*पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिकता का संगम: चोलनार में गायत्री परिवार द्वारा वृक्षारोपण और यज्ञ का आयोजन*
किरन्दुल/दन्तेवाड़ा, 24 अगस्त 2025: माता भगवती विद्यालय/आश्रम, चोलनार में रविवार को शांतिकुंज हरिद्वार के निर्देशानुसार पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम और कुण्डीय यज्ञ का आयोजन किया गया। इस आयोजन में गायत्री परिवार किरन्दुल और दन्तेवाड़ा की सक्रिय भागीदारी रही, जिसमें स्थानीय समुदाय, बच्चों और गुरुजनों ने उत्साहपूर्वक योगदान दिया।
*‘एक पेड़ मां और गुरुदेव के नाम’ अभियान*
‘एक पेड़ मां और गुरुदेव के नाम’ के तहत आयोजित इस वृक्षारोपण कार्यक्रम में गायत्री परिवार किरन्दुल से डी.पी. डहेरिया, राजेश निषाद, कामता प्रसाद, एन.पी. गुप्ता, श्रीमती प्रमिला शर्मा, शैल साहू, सावित्री निषाद और दन्तेवाड़ा से रीमा नाग के नेतृत्व में बहनों की टोली ने सक्रिय भाग लिया। वन विभाग के अधिकारी श्री राकेश मिश्रा की उपस्थिति में बच्चों और गुरुजनों ने मिलकर दर्जनों पौधे रोपे। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने और भावी पीढ़ी को हरियाली का महत्व समझाने का एक प्रेरणादायक प्रयास रहा।
*गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय यज्ञ के साथ सुख-शांति की कामना*
वृक्षारोपण के साथ-साथ नगर की सुख-शांति, समृद्धि और सभी के उज्जवल भविष्य की कामना के लिए एक कुण्डीय यज्ञ का आयोजन किया गया। इस यज्ञ में गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र की आहुतियों के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने इस पावन अवसर पर एकजुट होकर पर्यावरण और समाज के कल्याण के लिए संकल्प लिया।
*पर्यावरण और संस्कृति का अनूठा संगम*
यह आयोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति गायत्री परिवार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि आध्यात्मिकता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति उनके समर्पण को भी उजागर करता है। वन विभाग और स्थानीय समुदाय के सहयोग से यह कार्यक्रम एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है, जो दूसरों को भी पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्थान के लिए प्रेरित करेगा।
गायत्री परिवार के इस प्रयास की सराहना करते हुए श्री राकेश मिश्रा ने कहा, “ऐसे आयोजन पर्यावरण और समाज के प्रति हमारी जिम्मेद ari को याद दिलाते हैं। गायत्री परिवार का यह प्रयास सराहनीय है।”
यह आयोजन न केवल चोलनार बल्कि समूचे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आया है, जो पर्यावरण, संस्कृति और आध्यात्मिकता के सामंजस्य को दर्शाता है।

