*डी ए वी पब्लिक स्कूल किरंदुल CBSE संबद्ध स्कूल में बलात्कार आरोपी शिक्षक की पुनर्नियुक्ति: नियमों का उल्लंघन या पारदर्शिता की कमी?*
किरंदुल, दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 24 अगस्त 2025: DAV पब्लिक स्कूल, किरंदुल में शिक्षक राकेश कुमार की नियुक्ति एक बार फिर विवादों में घिर गई है। राकेश कुमार पर IPC की धारा 376(2)(ढ) के तहत बलात्कार का आरोप है, जो फिलहाल जिला सत्र न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपी को गिरफ्तारी के बाद जेल में 24 घंटे से अधिक समय बिताना पड़ा था, लेकिन जमानत पर रिहा होने के बाद स्कूल ने उन्हें दोबारा नियुक्त कर लिया। यह मामला CBSE के Affiliation Bye-Laws, POCSO Act, और छत्तीसगढ़ शिक्षा नियमों के संभावित उल्लंघन को उजागर करता है, जहां बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि मानी जाती है। साथ ही, RTI के माध्यम से मांगी गई जानकारी को स्कूल द्वारा अस्वीकार करना पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है, जो शिक्षा क्षेत्र में एक बड़े सवाल को जन्म दे रहा है।
*मामला का पृष्ठभूमि: आरोप से पुनर्नियुक्ति तक*
राकेश कुमार पर लगे आरोप गंभीर हैं—बलात्कार का केस, जो बच्चों या महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े POCSO Act के प्रावधानों से भी जुड़ सकता है, यदि पीड़ित नाबालिग हो। गिरफ्तारी के बाद FIR दर्ज हुई, जेल हुई, और अब जमानत पर बाहर हैं, लेकिन केस चल रहा है। स्कूल ने उन्हें निष्कासित किया था, लेकिन बाद में पुनः नियुक्ति दी गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय स्कूल प्रबंधन की आंतरिक नीतियों पर आधारित हो सकता है, लेकिन CBSE और राज्य शिक्षा विभाग के नियमों से यह टकराव पैदा कर रहा है। क्या स्कूल ने बैकग्राउंड चेक की प्रक्रिया का पालन किया? या बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाला गया?
*CBSE नियम: क्रिमिनल केस में नियुक्ति पर सख्ती*
CBSE Affiliation Bye-Laws (2018) में स्पष्ट प्रावधान हैं कि शिक्षकों की नियुक्ति से पहले बैकग्राउंड वेरिफिकेशन अनिवार्य है, जिसमें क्रिमिनल रिकॉर्ड शामिल होता है। यदि कोई शिक्षक गंभीर अपराध जैसे बलात्कार या POCSO से जुड़े मामले में आरोपी है, तो उनकी नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति नहीं की जा सकती, खासकर जब केस विचाराधीन हो। CBSE की गाइडलाइंस ऑन स्कूल सेफ्टी एंड सिक्योरिटी (2021) में MHRD के निर्देशों के अनुसार, स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) फॉलो करना होता है।
POCSO Act 2012 के तहत, स्कूलों को सेक्शुअल ऑफेंस की रिपोर्टिंग और रोकथाम के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है—हाइडिंग या इग्नोरिंग एक अपराध है।b5b1c4 यदि आरोपी शिक्षक को दोबारा नियुक्त किया गया, तो यह Bye-Laws के अध्याय 3 (शिक्षक योग्यता और आचरण) और अध्याय 5 (सुरक्षा) का उल्लंघन हो सकता है, जहां क्रिमिनल केस वाले व्यक्तियों को बच्चों के संपर्क में नहीं रखा जा सकता। CBSE ने POCSO पर अवेयरनेस के लिए कई सर्कुलर जारी किए हैं, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखने का आरोप लग रहा है।c2559a
ncert.nic.in
cbse.gov.in
*RTI का अस्वीकार: प्राइवेट स्कूलों की पारदर्शिता पर सवाल*
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), दंतेवाड़ा से RTI के माध्यम से जानकारी मांगी गई थी—शिक्षक की नियुक्ति के नियम, बैकग्राउंड चेक, और स्कूल की संबद्धता। लेकिन DAV स्कूल ने जवाब दिया कि वे RTI के दायरे में नहीं आते, इसलिए कोई जानकारी नहीं देंगे। यह जवाब चौंकाने वाला है, क्योंकि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हाल ही में इसी तरह के केस में फैसला दिया कि प्राइवेट स्कूल RTI से पूरी तरह बाहर नहीं हैं, खासकर जब बच्चों की सुरक्षा या पब्लिक इंटरेस्ट शामिल हो।6c4c70 हाई कोर्ट ने एक मामले में स्कूल को छात्र रिकॉर्ड साझा करने का आदेश दिया, RTI नॉट एप्लिकेबल के बावजूद।81ba28 भारत में प्राइवेट CBSE संबद्ध स्कूल डायरेक्ट RTI के अंदर नहीं आते, लेकिन यदि वे राज्य सरकार से NOC या फंडिंग लेते हैं, तो इंडायरेक्ट रूप से जवाबदेह हैं।136208 DEO को स्कूल की संबद्धता की निगरानी का अधिकार है, लेकिन यहां स्कूल ने DEO की अथॉरिटी को ही नकार दिया, जो छत्तीसगढ़ शिक्षा नियमों का उल्लंघन दर्शाता है। क्या DEO को स्कूल की संचालन नीतियों की जानकारी नहीं? यह RTI Act 2005 की भावना के खिलाफ है, जहां पब्लिक इंटरेस्ट में जानकारी दी जानी चाहिए।
*छत्तीसगढ़ शिक्षा नियम: क्रिमिनल बैकग्राउंड पर क्या कहते हैं?*
छत्तीसगढ़ स्कूल एजुकेशन गजेटेड सर्विस (स्कूल लेवल सर्विस) रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन रूल्स 2008 में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए योग्यता, TET/CTET, और चरित्र प्रमाणपत्र अनिवार्य हैं।f4e851 क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को अयोग्य माना जाता है, खासकर गंभीर अपराधों में। RTE Act 2009 के तहत, स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है, और POCSO से जुड़े मामलों में कोई लचीलापन नहीं। राज्य के स्कूल सेफ्टी गाइडलाइंस में बैकग्राउंड चेक शामिल है, जहां जेल में रह चुके या विचाराधीन केस वाले शिक्षकों की नियुक्ति निषिद्ध है।46eb59 DAV जैसे प्राइवेट स्कूल CBSE और राज्य NOC पर चलते हैं, लेकिन यहां नियमों को नजरअंदाज करने का आरोप है। यदि एक शिक्षक पर सवाल है, तो अन्य नियुक्तियों पर भी संदेह उठता है—क्या स्कूल प्रबंधन अपनी आंतरिक नीतियों से ऊपर है?
*विश्लेषण: बड़ा सवाल और आगे की राह*
यह मामला सिर्फ एक शिक्षक की नियुक्ति नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल है। CBSE और राज्य नियम बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन पुनर्नियुक्ति से लगता है कि आर्थिक या प्रशासनिक दबाव हावी हो रहे हैं। RTI का अस्वीकार पारदर्शिता की कमी दिखाता है, जो प्राइवेट स्कूलों की जवाबदेही पर बहस छेड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि DEO या CBSE को जांच शुरू करनी चाहिए, और यदि उल्लंघन साबित हुआ तो संबद्धता रद्द हो सकती है। अभिभावकों और समाज के लिए यह अलर्ट है—स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो? इस मुद्दे पर हाई कोर्ट या NCPCR से हस्तक्षेप की मांग बढ़ रही है। DAV प्रबंधन से संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन यह खबर शिक्षा सुधार की दिशा में एक कदम हो सकती है।
