*हेडिंग:- ग्राम पंचायत सियनमरा के कार्यवाहक सरपंच डोमार सिंह साहू ने रूपचंद जैन के लिए खंडन जारी कर ग्राम पंचायत के अधिकारों को बनाया मजाक*  

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*हेडिंग:- ग्राम पंचायत सियनमरा के कार्यवाहक सरपंच डोमार सिंह साहू ने रूपचंद जैन के लिए खंडन जारी कर ग्राम पंचायत के अधिकारों को बनाया मजाक*

बालोद:- ग्राम पंचायत का लेटर पैड सरकारी मान्यता प्राप्त दस्तावेज़ होता है, जिसका प्रयोग केवल पंचायत के कार्यों और प्रशासनिक पत्राचार के लिए किया जाना चाहिए। पंचायत अधिनियम और नियमों के अनुसार लेटर पैड का इस्तेमाल गांव की योजनाओं, विकास कार्यों, सरकारी निर्देशों, बैठकों की कार्यवाही या ग्रामीण हित में जारी सूचनाओं तक ही सीमित रहना चाहिए। लेकिन दुखद है कि हाल ही में इसके दुरुपयोग के मामले सामने आ रहे हैं।

ताज़ा उदाहरण ग्राम पंचायत सियनमरा का है, जहां के कार्यवाहक सरपंच डोमार सिंह साहू ने अपने लेटर पैड का उपयोग कर रूपचंद जैन नामक व्यक्ति के लिए खंडन जारी किया। यह कार्य पंचायत के संवैधानिक अधिकारों का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 43(2) में स्पष्ट है कि सरपंच केवल पंचायत कार्यों और पंचायत निधि से जुड़े मामलों पर निर्णय ले सकता है। इसी अधिनियम की धारा 85 कहती है कि ग्राम पंचायत का कार्य केवल सार्वजनिक और सामूहिक हित के लिए होगा। यदि कोई पदाधिकारी निजी स्वार्थ में अधिकारों का प्रयोग करता है, तो यह सीधा उल्लंघन है। यहां तक कि अधिनियम की धारा 95(1)(g) के तहत यदि सरपंच पद का दुरुपयोग करता है तो उसे हटाने तक की कार्रवाई संभव है।

कानूनी दृष्टिकोण से यह मामला गंभीर है। पंचायत का लेटर पैड आधिकारिक दस्तावेज़ है और यदि उसका उपयोग किसी व्यक्ति विशेष के बचाव में किया गया तो यह फर्जीवाड़ा, पद का दुरुपयोग और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ छल माना जाएगा।

गांव के स्तर पर भी इसके दूरगामी परिणाम हैं। एक ओर ग्रामीण जनता उम्मीद करती है कि पंचायत निष्पक्ष होकर सामूहिक हित में काम करेगी, वहीं इस तरह की हरकत से यह संदेश जाता है कि पंचायत किसी खास व्यक्ति की ढाल बन रही है। इससे ग्रामीणों के बीच अविश्वास और असंतोष की स्थिति पैदा होती है।

अतः यह स्पष्ट है कि सियनमरा पंचायत का यह कदम न केवल पंचायत राज अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की भी अवहेलना है। पंचायत के पदाधिकारियों को चाहिए कि वे अपने अधिकारों का इस्तेमाल केवल गांव और जनता के सामूहिक हित में करें, न कि किसी निजी व्यक्ति के बचाव या लाभ के लिए।

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