*बैलाडीला की खदानों पर लगी ‘नो एंट्री’ तख्ती: विश्वकर्मा जयंती पर सैलानियों की निराशा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को झटका*

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

*बैलाडीला की खदानों पर लगी ‘नो एंट्री’ तख्ती: विश्वकर्मा जयंती पर सैलानियों की निराशा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को झटका*

दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़, 17 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित बैलाडीला की प्राकृतिक सुंदरता और एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) की विशाल खदानों ने वर्षों से पर्यटकों को आकर्षित किया है। लेकिन इस वर्ष विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर एनएमडीसी परियोजना क्षेत्र में बाहरी लोगों के लिए पूर्ण प्रवेश निषेध के आदेश ने हजारों सैलानियों के सपनों पर पानी फेर दिया है। यह पहली बार है जब न केवल पर्यटक, बल्कि एनएमडीसी के कर्मचारी भी अपने परिजनों को अपनी निजी गाड़ियों से क्षेत्र की खूबसूरती दिखाने में असमर्थ हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर गहरी निराशा का माहौल है।

*विश्वकर्मा जयंती हमेशा से पर्यटकों का केंद्र रहा है।*

बैलाडीला, जो अपनी हरी-भरी वादियों, झरनों, घुमावदार घाटियों और ऊंचे पहाड़ों के कारण एक हिल स्टेशन जैसा आनंद प्रदान करता है, विश्वकर्मा जयंती पर हमेशा से पर्यटकों का केंद्र रहा है। छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना से आने वाले हजारों लोग यहां एनएमडीसी की खदानों का दीदार करने, 80 टन वजन ढोने वाले विशाल डम्परों और आधुनिक मशीनरी को नजदीक से देखने के लिए उमड़ आते थे। यह परंपरा दशकों पुरानी है, जहां सैलानी न केवल प्रकृति का लुत्फ उठाते थे, बल्कि खनन उद्योग की भव्यता से भी रूबरू होते थे। लेकिन इस बार जारी निषेध आदेश ने सभी योजनाओं पर ब्रेक लगा दिया। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया है, और जो पहले शहर को महानगरों जैसी चहल-पहल से भर देता था, वह अब शांतिपूर्ण लेकिन उदास नजर आ रहा है।

*प्रवेश प्रतिबंध का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर*

इस प्रवेश प्रतिबंध का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बाहरी सैलानियों के आने से स्थानीय व्यापारियों का कारोबार कई गुना बढ़ जाता था। सैकड़ों चार-पहिया वाहन, छह-पहिया बसें और पर्यटक समूह बाजारों को जीवंत बना देते थे। होटल, रेस्तरां, स्मृति चिन्ह विक्रेता और परिवहन सेवाओं को इससे भारी लाभ होता था। लेकिन इस वर्ष व्यापारियों को अपेक्षित भीड़ न मिलने से नुकसान की भरपाई मुश्किल लग रही है। एक स्थानीय व्यापारी ने बताया, “पिछले वर्षों में यह दिन हमारे लिए त्योहार जैसा होता था, लेकिन अब लगता है कि बैलाडीला की यह खूबसूरती सिर्फ यादों में रह जाएगी।”

*विश्वकर्मा जयंती, जो इंजीनियरों, कारीगरों और मशीनों के देवता भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है,*

एनएमडीसी जैसे खनन क्षेत्रों में विशेष महत्व रखती है। यहां कर्मचारी परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना करते हुए खदानों का दौरा करते थे, लेकिन इस बार यह उत्सव केवल औपचारिकता तक सिमट गया है। एनएमडीसी कर्मचारी अब अगरबत्ती जलाकर पूजा करेंगे, लेकिन क्षेत्र में प्रवेश निषेध की तख्ती हमेशा के लिए लगने की आशंका से सब चिंतित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से उठाया गया हो सकता है, लेकिन इससे सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधी परंपराओं पर असर पड़ा है। आने वाले वर्षों में यदि यह प्रतिबंध जारी रहा, तो बैलाडीला की खदानों का दीदार करना वाकई एक सपना बन सकता है।

*आगे की राह*

एनएमडीसी और स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मुद्दे पर विचार करें और वैकल्पिक व्यवस्था जैसे गाइडेड टूर्स या वर्चुअल टूर विकसित करें, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और आर्थिक हानि को रोका जा सके। फिलहाल, बैलाडीला की वादियां चुपचाप अपनी सुंदरता बयां कर रही हैं, लेकिन उनकी गूंज अब दूर तक नहीं पहुंच पा रही।

Leave a Comment

और पढ़ें

Buzz4 Ai

Read More Articles