे, ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “पार्षद जी का नया मकान बन रहा है। निर्माण के दौरान बिजली के तार, जो हवा में लटके हैं, उनकी दीवार के बीचों-बीच से गुजर रहे हैं। डर है कि तार दीवार से टकरा जाए तो हादसा हो सकता है। इसलिए गली लाइटों को ठीक कराने की बजाय, समस्या को अनदेखा किया जा रहा है। यह अतिक्रमण जमीन-मकान तक सीमित नहीं रहा, अब तो बिजली के तारों पर भी कब्जा हो गया!”
नगर पालिका के आंकड़ों के अनुसार, वार्ड-8 में कुल 15 गली लाइटें हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत खराब पड़ी हैं। यह समस्या पिछले छह महीनों से चली आ रही है, लेकिन आधिकारिक स्तर पर कोई सर्वे या मरम्मत का आदेश जारी नहीं हुआ। एक हफ्ते पहले ही, अगस्त में हुई भारी बारिश के दौरान इसी वार्ड में जलभराव की घटना ने व्यापारियों को लाखों का नुकसान पहुंचाया था, जो नगर पालिका की लापरवाही का एक और उदाहरण है।
*नवरात्रि से पहले आक्रोश: ‘अंधेरा नगरी, चौपट राजा’*
नवरात्रि का मौसम शुरू होने वाला है, जब किरंदुल और आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग दुर्गा पूजा के लिए बाजार घूमने आते हैं। अंधेरे में फिसलन भरी सड़कें और बिना रोशनी की गलियां महिलाओं और बच्चों के लिए खतरा बन सकती हैं। बाजार के निवासियों में पार्षद के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। एक स्थानीय महिला ने कहा, “हमारे जनप्रतिनिधि बाजार में ही रहते हैं, फिर भी हमारी परेशानी नहीं दिखती। क्या लिखित शिकायत के बाद ही नींद खुलेगी? यह तो वही पुरानी कहानी है—’अंधेरा नगरी, चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा’।”
विश्लेषण की दृष्टि से, यह घटना स्थानीय शासन व्यवस्था की गहरी खामियों को उजागर करती है। पार्षदों की जिम्मेदारी केवल चुनाव जीतने तक सीमित न होकर, वार्ड की बुनियादी सुविधाओं—जैसे बिजली, पानी और सड़क—की देखभाल तक फैली होनी चाहिए। बिजली तारों पर अतिक्रमण का आरोप यदि सिद्ध होता है, तो यह न केवल विद्युत विभाग के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग का भी मामला बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में नगर पालिका को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए, खासकर जब सोशल मीडिया पर शिकायतें वायरल हो रही हों।
*प्रशासन की चुप्पी: क्या होगा अगला कदम?*
विद्युत विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अतिक्रमण की शिकायत मिली तो जांच होगी, लेकिन स्थानीय स्तर पर समाधान पहले होना चाहिए।” निवासी अब जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचने की योजना बना रहे हैं। यदि तत्काल कार्रवाई न हुई, तो नवरात्रि के दौरान बाजार में कोई अनहोनी घटना हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
यह मुद्दा किरंदुल जैसे खनिज समृद्ध क्षेत्र में विकास की असमानता को भी रेखांकित करता है। जहां एक ओर एनएमडीसी जैसे संस्थान करोड़ों का निवेश कर रहे हैं, वहीं स्थानीय बाजार बुनियादी रोशनी से वंचित है। उम्मीद है कि यह खबर प्रशासन की नींद खोलेगी, ताकि वार्ड-8 का ‘अंधेरा’ जल्द ही उजाले में बदल जाए।
