*किरंदुल: बुजुर्ग भूलन प्रसाद की जमीन पर अवैध कब्जे का सनसनीखेज मामला, सिंह परिवार पर गंभीर आरोप*
किरंदुल के वार्ड नंबर 8 में एक गरीब और बीमार बुजुर्ग भूलन प्रसाद की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिसमें इकबाल सिंह और उनके रिश्तेदारों पर गंभीर आरोप लगे हैं। भूलन प्रसाद (पिता स्वर्गीय फूलन प्रसाद) ने बताया कि उनकी जमीन, जिसका वे नियमित रूप से नगरपालिका में टैक्स जमा करते हैं, को इकबाल सिंह ने धमकी देकर और बलपूर्वक कब्जा कर लिया है। इस जमीन पर इकबाल ने आधा तबेला और घर बना लिया है, जिसमें एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) द्वारा निर्मित नाले के ऊपर भी अतिक्रमण किया गया है।
*भूलन प्रसाद की पीड़ा: बीमारी और लाचारी के बीच न्याय की गुहार*
भूलन प्रसाद, जो उम्र और बीमारी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं, ने बताया कि उन्होंने अपनी जमीन को वापस पाने के लिए नगरपालिका, तहसीलदार, और एसडीएम को कई बार आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, “मैं बीमार और लाचार हूं, बार-बार नगरपालिका नहीं जा सकता। इकबाल और उसके रिश्तेदारों ने धमकी देकर मेरी जमीन पर कब्जा किया है। ऐसा लगता है कि उनके रिश्तेदारों में कोई नेता है, इसलिए मेरे जैसे गरीब की कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
*सिंह परिवार पर आदतन अतिक्रमण का आरोप*
भूलन प्रसाद के आरोपों से यह स्पष्ट होता है कि सिंह परिवार पर सरकारी और निजी संपत्तियों पर अतिक्रमण का गंभीर इल्जाम है। वार्ड नंबर 1 में इकबाल के रिश्तेदार द्वारा नगरपालिका के नाले पर तीन मंजिला इमारत बनाए जाने का मामला भी चर्चा में है। भूलन का कहना है कि उनकी जमीन का आधा हिस्सा और एनएमडीसी द्वारा निर्मित नाले का हिस्सा अवैध रूप से कब्जा कर तबेला बनाया गया है। यह सवाल उठता है कि क्या सिंह परिवार आदतन सरकारी नालियों और गरीबों की जमीन पर कब्जा करने में माहिर है?
*नगरपालिका की भूमिका पर सवाल*
इस मामले में नगरपालिका की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। भूलन प्रसाद का कहना है कि जब किसी गरीब का मकान या दुकान अवैध घोषित होती है, तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन अमीरों और प्रभावशाली लोगों द्वारा सरकारी नालों या जमीन पर कब्जा करने पर न केवल कार्रवाई रुक जाती है, बल्कि सहयोग भी मिलता है। यह दोहरा रवैया गरीब और अमीर के बीच भेदभाव को उजागर करता है।
*कानूनी और सामाजिक सवाल*
यह मामला न केवल अवैध कब्जे का है, बल्कि यह समाज में गरीबों और कमजोर वर्गों के साथ हो रहे अन्याय को भी दर्शाता है। भूलन प्रसाद जैसे बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति, जो अपनी जमीन के लिए वर्षों से टैक्स दे रहे हैं, को अपनी संपत्ति वापस पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। यह सवाल उठता है कि आखिर भूलन प्रसाद जैसे लोग न्याय के लिए कहां जाएं? क्या प्रभावशाली लोगों के सामने गरीबों की आवाज दबा दी जाएगी?
*क्या कहता है कानून?*
भारतीय कानून के तहत, किसी भी निजी संपत्ति पर बलपूर्वक कब्जा करना गैरकानूनी है। साथ ही, सरकारी संपत्ति, जैसे नाले, पर अतिक्रमण करना भी गंभीर अपराध है। यदि भूलन के दावे सही हैं कि वे नियमित रूप से अपनी जमीन का टैक्स जमा करते हैं, तो उनकी संपत्ति का मालिकाना हक स्पष्ट है। इसके बावजूद, स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता सवालों को जन्म देती है।
*निष्कर्ष* और मांगयह मामला किरंदुल में गरीबों के साथ हो रहे अन्याय का प्रतीक है। भूलन प्रसाद की गुहार है कि उनकी जमीन से अवैध कब्जा हटाया जाए और उन्हें उनका हक मिले। स्थानीय प्रशासन, खासकर नगरपालिका और तहसीलदार, को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, सिंह परिवार द्वारा सरकारी नालों पर किए गए अतिक्रमण की भी जांच होनी चाहिए। यह खबर न केवल भूलन प्रसाद की पीड़ा को सामने लाती है, बल्कि समाज में गरीबों और प्रभावशाली लोगों के बीच बढ़ते अंतर को भी उजागर करती है।
नोट: यह खबर स्थानीय प्रशासन से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग करती है, ताकि भूलन प्रसाद जैसे कमजोर और बीमार व्यक्ति को उनका हक मिल सके।

