*किरंदुल में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक: सुकूरू कैंप में व्यक्ति घायल, नगरपालिका की लापरवाही पर सवाल*

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*किरंदुल में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक: सुकूरू कैंप में व्यक्ति घायल, नगरपालिका की लापरवाही पर सवाल*

किरंदुल (छत्तीसगढ़), 06 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित किरंदुल शहर में आवारा कुत्तों की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। आज सुकूरू कैंप इलाके में एक व्यक्ति को आवारा कुत्ते ने गंभीर रूप से काट लिया, जिसके बाद घायल को लहूलुहान हालत में सरकारी अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से कुत्तों के काटने की घटनाएं रोजाना 3-4 तक पहुंच गई हैं, जो शहर में एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का संकेत दे रही हैं।

घटना की जानकारी देते हुए प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुकूरू कैंप में सुबह के समय एक व्यक्ति अपने दैनिक कार्य में व्यस्त था, तभी अचानक एक आवारा कुत्ते ने उसके पैर पर हमला कर दिया। हमले में व्यक्ति का पैर बुरी तरह जख्मी हो गया, और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार दिया। यह घटना किरंदुल में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक का ताजा उदाहरण है, जहां स्थानीय लोग अब घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि ये हमले अक्सर अंधेरे या कम व्यस्त इलाकों में हो रहे हैं।

*समस्या की जड़ें और बढ़ती घटनाएं*

किरंदुल, जो मुख्य रूप से NMDC की आयरन ओर माइनिंग के लिए जाना जाता है, एक औद्योगिक शहर है जहां आवारा कुत्तों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कचरा प्रबंधन की कमी, खुले में फेंके गए भोजन के अवशेष और पशु चारा की अनुपलब्धता के कारण कुत्तों की आबादी अनियंत्रित हो गई है। पिछले कुछ महीनों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जो रेबीज जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ऐसे हमलों से प्रभावित लोगों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है, लेकिन कई मामलों में समय पर उपचार न मिलने से स्थिति और बिगड़ सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह समस्या सिर्फ किरंदुल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में आवारा कुत्तों का मुद्दा एक राष्ट्रीय चुनौती बन चुका है। हाल के वर्षों में भारत भर में कुत्तों के हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। उदाहरण के लिए, हाल ही में उदयपुर में एक 5 साल के बच्चे पर तीन कुत्तों ने हमला किया867cf1, जबकि बेंगलुरु में एक 4 साल की बच्ची रेबीज से मौत का शिकार हुई38a591। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि आवारा कुत्तों की समस्या अब महानगरों से छोटे शहरों तक फैल चुकी है, और किरंदुल जैसे दूरदराज के इलाकों में यह और भी गंभीर है जहां चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं।

*नगरपालिका की लापरवाही: कोई कार्रवाई क्यों नहीं?*

स्थानीय लोगों का मुख्य आरोप किरंदुल नगरपालिका पर है, जो इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रही। निवासियों का कहना है कि कई शिकायतों के बावजूद कुत्तों को पकड़ने, स्टेरलाइजेशन या शेल्टर होम बनाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। इससे शहर में असंतोष बढ़ रहा है, और लोग अब सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की धमकी दे रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम रोजाना डर में जी रहे हैं, लेकिन प्रशासन सोया हुआ है। अगर जल्दी कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।”

यह लापरवाही तब और खलती है जब सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया थाd8b49b, लेकिन पब्लिक आउटक्राई के बाद इसे संशोधित कर दिया गया। अब अदालत का निर्देश है कि कुत्तों को स्टेरलाइज और वैक्सीनेट करके वापस छोड़ा जाए, लेकिन आक्रामक कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए1c332f6681e9। किरंदुल जैसे छोटे शहरों में इन आदेशों का पालन न होना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन को ABC (एनिमल बर्थ कंट्रोल) प्रोग्राम को मजबूत करना चाहिए, जिसमें कुत्तों की स्टेरलाइजेशन और वैक्सीनेशन शामिल है, ताकि आबादी नियंत्रित रहे और हमले कम हों।

*आगे की राह: समाधान की जरूरत*

किरंदुल में इस समस्या का समाधान तत्काल कार्रवाई में निहित है। नगरपालिका को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए शेल्टर होम स्थापित करने, कुत्तों को पकड़ने और स्टेरलाइजेशन अभियान चलाने की जरूरत है। साथ ही, जन जागरूकता कार्यक्रम चलाकर लोगों को रेबीज से बचाव के बारे में शिक्षित किया जाए। अगर प्रशासन अब भी चुप रहा तो यह न केवल स्थानीय निवासियों के लिए खतरा बनेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है।

यह घटना एक चेतावनी है कि आवारा कुत्तों का मुद्दा अब इग्नोर नहीं किया जा सकता। प्रशासन को जागना होगा, वरना किरंदुल जैसे शहरों में असंतोष और बढ़ेगा।

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